लघु/दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (गद्य)
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मैथिली साहित्य -- डा० अमरनाथ झा
प्रश्न १: मैथिली एक समृद्ध भाषा थिक--कोना?
उत्तर: मैथिली एकटा बहुत पैघ आ समृद्ध भाषा अछि। एकर विकास भारोपीय भाषा परिवारक 'अर्धमागधी' सँ भेल अछि। मैथिलीक अपन व्याकरण, लिपि आ एकटा पैघ साहित्यिक इतिहास अछि। लगभग ७०० वर्ष पहिने ज्योतिरीश्वर ठाकुर 'वर्णरत्नाकर' नामक ग्रन्थ लिखने छलाह, जाहि सँ पता चलैत अछि जे मैथिलीमे गद्य (prose) आ पद्य (poetry) कें रचना कतेक पहिने सँ भँ रहल अछि। 'वर्णरत्नाकर' भारतक सभ सँ पुरान चम्पू काव्य (गद्य-पद्य मिश्रित) मानल जाइत अछि, जे मैथिलीक गौरव बढाबैत अछि।
प्रश्न २: 'वर्णरत्नाकर'क लेखक के छथि? ई कोन रूपें अपन समकालीन रचनाकार सभसँ भिन्न छथि?
उत्तर: 'वर्णरत्नाकर' क लेखक ज्योतिरीश्वर ठाकुर छथि। ओ अपन समयक बाकी लेखक लोकनि सँ अलग छलाह, कारण ओकर मुख्य वजह ओकर गद्य (writing style) छल। ओहि समयमे बेसी क' साहित्यक रचना कविता वा पद्य रूपमे होइत छल, मुदा ज्योतिरीश्वर ठाकुर अपन ग्रन्थमे कविताक संग-संग गद्यक बहुत सुन्दर प्रयोग कएने छथि। एही विशिष्ट शैलीक कारण ओ अपन समकालीन रचनाकार सभ सँ अलग आ श्रेष्ठ छथि।
प्रश्न ३: 'वर्णरत्नाकर'क शैलीक तुलना लेखक कोन पोथीसँ कयने छथि?
उत्तर: 'वर्णरत्नाकर' क लेखन शैलीक तुलना लेखक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान 'बाणभट्ट' क रचना 'कादम्बरी' सँ कएने छथि। कारण ई अछि जे ओहि समयक गद्य शैलीकें समझब आ लिखब बहुत कठीन काज छल।
प्रश्न ४: मातृभाषाकें विसरि जायब निन्दनीय अछि। किएक?
उत्तर: अपन मातृभाषा (मायबोली) कें बिसरि जायब बहुत खराब आ निन्दनीय बात अछि। मातृभाषा कें बिसरब अपन माय, अपन माटि (मातृभूमि) आ अपन संस्कृति कें बिसरब अछि। आन भाषा सभ तँ सीखबाक लेल बहुत अभ्यास करए पड़ैत अछि, मुदा मातृभाषा बच्चा अपन माय सँ बिना कोनो खास मिहनतक, बहुत सहज आ आसानी सँ सीखि जाइत अछि। ई भाषा सभ सँ मधुर होइत अछि, तेँ एकरा बिसरब पाप थिक।
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प्रश्न ५: मातृभाषाक प्रति हमरा लोकनिक की-की कर्त्तव्य होयबाक चाही?
उत्तर: अपन मातृभाषा (मैथिली) क प्रति हमर सभक बहुत रास मुख्य कर्त्तव्य अछि:
मैथिली भाषामे नीक-नीक आ उच्च स्तरक किताब लिखल जाए।
स्कूल आ कॉलेज सभमे मैथिलीक पढाई अनिवार्य (compulsory) कएल जाए आ एकरा शिक्षाक माध्यम बनाओल जाए।
समय-समय पर मैथिलीक पत्र-पत्रिका (magazines) छपैत रहय आ हम सभ ओकरा नियम सँ कीनि क' पढ़ी।
हम सभ आपसमे हमेशा मैथिली भाषामे बातचीत (गप्प-सप्प) करी।
आम लोकक बीच एकर शुद्ध रूपक प्रचार-प्रसार होए।
भाषाक विकासक लेल हमरा सभक तत्परता, लगातार मिहनत, धनक सहयोग, सरकार आ विश्वविद्यालयक मददक संग-संग आम जनताक सहयोगक बहुत आवश्यकता अछि।
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समीक्षा-वृत्ति -- प्रो० रमानाथ झा
प्रश्न १: समीक्षा की थिक ? पाठक आलोक मे लिखू।
उत्तर: समीक्षाक अर्थ थिक 'नीर-क्षीर विवेक', यानी दूध आ पानि केँ अलग-अलग क' देखब। एकर माध्यम सँ कोनो रचना वा वस्तुक नीक आ खराब गुण केँ स्पष्ट रूप सँ सामने आनल जाइत अछि। समीक्षा सँ पाठकक रुचि सुधरैत अछि आ ओ सभ नीक-खराबक अंतर समझि पाबैत छथि। समाजमे सत्य आ नीक प्रवृत्तिक रक्षा लेल एकटा कुशल समीक्षक (critic) होनाइ बहुत जरूरी अछि। बिना सही समीक्षाक, लोक कोनो कलाक असली सुन्दरता आ ओकर महत्व केँ ठीक सँ नै चीन्हि सकैत अछि।
प्रश्न २: साहित्य ओ समीक्षकक की सम्बन्ध होइछ ?
