History 11th All subjects

 1. समय की शुरुआत से (From the Beginning of the Time)

Q.1. मानव की उत्पत्ति के विषय में प्रचलित दो सिद्धांतों के विषय में लिखें।

Or, आधुनिक मानव का उदय कहाँ हुआ ? V.V.I.

  • उत्तर ):आधुनिक मानव की शुरुआत कहाँ और कैसे हुई, इस पर विद्वानों के बीच दो मुख्य और अलग-अलग विचार (सिद्धांत) हैं:

  • विशेष नोट: आधुनिक मानव के सबसे पुराने जीवाश्म (Fossils) इथियोपिया के 'ओमो किविश' नामक स्थान पर मिले हैं, जो प्रतिस्थापन मॉडल को ज्यादा मजबूत बनाता है।

  • क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (Regional Continuity Model): इस विचार के अनुसार, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले आदिमानव धीरे-धीरे अलग-अलग गति से आधुनिक मानव के रूप में विकसित हुए। इसलिए आज अलग-अलग जगहों के इंसानों का रूप-रंग थोड़ा अलग दिखता है।

  • प्रतिस्थापन मॉडल (Replacement Model): इस विचार के अनुसार, सभी आधुनिक मनुष्यों की उत्पत्ति सबसे पहले केवल एक ही स्थान यानी अफ्रीका में हुई थी। वहाँ से वे धीरे-धीरे दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैल गए और उन्होंने पहले से रह रहे आदिमानवों की जगह ले ली।

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Q.2. प्रारम्भिक मानवों को औजार निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी ? V.V.I.

  • उत्तर ):शुरुआती दौर में इंसानों के पास आज की तरह कोई सुख-सुविधाएं नहीं थीं। उन्हें जिंदा रहने और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए औजारों की सख्त जरूरत पड़ी, जैसे:

  • पेट भरने के लिए: जंगली जानवरों का शिकार करने, जमीन खोदकर कंदमूल (जड़ें) निकालने और पेड़ों से फल तोड़ने के लिए।

  • खुद को बचाने के लिए: जंगली और खतरनाक जानवरों के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए।

  • दैनिक कार्यों के लिए: शिकार किए गए जानवरों का मांस काटने, उनकी खाल उतारने (कपड़े बनाने के लिए) और पत्थरों को आपस में रगड़कर आग पैदा करने के लिए।

  • समय के साथ उन्होंने पत्थरों के बिना तराशे (अनगढ़) हथियारों से पशु-पक्षियों का शिकार करना और कच्चा मांस खाकर अपनी भूख मिटाना सीख लिया था।

Q.3. कार्बन डेटिंग क्या है ? V.V.I.

  • उत्तर):कार्बन डेटिंग (या कार्बन-14 विधि) विज्ञान का एक ऐसा तरीका है जिससे यह पता लगाया जाता है कि कोई पुरानी वस्तु (जैसे कोई प्राचीन लकड़ी, हड्डी या जीवाश्म) कितनी साल पुरानी है।

  • जब तक कोई जीव या पौधा जीवित रहता है, तब तक उसके शरीर में कार्बन-12 और कार्बन-14 बराबर मात्रा में बने रहते हैं।

  • लेकिन मृत्यु के बाद, शरीर में मौजूद कार्बन-12 तो उतना ही रहता है, पर कार्बन-14 धीरे-धीरे घटने (कम होने) लगता है

  • कार्बन-14 की आधी उम्र (Half-life) 5568 + 30 वर्ष होती है, यानी इतने सालों में इसकी मात्रा घटकर आधी रह जाती है।

  • वैज्ञानिक इसी घटती हुई मात्रा को नापकर यह हिसाब लगा लेते हैं कि वह वस्तु कितनी पुरानी है। जिस चीज में कार्बन-14 जितना कम मिलता है, वह उतनी ही ज्यादा पुरानी (प्राचीन) मानी जाती है।



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Q.4. प्राइमेट्स की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ? V.V.I.

  • उत्तर ):'प्राइमेट' स्तनधारी (दूध पिलाने वाले) जीवों के एक बहुत बड़े समूह के अंदर आने वाला एक छोटा उपसमूह (Subgroup) है, जिसमें बंदर, लंगूर और इंसान शामिल हैं। इनकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • (i) इनके पूरे शरीर पर बाल होते हैं।

  • (ii) माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रंथियां (Mammary Glands) होती हैं।

  • (iii) इनके मुँह में अलग-अलग काम करने के लिए अलग-अलग प्रकार के दाँत होते हैं।

  • (iv) बच्चे के पैदा होने से पहले, वह काफी लंबे समय तक माता के गर्भ में पलता और विकसित होता है

Q.5. मानव पृथ्वी पर कब और कैसे प्रकट हुआ ?

