11th Hindi Subjective All Chapters Bihar Board

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पूस की रात

लघुउत्तरीय प्रश्न (गद्यखंड)

प्रश्न 1. मुन्नी की नजर में खेती और मजदूरी में क्या अंतर है? वह हल्कू से खेती छोड़ देने के लिए क्यों कहती है?

उत्तर: मुन्नी के अनुसार खेती और मजदूरी में निम्नलिखित अंतर हैं:

  • खेती: खेती की आमदनी पूरी तरह से अनिश्चित होती है। इसमें जितनी भी कमाई होती है, वह पुराना कर्ज चुकाने या खेती के दूसरे कामों में ही खत्म हो जाती है। मेहनत करने के बाद भी ठंड में ठिठुरना पड़ता है और दूसरों की डांट सुननी पड़ती है।

  • मजदूरी: मजदूरी करने से कम से कम रोज के खाने-पीने का इंतजाम हो जाता है। इसमें किसी की धौंस या घुड़की नहीं सहनी पड़ती और इंसान चैन की रोटी खा सकता है।

मुन्नी हल्कू से खेती छोड़ देने के लिए इसलिए कहती है क्योंकि वह अपने पति को कड़ाके की ठंड में बिना कंबल के रात भर खेतों की रखवाली करते नहीं देख सकती। वह जानती है कि इस खेती से उन्हें सिर्फ कर्ज और तकलीफ ही मिल रही है।

प्रश्न 2. लेखक ने पवन को निर्दय क्यों कहा है? निर्दय पवन द्वारा पत्तियों का कुचलना से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:

  • पवन को निर्दय कहना: लेखक ने हवा (पवन) को 'निर्दय' (बेरहम) इसलिए कहा है क्योंकि पूस की रात में बहने वाली हवा इतनी बर्फीली और ठंडी है कि वह हल्कू जैसे गरीब किसान की मजबूरी और तकलीफ को थोड़ा भी नहीं समझती और उसे लगातार तड़पाती रहती है।

  • पत्तियों का कुचलना: ओस की बूंदों के गिरने से बगीचे की सूखी पत्तियाँ गीली होकर जमीन से चिपक गई थीं। जब उनके ऊपर से तेज और भारी ठंडी हवा गुजरती है, तो ऐसा लगता है जैसे वह हवा उन पत्तियों को कुचल रही हो।

💡 विशेष: यहाँ लेखक ने ठंडी हवा (पवन) को समाज के शोषक वर्ग (अत्याचारी/अमीर लोग) के रूप में और बेबस पत्तियों को शोषित वर्ग (गरीब/मजबूर इंसान) के रूप में दिखाया है।

प्रश्न 3. हल्कू और मुन्नी दोनों के चरित्र की विशेषताएँ बताएँ। आपको इन दोनों में अधिक महत्वपूर्ण कौन लगा?

उत्तर: मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी में दोनों ही पात्रों का अपना विशेष महत्व है:

  • हल्कू की विशेषताएँ: हल्कू एक अत्यंत मेहनती, सीधा-साधा और स्वाभिमानी किसान है। वह बेहद गरीब है, लेकिन आत्मसम्मान से जीता है। वह गाली और अपमान सुनने से बेहतर समझता है कि कंबल के लिए बचाए पैसे कर्ज में दे दिए जाएँ।

  • मुन्नी की विशेषताएँ: मुन्नी एक समझदार, व्यावहारिक और अपने पति की चिंता करने वाली कुशल गृहणी है। वह डरती नहीं है और महाजन के सामने भी अपनी बात मजबूती से रखती है। वह परिस्थितियों को भांपकर सही और व्यावहारिक सलाह देती है।

हमारा दृष्टिकोण: कहानी में दोनों ही चरित्र अपनी-अपनी जगह बहुत महत्वपूर्ण हैं। फिर भी, मुन्नी का चरित्र थोड़ा अधिक महत्वपूर्ण जान पड़ता है। इसका कारण यह है कि जहाँ हल्कू परिस्थितियों के सामने हार मान लेता है और पुरानी व्यवस्था से बंधा रहता है, वहीं मुन्नी एक नई और व्यावहारिक सोच रखती है जो जीवन को बेहतर बनाने के लिए बदलाव (खेती छोड़कर मजदूरी करने) की हिम्मत दिखाती है।

प्रश्न 4. यह कहानी भारतीय किसान के मजदूर बनने की त्रासदी की ओर संकेत करती है। कहानी के आधार पर स्पष्ट करें।

उत्तर: यह कहानी बिल्कुल साफ दिखाती है कि कैसे एक भारतीय किसान कर्ज और लाचारी के कारण मजदूर बनने पर मजबूर हो जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • कड़ी मेहनत का फल न मिलना: हल्कू रात-दिन खेतों में खून-पसीना बहाता है, लेकिन फिर भी उसके पास कड़ाके की ठंड से बचने के लिए एक कंबल तक खरीदने के पैसे नहीं जुड़ पाते।

  • कर्ज का बोझ: किसान जो कुछ भी कमाता है, वह महाजन (कर्ज देने वाले) का बकाया चुकाने में ही चला जाता है।

  • असुरक्षित और अनिश्चित आय: खेती में हमेशा पाला, ठंड या जानवरों द्वारा फसल नष्ट होने का डर रहता है। इसी वजह से हल्कू की पत्नी मुन्नी कहती है कि इस खेती से तो अच्छी मजदूरी है, जहाँ कम से कम चैन की रोटी तो मिलेगी और किसी की डांट नहीं सुननी पड़ेगी।

अंत में, जब नीलगाय हल्कू के पूरे खेत को चर जाती हैं, तो हल्कू दुखी होने के बजाय चैन की सांस लेता है कि अब उसे इस कड़ाके की ठंड में रात भर जागना नहीं पड़ेगा। यह स्थिति एक किसान का अपनी खेती से मोहभंग होने और मजदूर बनने की मजबूरी को बखूबी दर्शाती है।

कविता की परख

प्रश्न 5. कल्पना किसे कहते हैं? एक कवि के लिए कल्पना का क्या महत्व है?