उत्तर: साहित्य आ समीक्षकक बीच बहुत गहीर सम्बन्ध अछि। प्रतिभा दू प्रकारक होइत अछि:समीक्षक ओही व्यक्ति भ' सकैत छथि जे ओहि विषयक गहीर ज्ञान रखैत होइथ। समीक्षकक काम अछि जे ओ साहित्यक गुण-दोषक निष्पक्ष जाँच क' समाजक सामने राखथि। समीक्षा हमेशा रचना (book/work) क' होबाक चाही, रचनाकार (writer) सँ कोनो राग-द्वेष (व्यक्तिगत दुश्मनी या दोस्ती) नै होनाइ चाही।
कारयित्री प्रतिभा: एही प्रतिभा सँ लेखक साहित्यक निर्माण करैत छथि (जैसे- कथा, कविता, उपन्यास, नाटक आदि लिखब)।
भावयित्री प्रतिभा: एही प्रतिभा सँ समीक्षक ओहि लिखल गेल साहित्यक जाँच आ परीक्षण करैत छथि।
प्रश्न ३: समीक्षा वृत्ति हेतु लेखक कोन-कोन आधारभूत वृत्ति सभक उल्लेख कयलनि अछि ?
उत्तर: लेखक समीक्षा कें चारि श्रेणी वा वृत्ति (categories) मे बांटने छथि:
१. काकवृत्ति (कौआ नँ जकां): ई सभ सँ नीच स्तरक (निम्नकोटि) समीक्षा थिक। जेना कौआ कड़ुआ बोलैत अछि, तहिना एहन समीक्षक केवल रचनाक दोष (कमियाँ) कें खोजैत छथि आ कड़ुआ शब्दक प्रयोग करैत छथि।
२. कोकिल वृत्ति (कोयली नँ जकां): ई समीक्षक अपन दल वा अपन गुटक लोकक नीतिकें सभ सँ उत्तम मानैत छथि आ दोसरकें खराब। ओ अपन लोकक रचनामे कतेको कमी रहला पर ओकरा श्रेष्ठ देखबैत छथि। एकराहो नीक समीक्षा नै मानल गेल अछि।
३. मधुकर वृत्ति (भमरा नँ जकां): जेना भमरा अलग-अलग फूल सँ केवल रस (मधु) निकालैत अछि, तहिना एहन समीक्षक विभिन्न साहित्यिक रचना सँ केवल ओकर नीक गुण केँ ग्रहण करैत छथि आ पाठकक सामने ओकर विशेषता कें रखैत छथि।
४. हंसवृत्ति (हंस नँ जकां): (नोट: पृष्ठक अंतिम भागक अनुसार) हंस जेना दूध आ पानि केँ अलग क' दइत अछि, तहिना ई सभ सँ श्रेष्ठ समीक्षा थिक, जाहिमे गुण आ दोष दुनू कें निष्पक्ष भ' क' देखायल जाइत अछि।
प्रश्न ४: साहित्य-समीक्षा हेतु 'रसिक' होयब किएक आवश्यक मानल गेल अछि? लेखकक धारणाकें अपन शब्द मे लिखू।
उत्तर: एकटा सच्चा आ सफल समीक्षक ओहेन व्यक्ति भ' सकैत छथि, जिनका साहित्यमे गहीर रुचि (interest) होए आ जे साहित्यक रस सँ पूरी तरह परिचित होइथ। जे व्यक्ति खुद 'रसिक' (साहित्यक आनन्द लेनिहार) नै छथि, ओ कोनो रचनाक असली रस वा भाव दोसर पाठक कें कखनो नै समझा सकैत छथि। बिना रुचिक समीक्षा केवल तथ्यहीन (बेकार) भ' जाइत अछि। तेँ साहित्यक नीक-खराबक सही पहचान लेल समीक्षकक रसिक होइब बहुत जरूरी अछि।
ग्राम सेविका -- प्रो० हरिमोहन झा
प्रश्न १: कान पर जनउ चढौने पंडितजी की बजलाह ?