  • उत्तर ):

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारी पृथ्वी लगभग 4000 मिलियन (4 अरब) वर्ष पुरानी है, लेकिन इस धरती पर इंसानों का आगमन बहुत बाद में हुआ।

  • मानव सबसे पहले प्लाइस्टोसीन (Pleistocene) यानी 'अतिनूतन काल' की शुरुआत में पृथ्वी पर आया।

  • अगर हम आधुनिक मानव—जिन्हें होमो सेपियंस (Homo Sapiens) या 'बुद्धिमान मानव' कहा जाता है—की बात करें, तो वे इस पृथ्वी पर लगभग 0.19 से 0.16 मिलियन वर्ष (यानी करीब 1 लाख 90 हजार से 1 लाख 60 हजार साल) पहले प्रकट हुए थे।

Q.6. मानव के द्वारा शिकार करना कब शुरू किया गया ?

  • उत्तर ):इंसानों द्वारा अपनी भूख मिटाने और जीवित रहने के लिए नियमित रूप से जानवरों का शिकार करना लगभग 50 लाख वर्ष पहले शुरू किया गया था।

2. लेखनकला और शहरी जीवन (Art of Writing and City Life)

Q.7. लेखनकला के क्षेत्र में मेसोपोटामिया की उपलब्धियों का वर्णन करें। V.V.I.

Or, मेसोपोटामिया में लेखनकला के विकास का विवरण दें।

  • उत्तर :मेसोपोटामिया के लोगों ने दुनिया को सबसे पहले लिखना सिखाया। उनकी लेखनकला का विकास इस प्रकार हुआ:

  • शुरुआत: शुरू में यहाँ के लोग चित्रों के जरिए अपनी बात लिखते थे (चित्र-लिपि), लेकिन चित्र बनाना कठिन था। इसलिए लगभग 4,000 ईसा पूर्व (BC) के आसपास उन्होंने टेढ़ी-मेढ़ी और खड़ी-पड़ी लाइनों वाले चिह्नों का इस्तेमाल शुरू किया।

  • क्यूनीफॉर्म लिपि (Cuneiform): इस नई लिखाई की शैली को 'क्यूनीफॉर्म' (या कीलाकार) लिपि कहा गया। इसमें 350 से भी ज्यादा संकेत या चिह्न होते थे।

  • लिखने का तरीका (मिट्टी की पट्टियाँ): वे लोग सरकंडे या बाँस की नुकीली कलम से गीली मिट्टी की पट्टियों (तख्तियों) पर लिखते थे। लिखने के बाद इन पट्टियों को धूप में सुखाया जाता था। कई बार इन्हें आग में भी पका लिया जाता था ताकि लिखावट पक्की हो जाए और हमेशा सुरक्षित रहे।

  • महत्व: खुदाई में मेसोपोटामिया से ऐसी लाखों मिट्टी की पट्टियाँ मिली हैं, जिनसे हमें वहाँ की पुरानी सभ्यता, राजाओं और व्यापार के बारे में बहुत जरूरी जानकारियां मिलती हैं।


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Q.8. मेसोपोटामिया में साहित्य की उन्नति पर प्रकाश डालें।

Or, गिल्गामेश के महाकाव्य की विषय-वस्तु का वर्णन करें। V.V.I.

  • उत्तर):मेसोपोटामिया में केवल लिखना ही नहीं शुरू हुआ, बल्कि वहाँ बहुत ऊंचे दर्जे का साहित्य (किताबें और कविताएँ) भी लिखा गया:

  • विशाल पुस्तकालय: मेसोपोटामिया के प्रमुख शहरों जैसे तैल्लो (Tello), बेबीलोन और निनवेह की खुदाई में बड़े-बड़े पुस्तकालय (Libraries) मिले हैं। इनमें हजारों की संख्या में मिट्टी की किताबें मिली हैं, जिससे पता चलता है कि वहाँ के लोगों को पढ़ने-लिखने का बहुत शौक था।

  • साहित्य का खजाना: इन किताबों में प्राचीन कहानियाँ, महाकाव्य, गीत और धार्मिक कविताएँ भरी पड़ी हैं।

  • गिल्गामेश का महाकाव्य (Epic of Gilgamesh): यह मेसोपोटामिया का सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसने दुनिया भर में प्रसिद्धि पाई। इसकी तुलना अंग्रेजी के महान कवि मिल्टन के प्रसिद्ध महाकाव्य 'पैराडाइज लॉस्ट' (Paradise Lost) से की जाती है। इसमें राजा गिल्गामेश के साहस और उनकी जीवन की खोज की कहानी है।

Q.9. मेसोपोटामिया की सभ्यता में दो नदियों का महत्व बतायें। V.V.I.