उत्तर:

  • कल्पना क्या है: कल्पना मन की वह शक्ति है जिसके सहारे कवि अपने मन में नए-नए भावों, दृश्यों और विचारों का चित्र बनाता है, और पाठक (पढ़ने वाला) भी उसे पढ़कर अपने मन में वैसा ही महसूस करता है।

  • कवि के लिए महत्व: एक कवि के लिए कल्पना बहुत जरूरी है। बिना कल्पना के कोई भी व्यक्ति कवि नहीं बन सकता। कल्पना की मदद से ही कवि अपनी कविता में रंग भरता है और उसे इतना सुंदर बनाता है कि वह सीधे पाठक के दिल को छू ले। इसके बिना कविता बेअसर और फीकी रह जाएगी।

प्रश्न 6. उपमा क्या है? कविता में उपमा का प्रयोग क्यों किया जाता है? पाठ के आधार पर उत्तर दें।

उत्तर:

  • उपमा क्या है: जब किन्हीं दो अलग-अलग चीजों के रूप, गुण या व्यवहार में बराबरी (तुलना) दिखाई जाती है, तो उसे 'उपमा' कहते हैं। उदाहरण के लिए— "उसका मुख चाँद के समान सुंदर है" या "शिवाजी शेर की तरह वीर थे।"

  • कविता में इसका प्रयोग क्यों होता है: कविता में उपमा का प्रयोग किसी बात या भावना को और ज्यादा असरदार और गहरा बनाने के लिए किया जाता है। जैसे, सिर्फ यह कहने के बजाय कि "चेहरा सुंदर है", अगर कवि कह दे कि "चेहरा चाँद जैसा है", तो सुंदरता की भावना मन में और ज्यादा बढ़ जाती है और कविता आकर्षक लगती है।

आँखों देखा गदर

प्रश्न 7. दसवें दिन की लड़ाई का क्या महत्व था? दसवें दिन की लड़ाई का वर्णन संक्षेप में करें।

उत्तर:

  • लड़ाई का महत्व: अंग्रेजों और झाँसी के बीच चल रहे युद्ध में दसवें दिन की लड़ाई बहुत ही खास और निर्णायक थी। इसी दिन पर झाँसी का भविष्य टिका हुआ था, क्योंकि झाँसी की मदद के लिए तांत्या टोपे अपनी पंद्रह हजार फौज के साथ आ चुके थे और दूसरी तरफ अंग्रेज कप्तान भी अपनी सेना के साथ पूरी ताकत से डटा हुआ था।

  • लड़ाई का वर्णन: उस दिन दोनों सेनाओं के बीच बहुत भयानक युद्ध हुआ। दोनों तरफ के सैनिक अपनी जान की बाजी लगाकर आमने-सामने लड़ रहे थे। तोपों, बंदूकों और बिगुल की आवाजों से पूरा आसमान गूंज रहा था। चारों तरफ मार-काट मची हुई थी। लेकिन दुर्भाग्य से, इस भयंकर युद्ध में धीरे-धीरे तांत्या टोपे की सेना पिछड़ने लगी और अंग्रेज फौज भारी पड़ गई।

प्रश्न 8. भेदिए ने लक्ष्मीबाई को आकर क्या खबर दी? लक्ष्मीबाई पर इस खबर का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

  • भेदिए की खबर: रात के समय जब रानी लक्ष्मीबाई सुरक्षा का जायजा ले रही थीं, तब एक भेदिए (गुप्तचर) ने आकर उन्हें खुशखबरी दी कि इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी अंग्रेजी फौज को अपनी जीत दिखाई नहीं दे रही है। अंग्रेजों का गोला-बारूद लगभग खत्म हो चुका है और उनकी सेना अब ज्यादा से ज्यादा बस अगले दिन दोपहर तक ही लड़ पाएगी, उसके बाद वे पीछे हट जाएँगे।

  • रानी पर प्रभाव: यह खबर सुनकर रानी लक्ष्मीबाई को बहुत बड़ी राहत और खुशी मिली। उनके चेहरे पर चमक आ गई और उनमें एक नया जोश, हिम्मत और साहस जाग उठा।

प्रश्न 9. विलायती बहादुर कौन थे? पाठ में वर्णित उनकी भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर:

  • विलायती बहादुर कौन थे: झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के यहाँ काम करने वाले लगभग पंद्रह सौ (1500) मुसलमान सैनिक, जो बहुत समय से उनके वफादार थे, उन्हें 'विलायती बहादुर' कहा गया है।

  • उनकी भूमिका: ये सैनिक सचमुच बहुत जांबाज और वफादार थे। जब भी झाँसी पर कोई मुसीबत आई, इन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए अंग्रेजों से लोहा लिया और उनके छक्के छुड़ा दिए। शत्रुओं से घिरी झाँसी से रानी लक्ष्मीबाई को सुरक्षित बाहर निकालने में इन विलायती बहादुरों का योगदान बहुत ही सराहनीय था।

बेजोड़ गायिका : लता मंगेशकर

प्रश्न 10. शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत में क्या अंतर है? आप दोनों में किसे बेहतर मानते हैं, और क्यों?

उत्तर:

शास्त्रीय संगीत (Classical Music) और चित्रपट संगीत (Filmi Music) में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

  • शास्त्रीय संगीत: इसका मुख्य गुण गंभीरता है। यह कड़े नियमों और तालों से बंधा होता है, जिसे सीखने में सालों लग जाते हैं।

  • चित्रपट संगीत: इसका मुख्य गुण तेजी, चपलता और मनोरंजन है। इसके नियम थोड़े आसान होते हैं और इसमें आधे तालों का इस्तेमाल भी किया जाता है, ताकि आम लोग इसे आसानी से समझ सकें।

हमारा दृष्टिकोण: संगीत की दुनिया में दोनों का अपना अलग महत्व है, इसलिए किसी एक को दूसरे से बेहतर कहना ठीक नहीं होगा। यह सुनने वाले की अपनी पसंद पर निर्भर करता है। जहाँ शास्त्रीय संगीत मन को शांति और सुकून देता है, वहीं चित्रपट संगीत आम लोगों का भरपूर मनोरंजन करता है और बेहद लोकप्रिय है।

प्रश्न 11. कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर के गायन की कौन-कौन-सी विशेषताएँ बताई हैं? साथ ही उन्होंने लता मंगेशकर के गायन के किन दोषों की चर्चा की है?