उत्तर: कान पर जनउ चढ़ौने पंडितजी बजलाह जे— "एही युगमे भ्रष्ट लोकक उदय भ' गेल अछि। जे खुद भ्रष्ट अछि, ओ सभकेँ अपन जकाँ बनेबाक चाहैत अछि। ओ (ग्रामसेविका) आबि क' पूरा गामक जनानी सभक मति खराब क' देत। तखने की कोनो बेटी-पुतोह बात मानत? ओकरा 'ग्रामसेविका' नै, बल्कि गाम उजड़बाक लेल 'ग्राम शोधिका' बुझू।"
प्रश्न २: बौकू बाबू उत्तेजित होइत की कहलथिन ?
उत्तर: बौकू बाबू गुस्सा (उत्तेजित) भ' क' बजलाह जे— "एही गाममे ओकर अफसरी ठाठ नै चलतैक। जँ ओ हमरा घरक नियम-कानून बिगाड़य अओती, तँ झोंटा (केश) पकड़ि क' मारब आ मारि-मारि क' ओकर हाथ-पैर (घूठ) तोड़ि देब।"
प्रश्न ३: हँफैट भुटकुन की समाद अनने छलाह ?
उत्तर: भुटकुन हाँफैत (दौड़ल) अपन दादीक समाचार (समाद) लय क' पोखर पर अएलाह। ओ कहलनि जे— "एकटा स्त्री (मौगी) बहुत उज्जर साड़ी पहिरने अएली अछि। ओ दलानमे कुर्सी पर बैसल छथि आ कहैत छथि जे आँगन जा क' सभ सँ भेंट करब। माय आ काकी तँ तैयार छथिन, मुदा दादी कहलनि अछि जे दौड़ि क' अपन बाबा (बौकू बाबू) सँ पूछि क' आओ।"
प्रश्न ४: क्रोधसँ बताह होइत बौकू बाबू की बजलाह ?
उत्तर: क्रोध सँ पागल (बताह) होइत बौकू बाबू बजलाह जे— "ओही हड़ाशंखिनी (ग्रामसेविका) कें आ कोनो दोसर घर नै भेटलैक? सभ सँ पहिने हमरहि घरकें भ्रष्ट (शोधय) कयल अएली अछि?"
प्रश्न ५: आँगन पहुँचि बौकूबाबू किएक चकित भड उठलाह ?
उत्तर: आँगन पहुँचि क' बौकू बाबू एही लेल चकित भ' उठलाह, कारण ओ ग्रामसेविकाक प्रति जकाँ सोचि क' गेल छलाह, ओकर ठीक उल्टा दृश्य छलै। (नोट: पृष्ठक अंतिम पंक्ति कें अनुसार)।
"जर्मनी-यात्रा" (डॉ० सुभद्र झा)
प्रश्न आ उत्तर
प्रश्न: जर्मनीक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय कोन अछि?
उत्तर: जर्मनीक सबसँ प्रसिद्ध विश्वविद्यालय 'ब्रेसलाउ' अछि।
प्रश्न: भगौड़ा लोक सभक केहन स्थिति छल?
उत्तर: भगौड़ा लोकसभक स्थिति बहुत दयनीय (दयनीय) छल। हुनका सभ लग नहि घर छल, नहि रूपैया-पैसा आ नहि कोनो सामान। जे किछु हुनका लग छल, ओकरा रूसी सिपाही सभ छीन लेलकै आ हुनका नग्न कऽ देलकै। बाधमे ओ सब फाटल-चीटल कपड़ा माँगि-चाँगि कऽ पहिर जर्मनी गेलाह। एहन आर्थिक गरीबी आ खराब अवस्था छल भगौड़ा लोकसभक।
प्रश्न: शिशु विद्यालयक स्थितिकेँ अपन शब्दमे लिखू?
उत्तर: शिशु विद्यालयमे २ वर्ष सँ ६ वर्ष धरि क बच्चासभकँ विशेष रूप सँ शिक्षा देबाक व्यवस्था अछि। एहि विद्यालयमे फोटो (चित्र) आ गीतक माध्यम सँ पढ़ाओल जाइत अछि। अक्षर लिखब आ पाठ याद करब दोसर दिन सँ शुरू होइत अछि। संगीतक पाठ आ चित्रकारी सँ बच्चासभमे पढ़ाई प्रति रुचि जगैत अछि। एहि विद्यालयमे लिखबाक अभ्यास, रटबाक आदत आ जबरदस्ती पढ़ाएब अनिवार्य नहि अछि। जे अभिभावक (माता-पिता) क इच्छा होइत अछि, ओ अपन बच्चासभकँ एहि विद्यालयमे पढ़बै लेल पठाबैत छथि आ किछु पैसा सेहो दैत छथि।
प्रश्न: जर्मनीमे छठम वर्षक बाद छात्रक विभाजन कोन आधार पर कएल जाइत अछि?
उत्तर: जर्मनीमे छठम वर्षक बाद छात्रसभक विभाजन दू रूपमे कएल जाइत अछि। पहिने आयुवर्गक छात्रक नामांकन प्राथमिक विद्यालयमे कराओल जाइत अछि।
‘शैदा आओर हमीदा’
1. पंडितराज जगन्नाथ आ आइ-काल्हिक समयमे कोन भेद अछि?