Or, आरम्भिक सभ्यता के आविर्भाव में नदियों के महत्व को समझाइए।

  • उत्तर ):मेसोपोटामिया आज के समय के इराक देश का पुराना नाम है। 'मेसोपोटामिया' शब्द का असली मतलब ही होता है—"दो नदियों के बीच की भूमि"। यहाँ की सभ्यता दो प्रमुख नदियों—दजला (Tigris) और फरात (Euphrates)—के भरोसे ही फली-फूली। इन नदियों का महत्व निम्नलिखित है:

  • पानी की प्रचुरता और उपजाऊ जमीन: ये दोनों नदियाँ आर्मेनिया के पठार (पहाड़ों) से निकलकर दक्षिण-पूर्व की तरफ बहती हुई फारस की खाड़ी में गिरती हैं। पहाड़ों से बहकर आने के कारण ये अपने साथ बहुत उपजाऊ मिट्टी लेकर आती थीं, जिससे यहाँ की जमीन खेती के लिए बहुत अच्छी हो गई। इतिहासकारों ने इसे 'उपजाऊ अर्धचन्द्राकार प्रदेश' (Fertile Crescent) कहा है।

  • खेती और पशुपालन: नदियों के पानी और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहाँ गेहूँ, जौ और मटर जैसी फसलें बहुत ज्यादा पैदा होती थीं। साथ ही, यहाँ हरी घास की वजह से भेड़-बकरियों और अन्य मवेशियों के लिए बेहतरीन चारा मिल जाता था, जिससे पशुपालन को बढ़ावा मिला।

  • सभ्यता का जन्म: दजला और फरात नदियों के पानी से सिंचित इसी उपजाऊ हिस्से में दुनिया की सबसे पहली और सबसे पुरानी सभ्यता का जन्म हुआ, जिसे हम मेसोपोटामिया की सभ्यता कहते हैं। आज इस क्षेत्र को इराक देश कहा जाता है।


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Q.10. नवपाषाणिक क्रांति क्या है? V.V.I.

  • उत्तर :इतिहास में 'नवपाषाण काल' को मानव सभ्यता के विकास का एक बहुत महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इस काल में इंसानों के जीवन में इतने बड़े बदलाव आए कि इसे "नवपाषाणिक क्रांति" कहा गया। ये मुख्य बदलाव निम्नलिखित थे:

  • कृषि की शुरुआत: इस काल का सबसे बड़ा और चमत्कारी आविष्कार खेती (कृषि) की शुरुआत थी। खेती के कारण इंसान अब एक जगह बस्तियां बनाकर रहने लगा और यहीं से सामाजिक जीवन शुरू हुआ।

  • बेहतर औजार और कुल्हाड़ी: अब पत्थरों के औजार पहले से ज्यादा सुंदर, सुडौल और धारदार बनाए जाने लगे। कुल्हाड़ी के आविष्कार से जंगलों को साफ करके खेती लायक जमीन बनाना आसान हो गया।

  • पहिए का आविष्कार: इसी समय बर्तन बनाने और सामान ढोने के लिए 'पहिए' का आविष्कार हुआ।

  • रहन-सहन में बदलाव: इंसान अब सन (जूट) और पटुआ के कपड़े पहनने लगा और लकड़ी काटकर पक्के घर बनाकर रहने लगा। इन क्रांतिकारी बदलावों के कारण ही इसे नवपाषाणिक क्रांति कहते हैं।

Q.11. मेसोपोटामिया के लोगों के आर्थिक जीवन का वर्णन कीजिए। V.V.I.

  • उत्तर :मेसोपोटामिया के लोगों की कमाई और आजीविका (आर्थिक जीवन) के मुख्य साधन निम्नलिखित तीन थे:

  • 1. कृषि एवं पशुपालन: यहाँ के ज्यादातर लोग खेती करते थे क्योंकि यहाँ की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी। फसलों की सिंचाई के लिए वे नहरें और तालाब बनाते थे। खेती के साथ-साथ वे भेड़ और बकरियाँ भी पालते थे।

  • 2. उद्योग-धंधे (काम-धंधे): यहाँ के लोग सूत कातना, कपड़े बुनना और उन्हें रंगना जानते थे। वे भेड़ के बालों और सन से कपड़े तैयार करते थे। इसके अलावा मिट्टी की मूर्तियाँ बनाना और सोने, चाँदी तथा लकड़ी के सुंदर सामान बनाना भी उनकी जीविका का साधन था।

  • 3. विदेशी व्यापार: मेसोपोटामिया के लोग बहुत बड़े पैमाने पर दूसरे देशों से व्यापार करते थे। उनके पास बहुमूल्य पत्थर, लकड़ी, सोना और चाँदी जैसी धातुओं की कमी थी, जिसे वे विदेशों से मँगाते थे और बदले में अपने यहाँ पैदा होने वाला अनाज और कृषि सामग्री बाहर भेजते थे।

Q.12. मेसोपोटामिया में शहरों के उदय के क्या कारण थे? V.V.I.

(What was the reason behind the origin of Urban cities in Mesopotamia?)