उत्तर: लेखक कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर के गाने की खूबियों और कमियों को इस तरह बताया है:

  • गायन की विशेषताएँ (खूबियाँ):

  • गानपन: लता जी के गानों की सबसे बड़ी खूबी उनका 'गानपन' है, यानी उनका गाना सुनते ही सीधे दिल को छू लेता है और लोग झूम उठते हैं।

  • स्वरों की निर्मलता: उनकी आवाज में एक गजब का भोलापन और साफ-सफाई (निर्मलता) है।

  • नादमय उच्चार: उनके गाने के दो शब्दों के बीच का अंतर बहुत ही सुरीला और सुंदर लगता है

  • शब्दों का सुंदर जुड़ाव (नादमय उच्चार): लेखक कहते हैं कि लता जी के गाने की एक और बड़ी खूबी यह है कि जब वे गाती हैं, तो दो शब्दों के बीच का अंतर स्वरों के आलाप द्वारा इतनी सुंदरता से भरा होता है कि लगता है दोनों शब्द एक-दूसरे में घुलकर एक हो गए हैं। ऐसा गाना बहुत कठिन साधना से आता है, पर लता जी के लिए यह बिल्कुल सहज और स्वाभाविक है।

  • करुण रस पर लेखक का विचार: आम लोग मानते हैं कि लता जी दुख भरे या करुण रस के गाने बहुत प्रभावशाली गाती हैं, लेकिन लेखक इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि लता जी ने करुण रस के गानों के साथ उतना न्याय नहीं किया है, जबकि उन्होंने श्रृंगार रस (प्रेम और आनंद वाले) के तेज और मध्यम गति के गानों को बहुत ही शानदार तरीके से गाया है।

  • गायन का मुख्य दोष (ऊँची पट्टी): लेखक के अनुसार लता जी के गायन में दूसरा बड़ा दोष यह है कि वे बहुत ऊँचे सुर (ऊँची पट्टी/High Pitch) में गाती हैं। इसमें संगीत निर्देशकों (Music Directors) की भी गलती है, जो उनसे बिना वजह बहुत ऊँचे सुर में गवाते और चिलवाते हैं

प्रश्न 12. लता मंगेशकर भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ हैं। लेखक के इस कथन पर आप अपना विचार प्रस्तुत करें।

उत्तर: लेखक कुमार गंधर्व का यह कहना बिल्कुल सच है कि लता मंगेशकर भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ (अद्वितीय) हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • असरदार गायकी: लता जी के मुकाबले की कोई दूसरी गायिका नजर नहीं आती। उनसे पहले नूरजहाँ का बहुत नाम था, लेकिन लता जी ने अपनी गायकी से उन्हें भी बहुत पीछे छोड़ दिया।

  • लंबे समय तक राज: पिछले पचास सालों से वे संगीत की दुनिया पर राज कर रही हैं। इस बीच कई नई गायिकाएँ आईं, पर लता जी का स्थान सबसे ऊपर ही रहा। आज भी उनकी आवाज वैसी ही कोमल, सुरीली और मन को छूने वाली है।

  • गानपन और लोकप्रियता: उनके गानों में 'गानपन' (यानी सीधा दिल पर असर करने की कला) कूट-कूट कर भरा है। वे शास्त्रीय संगीत की अच्छी समझ रखते हुए भी आम लोगों के लिए इतना सुरीला गाती हैं कि हर कोई उनका दीवाना हो जाता है। उनके गानों ने आम लोगों में संगीत की समझ को बेहतर बनाया है।

चलचित्र (Cinema)

प्रश्न 13. चलचित्र-निर्माण कार्य को मोटे तौर पर किन पर्यायों में विभक्त किया जाता है? प्रत्येक का संक्षिप्त परिचय दें।

उत्तर: सिनेमा या फिल्म बनाने (चलचित्र-निर्माण) के काम को मुख्य रूप से तीन चरणों (पर्यायों) में बाँटा जाता है:

  1. पहला चरण (स्क्रिप्ट और तैयारी): इसमें फिल्म की कहानी, नाटक की रचना और कलाकारों का चुनाव किया जाता है ताकि कहानी के हिसाब से सही पात्र मिल सकें।

  2. दूसरा चरण (शूटिंग): इसे मुख्य रूप से 'शूटिंग' कहा जाता है। इसमें कहानी के माहौल के हिसाब से लोकेशन या सेट्स तैयार किए जाते हैं और अभिनेताओं के अभिनय को कैमरे में रिकॉर्ड (कैप्चर) किया जाता है।

  3. तीसरा चरण (एडिटिंग): शूटिंग के बाद रिकॉर्ड किए गए दृश्यों या तस्वीरों को कहानी के हिसाब से क्रम से जोड़ना, छांटना और सहेजना 'एडिटिंग' (संपादन) कहलाता है।

प्रश्न 14. ‘पथेर पांचाली’ किसका उपन्यास है? पाठ में ‘पथेर पांचाली’ की जिस कथा अंश का उल्लेख है, उसका सारांश लिखें।

उत्तर:

  • लेखक का नाम: ‘पथेर पांचाली’ प्रसिद्ध लेखक विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय का उपन्यास है।