उत्तर: पंडितराज जगन्नाथ केँ चारियो कात सुन्दरता ही सुन्दरता लौकैत छलन्हि। ओ अप्पन दुनियामे सभ सुख-सुविधा आ प्यार सँ भरल जीवनक कल्पना करैत छलथि। मुदा आइ-काल्हिक समयमे एहन सुन्दर आ सुखद दुनियाक कल्पना केओ नहि कऽ सकैछ।
2. शेख साहब कोन काज करैत छलाह?
उत्तर: शेख साहब मिलिट्री ऑफिसमे 'स्टोरकीपर' छलाह। ओ विधुर (जाहि पुरुषक पत्नी कऽ देहावसान भऽ गेल होइछ) छलाह। भाई केँ मृत्यु केँ बाद, ओ अप्पन दुनू भतीजी—शैदा आ हमीदा केँ पालन-पोषण करैत छलाह।
3. शेख साहब छोटकी अर्थात् शैदा केँ एहि कारणें पोटलिन जे ओ नौकर संग सिनेमा देखि चलि गेल छल।
उत्तर -शेख साहब अपन भतीजी शैदा केँ एहि लेल सजा देलखिन आ बांधि कऽ राखि देलखिन, कारण ओ घरक नौकरक संग बिना कहने सिनेमा देखै लेल चलि गेल छल।
4. गलीसों पार होइत काल लेखकक संग की घटना घटल?
उत्तर: लेखक केँ पाछाँ सँ किछ लोक कंबल ओढा देलखिन आ लाठी-झाड़ सँ मारि कऽ एकांत कोठरीमे बंद कऽ देलखिन। हिन्दू-मुस्लिम दंगा केँ कारण लेखक पकड़ा गेल छलाह। ओतए शैदा, जे लेखकक चिन्हल-जानल छलि, ओ चीन्हि कऽ आ चीन्हा/दाग काटि कऽ लेखकक जान बचौलक।
5. कैंची आनि शैदा की कयलक?
उत्तर: कैंची आनि कऽ शैदा सभ सँ पहिने लेखकक हाथक डोरी काटलक। ओकरा बाद पाछाँ जा कऽ ओकर चीन्हा (टैग) काटि देलक, जाहि सँ ओकर पहचान नहि भऽ सकै आ ओ बाँचि जाए।
6. शैदाक बेटीक नाम की छलैक?
उत्तर: शैदाक बेटीक नाम निम्मी छलैक।
📌 पाठ १: नैका बनिझारा (डॉ. ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म')
१. घंटा कैक मौनक छल?
उत्तर: घंटा तीस मौनक बनल छल।
२. नैकाक दलमे कतेक बउद छल?
उत्तर: नैकाक दलमे एक लाख बउद आ सत्ताइस हजार वरदी छल।
३. द्विरागमनक अनुरोध पर महाचनक की उत्तर छल?
उत्तर: द्विरागमनक अनुरोध पर महाचन कहलखिन जे— "पहिल बेर अनुरोध करला पर द्विरागमन भेल अछि। हमरा ई बेटी बहुते मान-मन्नत (वरदान) सँ भेल अछि। दू बेर, चारि बेर अनुरोध केला पर द्विरागमनक दिन तय कयल जायत, ई हमर बहिन (जयतंग) केँ सुसड़क (ससुराल) साला छै।"
४. ससुर द्वारा द्विरागमनक स्वीकृति पावि नैका की निर्णय लेलक?
उत्तर: ससुर सँ द्विरागमनक स्वीकृति मिलला केँ बाद नैका ई निर्णय लेलक जे द्विरागमन कऽ कऽ यात्रा आ बनिझारि (व्यापार) केँ आगाँ बढ़ायत।
५. फूलमणि नैकाक क्षुधाक पूर्ति अकस्मात कोना कयलक?
उत्तर: फूलमणि जे नैकाक पत्नी छलीह, ओ अपन पति नैका द्वारा कयल गेल भूख (क्षुधा) मिटाबक उपाय एहि तरहेँ कयलथि: ओ स्वयं गाय दुहलथि, तुलसी फूलक थानक धुरिया झाड़ि-पोछि कऽ चुनौटी पर चानन कयलथि, चाउर छोड़ौलथि आ सोनाक कटोरामे दीप पर खीर राँधि कऽ स्वामी (नैका) केँ तृप्त कयलखिन।
६. तिलेश्वरी के छलि?
उत्तर: तिलेश्वरी नैकाक बहिन छलीह।
७. तिलेश्वरी केँ ककरा सँ ईर्ष्या भेलैक?
उत्तर: तिलेश्वरी केँ अपन भौजी 'फूलमणि' सँ ईर्ष्या भेलैक।
८. फूलमणि केँ तिलेश्वरी ककरा हाथेँ बेचलक?