  • उत्तर ):दुनिया में सबसे पहले शहरी जीवन की शुरुआत मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) से ही मानी जाती है। शहरों के बसने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  • नदियों का उपजाऊ डेल्टा: दजला और फरात नदियों के बीच का दक्षिणी हिस्सा 'सुमेर' कहलाता था, जो बेहद उपजाऊ था।

  • लोगों का आकर बसना: इस उपजाऊ जमीन के लालच में आस-पास के बंजर और रेगिस्तानी इलाकों से अलग-अलग जातियों के लोग यहाँ आकर बसने लगे।

  • सभ्यता और नगरों का विकास: अधिक आबादी और बेहतरीन खेती के कारण यहाँ एक उच्च दर्जे की शहरी सभ्यता का जन्म हुआ। 'सुमेर' और 'अक्कद' यहाँ के दो सबसे बड़े शहर बने। इनके अलावा उर, निपुर, लगास, लारसा, किश और सूसा जैसे कई अन्य छोटे-छोटे शहर भी विकसित हुए।

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Q.13. शहरीकरण के दो कारकों का वर्णन करें। V.V.I.

  • उत्तर :शहर उस जगह को कहते हैं जहाँ लोग सिर्फ भोजन उगाने (खेती) के अलावा अन्य व्यापारिक और प्रशासनिक काम भी करते हैं। प्राचीन काल में (जैसे मेसोपोटामिया और हड़प्पा में) शहरों के विकास के दो मुख्य कारण (कारक) थे:

  • (a) व्यापार और वाणिज्य का विकास: जब खेतों में जरूरत से ज्यादा अनाज (कृषि अधिशेष) पैदा होने लगा, तो लोग उस अनाज को दूसरे देशों में बेचकर व्यापार करने लगे। इस व्यापार और काम की तलाश में गाँवों के लोग आकर एक जगह जुटने लगे, जिससे धीरे-धीरे छोटे कस्बे बड़े शहरों में बदल गए।

  • (b) धार्मिक एवं शाही केन्द्रों का विकास: कई बार जहाँ बड़े और प्रसिद्ध मंदिर होते थे या जहाँ राजा का महल और सरकारी कामकाज (प्रशासन) होता था, उस जगह की सुरक्षा और महत्ता के कारण लोग चारों तरफ बस जाते थे, जिससे वे स्थान धीरे-धीरे शहर बन जाते थे।

Q.14. सुमेर सभ्यता के आरम्भिक नगरों पर प्रकाश डालें। V.V.I.

Or, मारी नगर के ऐश्वर्य का वर्णन करें।

  • उत्तर ):मेसोपोटामिया की सुमेर सभ्यता में 'मारी' (Mari) नाम का नगर अपनी भव्यता, धन-दौलत और ऐश्वर्य के लिए दुनिया भर में मशहूर था। इसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

  • भौगोलिक स्थिति: मारी नगर मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग में फरात नदी की ऊपर की धारा (उत्तर दिशा) पर स्थित था। यह लगभग 2000 ईसा पूर्व (BC) के बाद एक भव्य शाही राजधानी के रूप में सामने आया।

  • व्यापारिक महत्व (ऐश्वर्य का कारण): यह शहर एक ऐसे रास्ते पर स्थित था जहाँ से दक्षिण के मैदानी इलाकों और उत्तर के पहाड़ी इलाकों (तुर्की, सीरिया, लेबनान) के बीच भारी व्यापार होता था। लकड़ी, ताँबा, राँगा, तेल और मदिरा ले जाने वाले जहाज फरात नदी के रास्ते यहीं से गुजरते थे। मारी के अधिकारी इन जहाजों से टैक्स (कर) वसूलते थे, जिससे यह नगर बहुत अमीर और वैभवशाली बन गया।

Q.15. मारी स्थित जिमरीलिम के राजमहल का वर्णन कीजिए।

  • उत्तर:मारी नगर में वहाँ के राजा 'जिमरीलिम' का महल अपनी विशालता और सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर था। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • शाही निवास और कामकाज: यह विशाल राजमहल राजा और उनके परिवार का निवास स्थान था। साथ ही, यहीं से पूरे राज्य का शासन चलाया जाता था और यहाँ कीमती धातुओं के आभूषण भी बनाए जाते थे।

  • पर्यटन का केंद्र: यह महल इतना खूबसूरत था कि इसे देखने के लिए दूसरे देशों के राजा और लोग दूर-दूर से आते थे।

  • शाही भोजन: महल में राजा और उनके खास मेहमानों के लिए रोज़ तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन परोसे जाते थे।

  • बनावट और कमरे: यह पूरा महल सुंदर पत्थरों से जड़ा हुआ था। इसमें अंदर आने के लिए केवल एक मुख्य दरवाजा (प्रवेशद्वार) था जो उत्तर दिशा में था। यह महल 2.4 हेक्टेयर में फैला हुआ था और इसमें कुल 260 कमरे थे।

Q.16. शहरी जीवन का प्रारम्भ कहाँ हुआ? इस स्थान की भौगोलिक स्थिति बताइए।

  • उत्तर :

  • शुरुआत: दुनिया में सबसे पहले शहरी जीवन (City Life) की शुरुआत मेसोपोटामिया (Mesopotamia) में हुई थी।

  • भौगोलिक स्थिति: मेसोपोटामिया आज के इराक देश में स्थित है। यह क्षेत्र दो प्रसिद्ध नदियों—फरात (Euphrates) और दजला (Tigris) के बीच की उपजाऊ भूमि पर बसा हुआ था।

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Q.17. मेसोपोटामिया सभ्यता की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए। V.V.I.