  • कथा अंश का सारांश: पाठ में दिए गए हिस्से की कहानी बहुत भावुक है। हरिहर नाम का व्यक्ति बहुत लंबे समय के बाद कमाकर अपने गाँव लौटता है। वह घर पहुँचते ही खुशी-खुशी अपने बच्चों का नाम लेकर पुकारता है। उसकी पत्नी सर्वजया चुपचाप शांत मन से उसके हाथ से सामान की गठरी ले लेती है, जिसमें हरिहर अपनी बेटी दुर्गा के लिए साड़ी, आलता आदि चीजें लाया था। पत्नी का शांत व्यवहार देखकर हरिहर को पहले तो कुछ शक नहीं होता, लेकिन जब बार-बार पुकारने पर भी बच्चे उसके पास नहीं आते, तो वह परेशान हो जाता है। अंत में सर्वजया अपने आंसू नहीं रोक पाती और रोते हुए बोल पड़ती है— "अजी दुर्गा कहाँ है? बिटिया मुझसे विदा..." (अर्थात उनकी बेटी दुर्गा अब इस दुनिया में नहीं रही है)। यह दृश्य एक गरीब परिवार के दुख को गहराई से दिखाता है।

मेरी वियतनाम यात्रा

प्रश्न 15. हो-ची-मीन्ह की तस्वीर अंतःसलिला फल्गु नदी की तरह लेखक के हृदय को सींचती रही है। लेखक हो-ची-मीन्ह से इतना प्रभावित क्यों हैं?

उत्तर: लेखक श्री भोला पासवान शास्त्री जब वियतनाम के महान नेता 'हो-ची-मीन्ह' की पेंसिल से बनी तस्वीर को देखते हैं, तो देखते ही रह जाते हैं। लेखक उनके प्रभावित होने के मुख्य कारण बताते हैं:

  • सादगी और तेज: हो-ची-मीन्ह का शरीर दुबला-पतला था, जो उनकी सादगी को दिखाता था। लेकिन उनके चेहरे पर एक गजब का तेज, जादू और प्रेरणा देने वाली शक्ति थी। उनकी लहसुन जैसी आकृति की दाढ़ी उन पर बहुत अच्छी लग रही थी।

  • गहरा असर: इस तस्वीर का लेखक के मन पर इतना गहरा और जादुई असर हुआ कि उनका चेहरा हमेशा के लिए लेखक के दिल में बस गया। जैसे फल्गु नदी अंदर ही अंदर बहकर जमीन को सींचती है, वैसे ही हो-ची-मीन्ह के विचार और उनकी सादगी लेखक को हमेशा अंदर से प्रेरित करती रही।

प्रश्न 16. "अंतर्राष्ट्रीयता पनप नहीं सकती, जब तक राष्ट्रीयता का पूर्ण विकास न हो।" इस कथन पर विचार करें और अपना मत दें।

उत्तर: लेखक भोला पासवान शास्त्री का यह कथन पूरी तरह व्यावहारिक और सच है। इसके मायने इस प्रकार हैं:

  • राष्ट्रप्रेम पहला कदम है: 'अंतर्राष्ट्रीयता' का मतलब है पूरे विश्व को अपना परिवार मानना (वसुधैव कुटुंबकम्)। लेकिन लेखक का मानना है कि जो व्यक्ति अपने खुद के देश (राष्ट्र) से प्रेम नहीं कर सकता, वह पूरी दुनिया या दूसरे देशों से सच्चा प्रेम कभी नहीं कर सकता।

  • भावना का विस्तार: अपने देश के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जब पूरी तरह मजबूत हो जाती है, तभी वही भावना आगे बढ़कर पूरी दुनिया के लिए भलाई की सोच में बदलती है।

इसलिए, हम लेखक की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि पूरी दुनिया को एक धागे में पिरोने के लिए सबसे पहले अपने देश के प्रति वफादार और जागरूक होना जरूरी है।

प्रश्न 17. 'जिंदगी का हर कदम मंजिल है। इस मंजिल तक पहुँचने से पहले साँस रुक सकती है।' इस कथन का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: लेखक के इस कथन का सीधा सा अर्थ यह है कि हमारा जीवन बेहद अनिश्चित है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • हर पल एक मंजिल है: जिंदगी का हर एक दिन, हर एक कदम अपने आप में एक छोटी मंजिल की तरह होता है, जहाँ पहुँचकर इंसान थोड़ी देर आराम करता है और फिर आगे बढ़ जाता है।

  • अनिश्चित भविष्य: मौत कब, कहाँ और किस मोड़ पर आ जाए, यह कोई नहीं जानता। इंसान अपनी अगली मंजिल तय तो करता है, लेकिन वहाँ पहुँचने से पहले ही उसकी साँसें रुक सकती हैं (यानी जीवन समाप्त हो सकता है)। इसलिए जीवन के हर कदम को ही मंजिल मानकर उसका सम्मान करना चाहिए।

सिक्का बदल गया

प्रश्न 18. 'शाहनी चौंक पड़ी। देर-मेरे घर में मुझे देर। आँसुओं की भँवर में न जाने कहाँ से विद्रोह उमड़ पड़ा।' इस उद्धरण की सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर:

  • प्रसंग: ये पंक्तियाँ लेखिका कृष्णा सोबती द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध कहानी 'सिक्का बदल गया' से ली गई हैं। यह कहानी भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दर्द पर आधारित है।

  • व्याख्या: शाहनी पूरे गाँव की मालकिन थी, अमीर थी, लेकिन अब वह विधवा और अकेली है। बंटवारे के कारण उसे अपना वह घर, अपनी वह हवेली छोड़कर हमेशा के लिए कैम्प में जाना पड़ रहा है, जिसे उसने खून-पसीने से सींचा था। जब उसे चलने के लिए कहा जाता है, तो वह चौंक जाती है कि जिस घर की वह मालकिन थी, आज उसी घर में उसे 'देर' होने की बात कही जा रही है। वह गहरे दुख में डूब जाती है, उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं, लेकिन साथ ही उसके मन में इस बदली हुई परिस्थिति और किस्मत के खिलाफ एक गुस्सा और विद्रोह भी जाग उठता है कि समय बदलते ही कैसे अपनों का व्यवहार बदल गया।

प्रश्न 19. घर छोड़ते समय शाहनी की मनोदशा का वर्णन अपने शब्दों में करें।

उत्तर: घर छोड़ते समय शाहनी का मन गहरे दुख और लाचारी से भरा हुआ था:

  • यादों का जीवंत होना: अपनी उस बड़ी हवेली को छोड़ते समय शाहनी को उसका एक-एक कोना याद आ रहा था। अपने पति (शाहजी) की मौत के बाद जिस कुल की इज्जत और संपत्ति को उसने बड़े लाड़ से संभालकर रखा था, आज वह सब हमेशा के लिए छूट रहा था।

  • अंतिम प्रणाम: विदाई के उस आखिरी पल में उसने अपनी हवेली को दोनों हाथ जोड़कर सिर झुकाकर प्रणाम किया। यह उसका अपने घर के लिए आखिरी दर्शन था, जिसे करते हुए उसकी आँखों से आँसू छलक पड़े।

प्रश्न 20. पाठ में लेखक ने कोसी को 'माई' भी कहा है और 'डायन कोसी' शीर्षक से रिपोर्ताज लिखने की चर्चा भी की है। लेखक का कोसी से कैसा रिश्ता है?

उत्तर: लेखक का कोसी नदी से बहुत गहरा, अनोखा और भावनात्मक रिश्ता है, जिसके दो रूप हैं:

  • 'माई' का रूप (कोमल रूप): लेखक कोसी नदी के किनारे ही जन्मे और पले-बढ़े हैं। कोसी उनके लिए सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि ममता से भरी माँ (माई) के समान है, जिससे उनका बचपन से गहरा लगाव है।

  • 'डायन' का रूप (कठोर रूप): कोसी नदी जब बाढ़ लाती है, तो तबाही मचा देती है। हजारों लोगों के घर और जानें पल भर में उजड़ जाती हैं। इसी भयानक और विनाशकारी रूप के कारण लेखक ने इसे 'डायन कोसी' भी कहा है।

संक्षेप में कहें तो लेखक कोसी नदी के प्यार और गुस्से, दोनों रूपों से अच्छी तरह परिचित हैं।

प्रश्न 21. 'मानव ही सर्वश्रेष्ठ प्राणी है।' उत्तरी स्वप्नपरी : हरी क्रांति के संदर्भ में स्पष्ट करें।

उत्तर: इस संसार में मनुष्य को सबसे बुद्धिमान और सर्वश्रेष्ठ जीव माना गया है। पाठ के आधार पर इसे इस तरह समझा जा सकता है:

  • मुश्किलों में उम्मीद: मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो बड़ी से बड़ी निराशा और आपदा के समय भी उम्मीद की किरण जगाए रखता है। वह अपनी मेहनत और सूझबूझ से प्रकृति को भी अपने रहने लायक बना लेता है।

  • तबाही को खुशहाली में बदलना: कोसी नदी को हमेशा उत्तर बिहार का अभिशाप (शोक) माना जाता था, क्योंकि इसकी बाढ़ सब कुछ तबाह कर देती थी। लेकिन आज इंसानी प्रयासों और हरी क्रांति (New Farming Techniques) के कारण उसी इलाके में शानदार खेती होने लगी है। जहाँ कभी भुखमरी थी, वहाँ अब खुशहाली और अमन-चैन है। यह बदलाव साबित करता है कि इंसान चाहे तो अपनी मेहनत से नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है।

प्रश्न 22. सुदामाजी की किस कथा का उल्लेख लेखक ने पाठ में किया है?

उत्तर:

  • सुदामा जी की कथा: पौराणिक कहानी के अनुसार, जब गरीब सुदामा अपने बचपन के मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका गए थे, तब श्रीकृष्ण ने सामने से तो कोई दिखावा नहीं किया, लेकिन चुपके से सुदामा की टूटी झोपड़ी को एक आलीशान महल में बदल दिया और उनका पूरा घर धन-धान्य से भर दिया।

  • पाठ से जुड़ाव: लेखक ने इस कथा का सीधा इस्तेमाल न करके, इसके आधार पर अपने गाँव के एक सीधे-साधे ग्रामीण भाई की स्थिति दिखाई है। वह व्यक्ति बहुत पहले अपना गाँव छोड़कर पूरब (बंगाल) चला गया था। जब वह सात-आठ साल बाद अपनी थोड़ी सी जमीन बेचने वापस गाँव लौटा, तो गाँव का बदला हुआ रूप देखकर हैरान रह गया। जो गाँव कभी सूखा और वीरान था, वह अब हरी क्रांति के कारण फसलों से लहलहा रहा था और हर तरफ अमीरी थी। यह बदलाव उसे सुदामा के महल जैसा ही जादुई लगा।

एक दीक्षांत भाषण

प्रश्न 23. 'ज्ञानी कायर होता है। अविद्या साहस की जननी है। आत्मविश्वास कई तरह का होता है- धन का, बल का, ज्ञान का। मगर मूर्खता का आत्मविश्वास सर्वोपरि होता है।' इस कथन का व्यंग्यार्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने इस कथन के जरिए समाज के मूर्ख और अज्ञानी लोगों की जिद पर करारा मजाक (व्यंग्य) किया है। इसके मायने हैं:

  • ज्ञानी कायर क्यों?: ज्ञानी लोग किसी भी काम को करने से पहले उसके अच्छे-बुरे नतीजों के बारे में बहुत ज्यादा सोच-विचार करते हैं। इस वजह से वे सही समय पर फैसला नहीं ले पाते और पीछे हट जाते हैं, जिसे लेखक ने 'कायरता' कहा है।

  • अज्ञानी साहसी क्यों?: जिन लोगों के पास ज्ञान नहीं होता (अविद्या), वे बिना सोचे-समझे किसी भी काम में कूद पड़ते हैं। उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता, इसलिए वे ज्यादा साहसी दिखते हैं।

  • मूर्खों का आत्मविश्वास: अमीर को धन का और ताकतवर को बल का घमंड होता है, लेकिन मूर्ख व्यक्ति का आत्मविश्वास सबसे ऊपर होता है। वे किसी की सही बात या सलाह नहीं मानते और अपनी गलत बात पर भी पूरी जिद के साथ अड़े रहते हैं।