उत्तर: फूलमणि केँ तिलेश्वरी डोम-चंडालक हाथेँ एक लाख टाका मे बेच देलक।
९. तिलंगा के छल?
उत्तर: तिलंगा बाबा छल।
📌 पाठ २: हथुट्टी कुरसी (सुधांशु शेखर चौधरी)
१. नेनमणि किएक अप्रसन्न छलाह?
उत्तर: नेनमणिक बेटा हरे जे डिप्टी कलक्टर छथि, ओ बहुते दिनक बाद गाम आएल छलाह। मुदा नेनमणि ओकर आओब-भगत आ स्वागत-सत्कार मे लागल छथि, तैयो ओ अप्रसन्न छलाह।
२. भागलपुर मे के इन्द्रसन्नक सुख भोगि रहल छलाह?
उत्तर: भागलपुरमे नेनमणिक बालक हर (इन्द्रसन्न) सुख भोगि रहल छलाह।
३. नेनमणिक केँ पत्र द्वारा की खबरि अय्लैन जे उदास भऽ गेलाह?
उत्तर: नेनमणि केँ पत्र सँ ई खबरि भेटलैन जे एहि बेर हुनकर बेटा हरे गाम नहि आबि रहल छथि, ओ अपन परिवार संग कश्मीर जा रहल छथि।
४. एहि एकांकीक केंद्रीय भावकेँ स्पष्ट करू।
उत्तर: ई एकांकी एकटा मध्यमवर्गीय परिवार पर आधारित अछि, जाहिमे एकटा गोटा (व्यक्ति) परिवारक केंद्र बिंदु होइछ।
प्रश्न:
‘हथुट्टा कुर्सी’ एकांकीक कथावस्तु संक्षेप मे लिखू।
उत्तर
'हथुट्टा कुर्सी' मैथिली साहित्यक प्रसिद्ध नाटककार सुधांशु शेखर चौधरीक लिखल प्रसिद्ध एकांकी अछि। ई एकांकी में मिथिलांचल के आर्थिक स्थिति, नौकरी पेशा लोकक सोच, आ पारिवारिक भावना के बहुत ही जीवंत आ मार्मिक चित्रण कएल गेल अछि।
नेनमणि बाबुक आकांक्षा: नेनमणि बाबुक दू टा बेटा छथिन्ह— कंटीर आ हरे। हरे पढ़ि-लिख कऽ हाकिम (कलेक्टर) बनि गेल अछि आ कतेको वर्ष बाद ओ घर आवै वाला अछि। कंटीर घर-गृहस्थी सम्हारेत अछि। नेनमणि बाबू अपने हाथ सँ एकटा हथुट्टा कुर्सी (हाथ वाला कुर्सी) बनबैछथि ताकि डिप्टी कलेक्टर बेटा के आदर आ सम्मान सँ बैसा सकथि।
कंटीर के मर्म आ दुःखी मन: कंटीर जब अपन पिता के देखैत अछि जे ओ टूट्ल टाँग आ हाथ सँ कुर्सी बना रहल छथि, तँ ओ कहैत अछि जे हरे जब आबि रहल अछि तँ सब किछु नीक सँ सजो कऽ राखल जाय। मुदा कंटीर के मन में ई दुखो अछि जे ओ खुद पढ़ि-लिख कऽ किछु बड़ लोक नहि बनि सकल।
हरे के आगमन आ उपेक्षा: हरे जब घर आवैत अछि, तँ नेनमणि बाबू बहुत आदर आ स्नेह सँ ओकरा "हथुट्टा कुर्सी" पर बैसै लेल कहैछथि। मुदा हरे (जे अब हाकिम बनि गेल अछि) ओहि हथुट्टा कुर्सी केँ बेकार आ अयोग्य मानि कऽ ओकरा पर बैसै सँ मना कऽ दैत अछि आ ओकरा दरकिनार कऽ दैत अछि।
निष्कर्ष / मूल संवेदना: पिता (नेनमणि बाबू) जे कुर्सी केँ अपन ममता, परिश्रम आ स्नेह सँ तैयार केने छलाह, ओकरा बेटा द्वारा उपेक्षित कएल गेलाक बाद पिताक हृदय टूटि जाइत अछि। ई एकांकी ई देखाबैछ जे आधुनिकता आ पद-प्रतिष्ठाक अंहकार में लोक कोना अपन संस्कार, पारिवारिक प्रेम आ पिताक भावना केँ बिसरि जाइत अछि।
मैथिली लोकगीत : किछु वैशिष्ट्य — डॉ० अणिमा सिंह
प्रश्न 1: समाजक संग लोक-साहित्यक कोन सम्बन्ध अछि?