  • उत्तर ):

  • ज्ञान और समृद्धि: मेसोपोटामिया की सभ्यता अपनी धन-दौलत, बेहतरीन साहित्यों, गणित (Mathematics) और खगोलशास्त्र (Astronomy/अंतरिक्ष विज्ञान) की खोजों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है।

  • भाषा और क्षेत्र: इस सभ्यता की सबसे पहली पहचानी गई भाषा सुमेरी (Sumerian) थी। इसके शहरी और विकसित दक्षिणी हिस्से को 'सुमेर' तथा 'अक्कद' कहा जाता था।

Q.18. यूरोपवासियों के लिए मेसोपोटामिया क्यों महत्वपूर्ण था?

  • उत्तर ):

  • धार्मिक जुड़ाव: ईसाइयों की पवित्र किताब बाइबिल के पहले भाग 'ओल्ड टेस्टामेंट' में मेसोपोटामिया का कई बार जिक्र आया है। इसलिए यूरोप के यात्री और विद्वान इस जगह को अपने पूर्वजों की भूमि (Purvajo ki bhumi) मानते हैं।

  • सुमेर का प्रमाण: ओल्ड टेस्टामेंट की 'बुक ऑफ जेनेसिस' में 'शिमर' शब्द का इस्तेमाल हुआ है, जिसका मतलब 'सुमेर' (ईंटों से बने शहरों की भूमि) से है। इसी वजह से यूरोप के लोगों की इसमें गहरी रुचि थी।

Q.19. मेसोपोटामिया के शहरी जीवन की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए। V.V.I.

  • उत्तर ):

  • अमीर और गरीब में अंतर (असमानता): मेसोपोटामिया के शहरों में एक अमीर/संभ्रांत वर्ग का उदय हो चुका था। समाज की ज्यादातर धन-दौलत और कीमती चीजें इसी छोटे से अमीर वर्ग के पास थीं। इसका सबूत 'उर' शहर के राजा-रानियों की कब्रों से मिलता है, जहाँ उनके साथ सोने-चाँदी और कीमती रत्न दफनाए गए थे। आम जनता की स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती।

  • एकल परिवार को महत्व: कानूनी कागजातों से पता चलता है कि वहाँ के समाज में 'मूल परिवार' (Nuclear Family यानी माता-पिता और उनके बच्चे) को ही आदर्श माना जाता था। शादी के बाद बेटा अपने माता-पिता के साथ ही रहता था।

Q.20. कृषि में दजला-फरात नदियों का क्या महत्व है? V.V.I.

  • उत्तर ):मेसोपोटामिया में खेती पूरी तरह इन दोनों नदियों पर निर्भर थी:

  • ये नदियाँ उत्तरी पहाड़ों से बहकर आते समय अपने साथ बारीक और बहुत उपजाऊ मिट्टी बहाकर लाती थीं।

  • जब भी इन नदियों में बाढ़ आती थी या जब इनके पानी को नहरों के जरिए खेतों तक ले जाया जाता था, तब वह उपजाऊ मिट्टी खेतों में जमा हो जाती थी, जिससे फसलें बहुत अच्छी और भारी मात्रा में पैदा होती थीं।

Q.21. वार्का शीर्ष क्या है?

  • उत्तर:

  • यह सफेद संगमरमर (Marble) को तराशकर बनाया गया एक स्त्री का सिर (मूर्ति) है, जो लगभग 3000 ईसा पूर्व (BC) में मेसोपोटामिया के 'उरुक' नगर में बनाया गया था।

  • कलाकारी के मामले में यह बहुत प्रसिद्ध है। इसकी आँखों और भौहों को सजाने के लिए नीले लाज़वर्द पत्थर, सफेद सीपी और काले डामर (बिटुमेन) की जड़ाई की गई थी।


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Q.22. नैबोनिडस (Nabonidus) के बारे में जानकारी दें।

  • उत्तर:

  • नैबोनिडस स्वतंत्र बेबीलोन का आखिरी शासक (राजा) था।

  • उसके बारे में एक कहानी प्रसिद्ध है कि उर नगर के देवता ने उसे सपने में आकर आदेश दिया कि वह पुराने नगर की देखभाल का जिम्मा किसी महिला पुरोहित को सौंप दे। इसके बाद राजा ने अपनी बेटी को बिल्कुल उसी वेशभूषा से सजाकर महिला पुरोहित के पद पर बैठाया।

Q.23. बेबीलोन की बौद्धिक प्रगति का उल्लेख करें। V.V.I.