प्रश्न 24. नेताजी के अनुसार वे वर्तमान को बिगाड़ रहे हैं, ताकि छात्र भविष्य का निर्माण कर सकें। इस कथन का व्यंग्य स्पष्ट करें।

उत्तर: इस कथन में आजकल के राजनेताओं (नेताओं) के दोगलेपन पर तीखा व्यंग्य किया गया है:

  • नेताजी अपने भाषण में बड़े मजाकिया और झूठे अंदाज में कहते हैं कि छात्र देश का भविष्य हैं और उन्हें आगे चलकर देश को संभालना है। इसलिए हम नेता लोग आज के समय (वर्तमान) को पूरी तरह बिगाड़ने और भ्रष्टाचार फैलाने में लगे हैं, ताकि छात्रों के लिए भविष्य में उसे सुधारने का बहुत सारा काम बचा रहे।

  • व्यंग्य का अर्थ: असल में लेखक यह कहना चाहते हैं कि आज के स्वार्थी नेता अपने फायदे के लिए देश और समाज को अंदर से खोखला कर रहे हैं, लेकिन मंच पर खड़े होकर युवाओं के सामने देश के विकास की बड़ी-बड़ी और खोखली बातें करते हैं।

प्रश्न 25. नेताजी ने सच्चे क्रांतिकारियों के क्या लक्षण बताए हैं?

उत्तर: नेताजी ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में आजकल के दिखावटी आंदोलनकारियों पर तंज कसते हुए सच्चे क्रांतिकारियों के ये लक्षण बताए हैं:

  • दिखावे से दूर: सच्चे क्रांतिकारी देश में कोई बड़ा या बुनियादी बदलाव लाने के लिए बड़े-बड़े मंचों पर जाकर भाषण या आंदोलन नहीं करते।

  • छोटे स्तर पर संघर्ष: वे आम जनता के बीच रहकर रोजमर्रा की छोटी-मोटी समस्याओं के लिए बस कंडक्टर, गेटकीपर या चपरासी जैसे लोगों से ही उलझते या संघर्ष करते रहते हैं।

(इस प्रकार नेताजी के जरिए लेखक ने आज के समय में होने वाले दिखावटी आंदोलनों और नेताओं के असली चेहरे को सामने लाया है।)

सूर्य

प्रश्न 26. वेदों में सूर्य के संबंध में क्या कहा गया है? पाठ के आधार पर उत्तर दें।

उत्तर: वेदों (वैदिक साहित्य) में सूर्य को एक देवता माना गया है और उनके बारे में निम्नलिखित बातें कही गई हैं:

  • सूर्य का रथ: सूर्य देव एक पहिए वाले सुनहरे रथ पर सवार रहते हैं, जिसे सात बहुत ही शक्तिशाली घोड़े पलक झपकते ही $364\text{ मील}$ की तेज रफ्तार से दौड़ाकर ले जाते हैं।

  • संसार के रखवाले: सूर्य आकाश में घूमते हुए दुनिया की हर एक हलचल और गतिविधि पर अपनी नजर रखते हैं। वेदों में उन्हें पूरी पृथ्वी पर प्रकाश, ऊर्जा (ताकत) का कभी न खत्म होने वाला खजाना और जीवन को चलाने वाला मुख्य आधार कहा गया है।

प्रश्न 27. भारतीय पौराणिक गाथाओं के अनुसार, सूर्य के माता-पिता कौन थे? पाठ में सूर्य के जन्म के संबंध में दो कथाओं का उल्लेख है, उन्हें संक्षेप में लिखें।

उत्तर:

  • माता-पिता का नाम: भारतीय पुराणों के अनुसार, सूर्य के माता का नाम अदिति और पिता का नाम कश्यप था।

  • जन्म से जुड़ी दो कहानियाँ:

  • पहली कहानी: माता अदिति के आठ बच्चे थे। उनका आठवां बच्चा अंडे के आकार का था। इस अजीब आकार के कारण उसे त्याग दिया गया (छोड़ दिया गया)। वही बच्चा बाद में आकाश में जाकर 'मार्तंड' (सूर्य) कहलाया और अपनी चमक से पूरे ब्रह्मांड को रोशन किया।

  • सूर्य के जन्म से जुड़ी दूसरी कहानी: पौराणिक कथा के अनुसार, माता अदिति ने पहले अपने सात बेटों से इस ब्रह्मांड को बनाने (सृजन करने) के लिए कहा, लेकिन वे सातों ऐसा करने में असमर्थ रहे। तब अदिति ने अपने आठवें बेटे 'मार्तंड' (सूर्य) से यही काम करने को कहा और उन्होंने तुरंत दिन और रात बनाकर पूरी दुनिया को दिखा दिया।

प्रश्न 28. संज्ञा कौन थी? छाया से उसका क्या संबंध है? दोनों की संतानों के नाम लिखें।

उत्तर:

  • संज्ञा कौन थी और छाया से संबंध: पौराणिक कहानियों के अनुसार, संज्ञा भगवान विश्वकर्मा की बेटी और सूर्य देव की पत्नी थी। सूर्य का तेज और गर्मी बहुत ज्यादा थी, जिसे संज्ञा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। इसलिए उसने चालाकी से अपने जैसी ही हूबहू दिखने वाली एक परछाई बनाई, जिसका नाम 'छाया' रखा। संज्ञा उस छाया को सूर्य के पास छोड़कर खुद घोड़ी (अश्विनी) का रूप लेकर तपस्या करने चली गई। काफी समय तक छाया ही संज्ञा बनकर सूर्य के साथ रही, पर बाद में यह राज खुल गया। तब सूर्य देव भी घोड़े का रूप धरकर संज्ञा के पास पहुँचे।

  • दोनों की संतानें:

  • छाया और सूर्य के बच्चे: इनके मेल से 'शनि', 'सावर्णि', 'मनु' और 'तपत्ति' नाम के बेटे हुए (जो सूर्य के रथ के घोड़ों को हांकते हैं)।