उत्तर:
समाज आ लोक-साहित्य के बीच अटूट आ गहरा सम्बन्ध अछि।
लोक-साहित्य की कल्पना समाज के बिना नहीं की जा सकती। जब समाज का विशेष वातावरण या परिस्थितियाँ व्यक्ति के रस-चेतना को प्रभावित करती हैं, तब मन के भीतर से अकस्मात लोकगीत प्रस्फुटित होते हैं।
लोकगीत किसी एक व्यक्ति द्वारा रचित नहीं होते, बल्कि यह सामूहिक मन की अभिव्यक्ति हैं।
जैसे-जैसे समाज और जन-मानस का विकास या परिवर्तन होता है, उसी के अनुसार लोकगीतों में भी परिवर्तन होता रहता है।
प्रश्न 2: डॉ० वेरियर एलविनक लोकगीतक प्रसंग की कहब छनि?
उत्तर:
डॉ० वेरियर एलविन ने अपनी पुस्तक 'फोक सांग्स ऑफ छत्तीसगढ़' में लोकगीत के संदर्भ में कहा है कि:
भारतीय लोकगीत में सर्वत्र प्रतीकात्मक पद्धति (Symbolism) का प्रयोग देखने को मिलता है।
भारतीय लोकगीतों की मुख्य विशेषता यह है कि इनमें प्रतीकात्मकता बहुत ही सहज, सरल और स्वाभाविक रूप से घुली-मिली रहती है।
जैसे— धर्मराजक गीत, बटोही गीत, या निरगुण गीतों में सूक्ष्म भावों को व्यक्त करने के लिए सुंदर प्रतीकों (जैसे- पिया, डोलिया, कहार आदि) का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 3: मैथिली लोकगीत में कौन-कौन विशेषताक उल्लेख कएल गेल अछि?
उत्तर:
डॉ० अणिमा सिंह के अनुसार मैथिली लोकगीतों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
भाषा की सरलता आ मधुरता: मैथिली लोकगीतों में भाषा का प्रवाह, सरलता और सुबोधता देखने को मिलती है।
उदार भावना आ प्रशंसा: इनमें केवल संकीर्णता नहीं, बल्कि उदार भावों और जन-साधारण के प्रति प्रशंसा का भाव मिलता है।
मंगलेषणा (मंगल की भावना): मैथिली लोकगीतों की एक बड़ी विशेषता मंगल-कामना है। इन गीतों में केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और सृष्टि में शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
देव-देवताओं से विनती: गीतों में देवी-देवताओं से संपूर्ण मानव जाति आ कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।
मिथिलाक सांस्कृतिक परम्परा — डॉ० अमरेश पाठक
प्रश्न 1: मिथिलाक चौहद्दी लिखू?
उत्तर: मिथिला भौगोलिक दृष्टिए 25° 28' सं 26° 52' उत्तर अक्षांश तथा 84° 56' सं 86° 46' पूर्व देशान्तर मध्य अवस्थित अछि। वृहद् विष्णु पुराणक अनुसार मिथिलाक उत्तरमे नागधिराज हिमालय, दक्षिण में पतितपावनी गंगा, पूर्वमे कौशिकी आ पश्चिममे गंडकी सँ घेरल अछि। मिथिलाक सीमाक प्रसंग ई श्लोक प्रचलित अछि—
"जाता सा यत्र सरिदमलजालावती यत्र पुण्या।
यत्रास्ते सन्निधाने सुरनगर नदी भैरवी यत्र लिंगा।
मीमांसासाय वेदध्ययन पटुतरेः पण्डितैर्मण्डिताया।
भू देवो यत्र भूपो राजन-वसुमती सास्ति तीर्थमुक्तिः॥"
चंदा झा सेहो अपन मिथिला भाषा रामायणमे मिथिलाक सीमाक प्रसंग लिखने छथि जे विस्तृत अछि— मिथिला उतरेरे हिमालय, दक्षिणमे गंगा, पूर्वे महानन्दा तथा पश्चिम मे गंडक धरि 250 मीलमे विस्तृत अछि।
प्रश्न 2: 'तीरमुक्ति' ककरा कहल गेल अछि?
उत्तर: तीर्थसुकृत मिथिला केँ कहल गेल अछि। अति प्राचीनकालमे मिथिला केँ एही नाम सँ चीन्हल जाइत छल।
प्रश्न 3: न्यायसूत्रक प्रणेता के छथि?
उत्तर: न्यायसूत्रक प्रणेता गौतम छथि।
प्रश्न 4: लिच्छवि वंशक राजधानी कतय छल?
उत्तर: लिच्छवि वंशक राजधानी वैशाली में छल।
प्रश्न 5: बौद्ध तथा जैन धर्मे कथीक वर्णन भेल अछि?
उत्तर: बौद्ध तथा जैन धर्मे मिथिलाक प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराकारक वर्णन भेल अछि। आचार-व्यवहार, ज्ञान-गरिमा एवं सामाजिक जीवनक विभिन्न पक्षक वर्णन एहि धर्म ग्रन्थ मे भेल अछि।
प्रश्न 6: पुरुष-पुरुष परीक्षा कोन दृष्टिएँ महत्वपूर्ण अछि?