  • उत्तर:बेबीलोन शहर व्यापार के साथ-साथ ज्ञान, साहित्य और विज्ञान के मामले में बहुत आगे था:

  • लिपि: यहाँ के लोग कीलाकार लिपि का प्रयोग करते थे, जिसमें करीब 300 संकेत या चिह्न थे। इसी लिपि में यहाँ प्रसिद्ध 'गिल्गामेश महाकाव्य' लिखा गया।

  • गणित और गणना: यहाँ के लोग जोड़, घटाव, गुणा और भाग से अच्छी तरह परिचित थे। गिनती के लिए वे $1, 10, 100$ जैसी इकाइयों का प्रयोग करते थे।

  • कैलेंडर और खगोल: उनके एक साल में 360 दिन होते थे। वे चंद्रमा के आधार पर साल का हिसाब लगाते थे। इसके अलावा उन्होंने ज्योतिष, चिकित्सा (दवाइयाँ), धूपघड़ी और जलघड़ी का भी विकास कर लिया था।

Q.24. मेसोपोटामिया में ज्योतिष-शास्त्र व खगोल-विद्या की देनों का वर्णन कीजिए। V.V.I.

  • उत्तर:मेसोपोटामिया के लोगों ने अंतरिक्ष और समय को समझने में बहुत तरक्की की थी:

  • दिन-रात का बंटवारा: उन्होंने ही पूरे एक दिन को 24 घंटों में बांटने का नियम बनाया।

  • आकाश का विभाजन: उन्होंने पूरे आसमान को 12 भागों (राशियों) में बांटा और हर हिस्से को अलग नाम दिया।

  • तारों और ग्रहों का ज्ञान: वे सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की गति को गहराई से देखते थे। तारों को उनके दिए गए नाम आज भी उपयोग में लाए जाते हैं। उन्हें चंद्रमा के बढ़ते और घटते दिनों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) की भी पूरी जानकारी थी।

Q.25. मेसोपोटामिया के कैलण्डर (अथवा पंचांग) उनकी महत्वपूर्ण देन हैं, वर्णन करें। V.V.I.

  • उत्तर:

  • मेसोपोटामिया के लोगों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उनका पंचांग (कैलेंडर) था, जो पूरी तरह चंद्रमा की चाल (गति) पर आधारित था।

  • यद्यपि चंद्रमा पर आधारित होने के कारण उनका साल असली सौर वर्ष से 11 दिन छोटा होता था, लेकिन वे समय के बहुत पक्के थे। उन्होंने 1 दिन को 24 घंटों में, 1 घंटे को 60 मिनटों में और 1 मिनट को 60 सेकेंडों में विभाजित किया था।

  • अपने कैलेंडर की इस 11 दिन की कमी (अशुद्धि) को ठीक करने के लिए वे हर कुछ सालों के बाद कैलेंडर में एक एक्स्ट्रा (अतिरिक्त) महीना जोड़ देते थे, ताकि ऋतुओं का तालमेल सही बना रहे।

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Q.26. मेसोपोटामिया की कीलाकार लिपि का वर्णन करें।

  • उत्तर:

  • मेसोपोटामिया की पुरानी लिखाई को 'कीलाकार लिपि' (Cuneiform) कहा जाता है, जिसे सबसे पहले सुमेर के लोगों ने बनाया था।

  • लिखने का तरीका: वे लोग कील या छैनी जैसे तेज औजार से गीली मिट्टी की पट्टियों पर दबाकर लिखते थे। लिखने के बाद इन पट्टियों को आग में पकाकर पक्का कर लिया जाता था। अपनी बात कहने के लिए वे चित्रों, चिह्नों और संकेतों का प्रयोग करते थे।

  • सफलता: 'हेनरी रॉलिन्सन' नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने 12 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस कठिन लिपि को पढ़ने में सफलता पाई, जिससे पूरी दुनिया मेसोपोटामिया के इतिहास को समझ सकी।

Q.27. असुरबनिपाल की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें। V.V.I.