  • संज्ञा और सूर्य के बच्चे: इनके मेल से दो बच्चे हुए जिन्हें 'अश्विनी कुमार' कहा जाता है। इनमें एक का नाम लासत्य और दूसरे का नाम दस्त्र है।

भोगे हुए दिन

प्रश्न 29. कहानी में शमीम की भूमिका का वर्णन अपने शब्दों में करें।

उत्तर: शमीम इस कहानी का मुख्य और अनुभवी कहानीकार (वाचक) है जो जगदलपुर का रहने वाला है। कहानी में उसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है:

  • शांदा साहब की देखभाल: शमीम के शहर में एक मुशायरा हुआ था, जिसमें मशहूर बुजुर्ग शायर 'शांदा साहब' आए थे। शमीम उन्हें आदर के साथ अपने घर ठहराता है ताकि उन्हें कोई तकलीफ न हो। इस दौरान वह शांदा साहब के बहुत करीब आ जाता है।

  • गरीबी और लाचारी को सामने लाना: जब शमीम शांदा साहब के घर जाता है, तो वहाँ की बेहद गरीबी और करुणा भरे माहौल को देखकर उसका दिल दहल जाता है। शमीम के जरिए ही पाठकों को पता चलता है कि देश के इतने बड़े और उस्ताद शायर, जिनका कभी बहुत नाम था, आज बुढ़ापे में गुमनामी और मुफलिसी (गरीबी) की जिंदगी जी रहे हैं।

संक्षेप में कहें तो शमीम वह जरिया है जो समाज के सामने उन बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों का सच लाता है, जिन्हें लोग बूढ़ा होने पर भूल जाते हैं।

प्रश्न 30. कहानी के शीर्षक 'भोगे हुए दिन' की सार्थकता पर विचार करें।

उत्तर: इस कहानी का नाम 'भोगे हुए दिन' शत-प्रतिशत सही और सटीक (सार्थक) है, क्योंकि यह पूरी कहानी शांदा साहब के बीते हुए शानदार दिनों और आज के बुरे दिनों के अंतर को दिखाती है:

  • शानदार अतीत: शांदा साहब ने अपने जीवन में एक ऐसा समय 'भोगा' (जिया) है, जब चारों तरफ उनकी धूम थी। लोग उनके एक-एक शेर को सुनने के लिए दूर-दूर से आते थे, रेडियो वाले उनका प्रोग्राम रिकॉर्ड करने दौड़ते थे और दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों के लोग उनके दीवाने थे।

  • दर्दभरा वर्तमान: आज बुढ़ापे में वही शांदा साहब बिल्कुल अकेले और गरीब हो चुके हैं। अब उन्हें कोई मुशायरे में नहीं बुलाता और नई पीढ़ी तो उनका नाम तक नहीं जानती।

उनके जीवन के वे अच्छे दिन अब सिर्फ एक याद बनकर रह गए हैं, जो उन्हें आज बहुत दर्द देते हैं। इसलिए अतीत के उन्हीं सुखद और वर्तमान के दुखद दिनों के तालमेल के कारण यह शीर्षक बिल्कुल सही है।

प्रश्न 31. ‘इस घर का हरेक प्राणी एक-एक क्षण को जीना जानता है।’ इस कथन का क्या अर्थ है, स्पष्ट करें।

उत्तर: यह पंक्ति शांदा साहब के घर आए मेहमान शमीम का अनुभव है। जब शमीम उनके घर रुका, तो उसने देखा कि शांदा साहब का पूरा परिवार भारी गरीबी के बावजूद समय बर्बाद नहीं करता और हर पल मेहनत व खुशी के साथ जीता है। परिवार के सभी सदस्यों की दिनचर्या इस प्रकार है:

  • शांदा साहब: वे एक बुजुर्ग और नामी शायर हैं। लाठी लेकर चलते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर पसीने से लथपथ होकर भी घर में पानी चलाते हैं। वे लकड़ी की दुकान पर जलावन (ईंधन) भी बेचते हैं और देशी दवाओं से लोगों का इलाज भी करते हैं। बुढ़ापे में भी वे कर्मठ हैं।

  • उनकी पत्नी: घर में कोई भी मेहमान या अतिथि आए, वे बिना किसी आलस के तुरंत रसोई (बावर्चीखाने) में जाकर नाश्ता-पानी तैयार करने में जुट जाती हैं।

  • विधवा पुत्री: वह एक स्कूल में शिक्षिका (टीचर) है। स्कूल से लौटने के बाद वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है, अपने बच्चों को घर पर शिक्षा देती है और घर के कामों में अपनी माँ का हाथ भी बँटाती है।

  • पुत्र (जावेद - नाती): वह तीसरी कक्षा का छात्र है, लेकिन वह अपने नाना की आज्ञा मानता है। वह पढ़ाई के साथ-साथ बाजार से सामान लाने, घर के कामों में मदद करने और लकड़ी बेचने में भी हाथ बँटाता है। वह स्कूल जाने में भी कभी देर नहीं करता।

निष्कर्ष: इस प्रकार, इस घर का हर सदस्य केवल मजबूरी में काम नहीं करता, बल्कि अपनी पूरी लगन और प्रसन्नता के साथ काम को अपनी आदत बना चुका है। उनका यही जज्बा दिखाता है कि वे हर पल को जीना जानते हैं।

गाँव के बच्चों की शिक्षा

प्रश्न 32. आर्थिक उदारीकरण से आप क्या समझते हैं? इसके क्या दुष्परिणाम हुए हैं?