उत्तर: पुरुष-पुरुष परीक्षा सामाजिक एवं आध्यात्मिक दुनू दृष्टिसँ महत्वपूर्ण अछि। एहिमे धर्म, अर्थ, काम आ मोक्ष केँ प्राप्त करबाक मार्ग देखाओल गेल अछि।
प्रश्न 7: भानुदत्त 'रसमंजरी' के रचना कयलयनि?
उत्तर: भानुदत्त 'रसमंजरी' की रचना कयलयनि।
[ भारत ओ राष्ट्रधर्म -- डॉ० रामदेव झा ]
प्रश्न 1: भारतक तुलना एक फूलक मालासँ किएक कयल गेल अछि ?
उत्तर: भारतक तुलना एक फूलक मालासँ एहि कारणें कएल गेल अछि जेना फूलक मालामे विभिन्न गाछक विभिन्न फूल केँ गूँथि कऽ एक सूत्रमें पिड़ाओल जाइत अछि ठीक तहिना भारतक निर्माण विभिन्न जाति, धर्म, संस्कृति ओ भाषाक सम्मिश्रण सँ भेल अछि। एकरुहु एकसूत्र मे राखब कऽ भारतक निर्माण कएल गेल अछि।
प्रश्न 2: आचार्य विनोबा भावे भारत राष्ट्रक तुलना कोन गाछसँ कयलन्हि अछि ?
उत्तर: आचार्य विनोबा भावे भारत राष्ट्रक तुलना वटवृक्ष सँ कयलन्हि अछि। ओकर विशाल मूल धरती मे बहुत नीचाँ धरि गाड़ल रहत अछि तथा ओकर विशाल-विशाल शाखा-प्रशाखा सभ चारुकात पसरल रहैत अछि। ओ शाखा सभ देखबामे एक-दोसर सँ फ़राक मनहि लागय किन्तु सभक सम्बन्ध एक मूल सँ रहैत अछि। संयोग सँ कोनो शाखा टूटि कऽ खसिओ पड़ल तथापि ओकर अस्तित्व विलोपित नहि होइत छैक। तैँ भारत राष्ट्रक तुलना आचार्य विनोबा भावे वटवृक्ष सँ कयलन्हि अछि।
प्रश्न 3: राष्ट्रक दैहिक आकार की थिकेक ?
उत्तर: राष्ट्रक दैहिक आकार भूमि थिकेक। जेना प्राणक अभाव बिना देह निष्क्रीय भऽ जाइत अछि ठीक तहिना राष्ट्रक प्राण प्राण थिकेक एहि परहक निवासीगण। जाहि राष्ट्रक निवासीगण जतेक शिक्षित, चंचल आ क्रियाशील रहत ओ राष्ट्र ओतेक विकासक मार्ग पर अग्रसर होइत जाएत।
प्रश्न 4: राष्ट्रक वाणी की थिकेक ?
उत्तर: राष्ट्रक वाणी थिकेक ओकर भाषा, ओकर साहित्य आ कला। निज भाषा, साहित्य ओ कलाक अभावमे राष्ट्रक कल्पना नहि कएल जा सकैछ।
प्रश्न 5: आउ जे भारत अछि ओकर नाम की सभ छल ?
उत्तर: भारतकें अनादिकालसँ भारतखण्ड, भारतवर्ष, आर्यावर्त आदि नाम सम् छल।
प्रश्न 6: राष्ट्रधर्म की थिक ?
उत्तर: राष्ट्रक प्रति समर्पण, भक्ति, आस्था ठीक राष्ट्रधर्म। आपसमे मेलजोल, अनेकतामे एकता, विभिन्न जाति-धर्मक सामंजस्य ठीक राष्ट्रधर्म। ऊँच-नीच, पेघ-छोट, अमीर-गरीब आदिक भेदकें मेटाएब ठीक राष्ट्रधर्म। नियम-कानूनक पालन, थिक राष्ट्रधर्म।
[ लक्ष्मीनाथ गोसाइँ--डॉ० फुलेश्वर मिश्र ]
प्रश्न 7: लक्ष्मीनाथ गोसाइँक नाम जन्म कोन इस्वीमे कतय भेल छलन्हि ?
उत्तर: लक्ष्मीनाथ गोसाइँक जन्म कोशी प्रमण्डलक सहरसा जिलाक अन्तर्गत परसरमा ग्राम मे 1787 ई० मे भेल छलन्हि।
प्रश्न 8: लक्ष्मीनाथ गोसाइँक गुरुक की नाम छल। ओ किएक प्रसिद्ध छलाह ?