  • उत्तर:

  • असुरबनिपाल (668-627 ईसा पूर्व) असीरियाई राजवंश का आखिरी और बहुत शक्तिशाली राजा था, जिसने अपने पिता से भी बड़ी सफलताएं हासिल कीं।

  • सैन्य सफलता: वह एक पराक्रमी योद्धा था जिसने संपूर्ण पश्चिमी एशिया में अपना दबदबा बनाया। उसने लीडिया और थिब्स को जीतकर वहाँ से भारी मात्रा में सोना-चाँदी लूटा और उत्तरी मिस्र पर भी विजय पाई।

  • साहित्य प्रेमी: एक क्रूर विजेता होने के साथ-साथ वह विद्वानों का बहुत आदर करता था। उसने अपनी राजधानी 'निनवे' में एक बहुत बड़ा पुस्तकालय (Library) बनवाया था, जहाँ उसने इतिहास, विज्ञान और धर्म से जुड़ी हजारों मिट्टी की ज्ञानवर्धक पट्टियों को इकट्ठा करके सुरक्षित रखवाया था।


Q.28. रोमन सरकार ने चाँदी में मुद्रा को ढालना क्यों बंद किया? V.V.I.

  • उत्तर:

  • चाँदी की कमी: रोमन सरकार ने चाँदी के सिक्के बनाना इसलिए बंद कर दिया क्योंकि स्पेन में मौजूद चाँदी की खदानें खत्म हो चुकी थीं और सरकार के पास चाँदी का स्टॉक खाली हो गया था। चाँदी बहुत कीमती और दुर्लभ हो गई थी।

  • तकनीक का विकास: आधुनिक समय में नई तकनीक और धातु विज्ञान (Metallurgy) के विकास के कारण अब एल्युमिनियम, ताँबे और अन्य मिश्रित धातुओं (Alloys) के सिक्के बनाए जाने लगे हैं।

Q.29. 'रोम साम्राज्य में सांस्कृतिक विभिन्नता का अनुपम मिश्रण था।' स्पष्ट कीजिए। V.V.I.

  • उत्तर:रोम साम्राज्य बहुत बड़ा था और वहाँ अलग-अलग संस्कृति के लोग मिल-जुलकर रहते थे, जिसे हम निम्नलिखित बातों से समझ सकते हैं:

  • विविधता: इस साम्राज्य में धार्मिक संप्रदायों, स्थानीय देवी-देवताओं, पहनावे, खान-पान, सामाजिक संगठनों और बस्तियों के कई अलग-अलग रूप दिखाई देते थे। वहाँ बोलने के लिए भी कई तरह की भाषाएँ इस्तेमाल होती थीं।

  • अलग-अलग भाषा क्षेत्र: इसके आस-पास के क्षेत्रों में अलग-अलग भाषा-समूह थे; जैसे निकटवर्ती पूर्व-क्षेत्र में 'अरामाइक', मिस्र में 'कॉप्टिक', उत्तरी अफ्रीका में 'प्यूनिक' और 'बेरबेर', तथा स्पेन और उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में 'केल्टिक' भाषा बोली जाती थी।

  • मौखिक भाषाएँ: इनमें से बहुत सी भाषाएँ केवल बोली जाती थीं, उनकी कोई लिखाई (लिपि) नहीं थी। वे तब तक सिर्फ मौखिक रहीं जब तक उनके लिए अक्षरों की खोज नहीं हुई। उदाहरण के लिए, अर्मीनियाई भाषा को पाँचवीं शताब्दी में जाकर लिखना शुरू किया गया।

  • लैटिन का प्रभाव: तीसरी सदी के मध्य तक बाइबिल का अनुवाद 'कॉप्टिक' भाषा में हो चुका था। कई जगहों पर 'लैटिन' भाषा के फैलने से स्थानीय भाषाएँ कम होने लगीं, जैसे केल्टिक भाषा का लिखना प्रथम सदी के बाद बंद हो गया।

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Q.30. रोमन साम्राज्य को तीन महाद्वीपों का साम्राज्य क्यों कहा जाता है?

  • उत्तर:

  • विशाल फैलाव: रोमन साम्राज्य का आकार बहुत बड़ा था। इसकी सीमाएं दुनिया के तीन बड़े महाद्वीपों—यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया तक फैली हुई थीं।

  • प्राकृतिक सीमाएं: इसके उत्तर में साम्राज्य की सीमा का निर्धारण 'राइन' और 'डेन्यूब' नाम की दो बड़ी नदियाँ करती थीं। इसके दक्षिण में 'सहारा' नाम का बहुत बड़ा रेगिस्तान था। इसके भूमध्यसागर और उसके आस-पास के सभी इलाकों पर रोम का पूरी तरह अधिकार था। तीन महाद्वीपों में फैले होने के कारण ही इसे यह नाम मिला।

Q.31. जस्टीनियन (Justinian) के बारे में आप क्या जानते हैं?