उत्तर:

  • आर्थिक उदारीकरण क्या है: देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी नियमों, टैक्स और पाबंदियों को आसान व ढीला करना 'आर्थिक उदारीकरण' कहलाता है। इसे देश के विकास का एक मजबूत औजार माना गया था।

  • इसके दुष्परिणाम (बुरे असर):

  • इसके कारण देश में पूंजीवाद (अमीरों का बोलबाला) बहुत तेजी से फैला है, जिससे गरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ी है।

  • मानवीय संसाधनों (इंसानों की मेहनत) का बहुत ज्यादा शोषण हुआ है।

  • सबसे बड़ा बुरा असर यह हुआ है कि गाँव के बच्चों को अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए अपनी जमीन, खेती और गाँव को छोड़कर विदेशी या बड़ी कंपनियों के भरोसे दूर शहरों या विदेशों में जाना पड़ रहा है।

प्रश्न 33. ‘पंचायती राज में एक तरफ चिंगारी और रोशनी झाँकती है, वहीं ढेरों आशंकाओं का अंधेरा भी दिखाई देता है।’ यहाँ किन रोशनी और आशंकाओं की ओर संकेत हैं?

उत्तर: लेखक ने इस कथन के जरिए हमारी पंचायती राज व्यवस्था के अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को सामने रखा है:

  • रोशनी (चिंगारी) की ओर संकेत: रोशनी से मतलब इस बात से है कि पंचायती राज व्यवस्था को गाँवों और स्थानीय स्तर के विकास तथा समाज को मजबूत करने का एक बहुत ही शानदार माध्यम माना गया है। इससे आम लोगों के हाथ में ताकत आती है।

  • आशंकाओं (अंधेरे) की ओर संकेत: अंधेरे से मतलब इसकी कमियों से है। वास्तविकता यह है कि इसका संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है। आज भी कई राज्यों में समय पर पंचायत चुनाव नहीं होते। ग्रामसभाओं की बैठकें बस दिखावे के लिए होती हैं, जहाँ किसी भी मुद्दे पर खुलकर चर्चा या सही फैसले नहीं हो पाते। स्थानीय स्तर पर फैले भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण यह व्यवस्था केवल कागजी (औपचारिकता मात्र) बनकर रह गई है, जिसे देखकर लेखक हैरान और दुखी हैं।

प्रश्न 34. गांधीजी की बुनियादी शिक्षा की रूपरेखा क्या थी?

उत्तर: लेखक के अनुसार, गांधीजी की बुनियादी शिक्षा (Basic Education या नई तालीम) की मुख्य रूपरेखा निम्नलिखित थी:

  • प्राथमिक शिक्षा में बदलाव: यह शिक्षा खासतौर से प्राथमिक स्तर के बच्चों को एक नया जीवन देने में पूरी तरह सक्षम है।

  • गाँव को आत्मनिर्भर बनाना: गांधीजी के 'ग्राम स्वराज' का सपना था कि गाँवों को अपनी ताकत मिले (स्वायत्तता) और ग्रामीणों को सम्मान से जीने का हौसला मिले।

  • काम और पढ़ाई को जोड़ना: गांधीजी का मानना था कि जब तक शिक्षा को गाँव के पारंपरिक उद्योगों (हाथ के हुनर/कामधंधों) और वहाँ के माहौल से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक पढ़ाई का कोई असली मतलब नहीं है।

संक्षेप में, गांधीजी बुनियादी शिक्षा के जरिए बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे।

काव्यखण्ड (Poetry Section)

विद्यापति

प्रश्न 1. विद्यापति के प्रथम पद 'चानन भेल विषम सर रे .....' का भावार्थ अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर:

  • प्रसंग: यह सुंदर गीत मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति द्वारा लिखा गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के वियोग (जुदाई) में तड़पती हुई राधिका जी की दर्दभरी स्थिति का वर्णन है। राधा जी सज-धजकर बड़े चाव से कृष्ण के आने का रास्ता देख रही हैं।

  • भावार्थ:

  • चीजों का उल्टा लगना: कृष्ण के बिना राधा जी को दुनिया की हर अच्छी चीज तकलीफ दे रही है। शरीर को ठंडक देने वाला चंदन अब तीर (बाण) की तरह चुभ रहा है। सुंदरता बढ़ाने वाले गहने अब एक भारी बोझ लग रहे हैं।

  • राधा की लाचारी: कृष्ण गोकुल छोड़कर चले गए हैं और सपने में भी नहीं आते। राधा जी कदम्ब के पेड़ के नीचे अकेली खड़ी-खड़ी उनका रास्ता देखती रहती हैं। जुदाई की आग में उनका दिल जल रहा है। सुध-बुध खोने के कारण उनके कपड़े अस्त-व्यस्त हैं और कई दिनों से उन्होंने अपनी गंदी साड़ी तक नहीं बदली है।

  • उद्धव को संदेश: राधा की सहेली उद्धव से कहती है कि तुम तुरंत मथुरा जाओ और कृष्ण को राधा की इस हालत के बारे में बताओ। तुम्हारे बिना राधा अब ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेगी। अगर उसे कुछ हुआ, तो यह सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या मानी जाएगी और इसका पाप कृष्ण को लगेगा।

अंत में कवि विद्यापति दिलासा देते हुए कहते हैं कि हे सयानी स्त्री! उदासी छोड़ो, आज कृष्ण गोकुल आने वाले हैं, तुम रास्ते में उनका इंतजार करो।

प्रश्न 2. राधा को चन्दन भी विषम क्यों महसूस होता है?

उत्तर:

  • चंदन का स्वभाव: वैसे तो चंदन अपनी खुशबू और शीतलता (ठंडक) के लिए जाना जाता है, जो शरीर की गर्मी को शांत करता है। खुशियों के माहौल में यह बहुत अच्छा लगता है।

  • विषम (उल्टा) महसूस होने का कारण: लेखक कहते हैं कि किसी भी चीज का अच्छा या बुरा लगना इंसान के मन की स्थिति और हालात पर निर्भर करता है। जो चीज सुख के दिनों में अच्छी लगती है, वही दुख के दिनों में बुरी लगने लगती है।

  • राधा जी इस समय कृष्ण के वियोग में तड़प रही हैं। उनके दिल के अंदर जुदाई की आग जल रही है। इस गहरे दुख और विपरीत परिस्थिति के कारण, शीतलता देने वाला चंदन भी उनके शरीर पर लगते ही उन्हें आग के तीखे तीर (विषम बाण) की तरह चुभता हुआ महसूस होता है।

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