उत्तर: लक्ष्मीनाथ गोसाइँक गुरुक नाम पं० रस्ते झा छलन्हि। ओ लब्धप्रतिष्ठ ज्योतिषी और तांत्रिक रूपमे प्रसिद्ध छलाह।
प्रश्न 9: लक्ष्मीनाथ गोसाइँ घरसँ किएक पड़ायलाह ?
उत्तर: लक्ष्मीनाथ गोसाइँ नेन सँ कनी हँट कट छालाह। बेसी काल चिंतन मे लीन रहैत छलाह।
। ज्योतिष, वेद, उपनिषदक नीक ज्ञात छलाह। हिनका अध्यात्म दिस बेसी झुकाव छलन्हि। एक दिन हिनक ज्येष्ठ भाइ कें सम्बन्धीक ओहिठाम जाय पड़लन्हि। जाइत काल लक्ष्मीनाथ कें मालजाल देखबाक भार दऽ गेलथिन्ह। किन्तु लक्ष्मीनाथ अपन चिंतनक कारणें मालजालकें देखबाक सोह नहि रहलन्हि, परिणाम भेल जे माल-जाल भूखल-पियासल रहि गेला। जखन हुनक ज्येष्ठ भाइ अयलाह तँ देखे छथि जे माल-जाल कें पेट-पंजर सटल अछि। ई देखि ओ लक्ष्मीनाथ कें डाँटलन्हि। पैघ भाएक बात लक्ष्मीनाथ कें नीक नहि लागलन्हि आ ओ घर छाँड़ि कऽ विदा भऽ गेलाह।
प्रश्न 10: घर घुमबाक लेल ओ कोन शर्त रखलन्हि ?
उत्तर: लक्ष्मीनाथ घर घुमबाक लेल जे शर्त रखलन्हि ओ, ई छल जे हम परिवारसँ वैरागी जकाँ रहब आओर जखन कतहु जयबाक इच्छा होयत तँ हमरा केओ नहि रोकथि।
प्रश्न 11: बाबू राय लक्ष्मीनारायण सिंह कें लक्ष्मीनाथ गोसाइँ की आशीर्वाद देलथिन्ह ?
उत्तर: बाबू राय लक्ष्मीनारायण सिंहकें लक्ष्मीनाथ गोसाइँ आशीर्वाद देत कहलथिन्ह जे- "हम एखन अहाँक अन मात्र दुइ कौर ग्रहण कयने छी। ईश्वरक इच्छा भेलन्हि तँ अहाँक दुइ पुत्र होयत।"
प्रश्न 12: लक्ष्मीनाथ गोसाइँ कोन तरहक पदक रचना कयलन्हि ? हुनक काव्यक भाषा ओ प्रमुख विषय की होइत छलन्हि ?
उत्तर: लक्ष्मीनाथ गोसाइँ राम और कृष्णक लीला पर आधारित पद लिखैत छलाह। संग उपदेशात्मक भजन सेहो लिखलन्हि। ई अपन काव्यमे क्षेत्रीय रीति-रिवाज, विश्वास, दृश्य आदिक समावेश सेहो कयलन्हि। हिनक काव्यक भाषा ब्रजभाषा, अवधी आ मैथिल मिश्रित साधुकरी अछि। ई सदैव कहैत छलाह जे व्यक्ति ईश्वरक चरणमे पूर्णतः अपनकें समर्पित कऽ देथि ओ तन मन, धनसँ हुनक आराधना में तत्पर रहिथु तँ हुनक जीवन मंगलमय भऽ जाएत।
[ घरदेखिया -- सुभाषचन्द्र यादव ]
प्रश्न 1: उपेन सड़क परसँ की देखलक ?
उत्तर: उपेन सड़क पर सँ देखलक जे कमैटी होतला बरन्डा पर गोटक पाँच गोट व्यक्ति बैसल अछि। अनटीया अछि। ओकरा सभक लेल पटिया आ जाजिम देल गेल छै। कातमे लोहभार पानि राखल छै।
प्रश्न 2: घरदेखिया ककरा पर आयल रहै ?
उत्तर: घरदेखिया विमला पर आयल छलै।
प्रश्न 3: विमला जाहि चूल्हि में आँच देत छलछि ओहि में की चढ़ल छलैक ?
उत्तर: विमला जाहि चूल्हि में आँच देत छलछि ओहिमे दालि चढ़ल छल।
प्रश्न 4: लड़िका कतय रहैत छल तथा कोन काज करैत छल ?
उत्तर: लड़िका कलकत्ता में रहैत छल जतड ट्रुक कन्डक्टरी करैत छल।
प्रश्न 5: घरदेखिया विमलासँ की पुछलकैक ?
उत्तर: घरदेखिया विमलासँ पुछलकैक, अपन नाम, बाबुक नाम, आउ कोन दिन छिऐ, अहाँ कोन मुँहे झाँड़ि छी आदि।
-----------* कहानी समाप्त ----*-






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