  • उत्तर:

  • परिचय: जस्टीनियन पूर्वी रोमन साम्राज्य (बायजेंटाइन) का एक बहुत प्रसिद्ध और महान सम्राट था, जिसकी राजधानी कॉन्सटेंटिनोपल थी।

  • खूबियाँ: वह एक बेहतरीन मैनेजर (प्रबंधकर्ता), महान विजेता और एक विशाल भवन-निर्माता था।

  • कानून निर्माता (Law Giver): वह इतिहास में अपने कानूनों के संग्रह के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। उसने रोमन कानूनों को इकट्ठा करवाकर 'कॉर्पस जुरिस सिविलिस' (Corpus Juris Civilis) नाम का एक संग्रह तैयार करवाया।

  • महत्व: इसके चार भाग हैं जिनमें रोमन कानून की हर छोटी-बड़ी बात को साफ-साफ लिखा गया है। जस्टीनियन के ये कानून आज भी बहुत लोकप्रिय हैं और दुनिया के कई देशों के कानूनों की आधारशिला (नींव) माने जाते हैं।

Q.32. कॉन्सटेंटाइन के प्रमुख सुधारों का वर्णन करें।

  • उत्तर:

  • सम्राट कॉन्सटेंटाइन के मुख्य सुधारों को इस प्रकार समझा जा सकता है—

  • मौद्रिक सुधार (पैसों से जुड़ा सुधार): कॉन्सटेंटाइन का सबसे प्रमुख सुधार पैसों के क्षेत्र में था। उसने चाँदी के सिक्कों की जगह 'सॉलिडस' (Solidus) नाम का एक नया सिक्का चलाया। यह सिक्का शुद्ध सोने का बना होता था, जो व्यापार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत सफल साबित हुआ।

Q.33. रोम में दासों की दशा का संक्षिप्त वर्णन करें।

  • उत्तर:रोम साम्राज्य में दासों (गुलामों) की संख्या बहुत ज्यादा थी और उनका जीवन बेहद कष्टदायक था:

  • गिनी जाती थी बड़ी संख्या: प्राचीन यूनान और रोम में दासों को समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा माना जाता था। रोम साम्राज्य के बढ़ने के साथ-साथ गुलामों की संख्या इतनी बढ़ गई कि समाज में उनकी स्थिति बहुत कमजोर हो गई।

  • दास कैसे बनते थे: युद्ध में बंदी बनाए गए लोगों या जो लोग अपना कर्ज नहीं चुका पाते थे, उन्हें जबरन दास बना लिया जाता था। उनसे दिन-रात बिना थके काम लिया जाता था।

  • कठिन काम और अत्याचार: दासों से हर तरह के छोटे-बड़े काम लिए जाते थे, जैसे—खेती करना, खदानों में खुदाई करना, सड़कें बनाना और जहाजों पर भारी काम करना। उन्हें समाज में कोई अधिकार नहीं थे। मनोरंजन के लिए कई बार उन्हें खूंखार जंगली जानवरों के सामने मरने के लिए छोड़ दिया जाता था।

  • पतन का कारण: दासों पर होने वाले इस जुल्म के कारण ग्रीस और रोम के अमीर लोग पूरी तरह भोग-विलास (ऐश-आराम) में डूब गए, जिससे आगे चलकर सेना कमजोर हुई और साम्राज्य का नैतिक पतन हो गया।

Q.34. यूनानी रोमन संस्कृति के कौन-कौन तत्व 14वीं एवं 15वीं शताब्दी में पुनः स्थापित हुए।

  • उत्तर:

  • इतिहासकार बर्कहार्ट के अनुसार, 14वीं और 15वीं शताब्दी में यूरोप में जो नए बदलाव आए, उन्हें 'पुनर्जागरण' (Renaissance) कहा जाता है। इस काल में पुरानी यूनानी और रोमन संस्कृति की कई अच्छी बातें फिर से लौट आईं।

  • मानसिक आजादी और विचार: मध्यकाल के समाज में जो धार्मिक कट्टरता और पाबंदियां थीं, लोग उनके विरोधी होने लगे। पेरिस और ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई जहाँ यूनान के पुराने ग्रंथों, दर्शन (Philosophy) और नैतिकता की नए सिरे से खोज की गई।

  • तर्क और स्वतंत्रता: लोगों में स्वतंत्र रूप से सोचने, चिंतन करने और मनन करने की आदत दोबारा शुरू हुई। सम्राट फ्रेडरिक-II जैसे शासकों ने भी इस बौद्धिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का समर्थन किया, जो पुनर्जागरण काल की मुख्य पहचान बनी।

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Q.35. यहूदी धर्म का उदय कब हुआ? इसके मुख्य सिद्धांत क्या थे?

  • उत्तर:

  • उदय: यहूदी धर्म (Judaism) दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है। इस धर्म की शुरुआत ईसा पूर्व (BC) की 13वीं शताब्दी में फिलिस्तीन में हुई थी, जब ईश्वर ने हजरत मूसा के माध्यम से इस धर्म की महत्वपूर्ण शिक्षाएं लोगों को दी थीं।

  • यहूदी धर्म के मुख्य सिद्धांत (नियम):

  • एक ईश्वर में विश्वास: यहूदी लोग केवल एक ही ईश्वर (भगवान) को मानते हैं। हजरत मूसा ने एक ही ईश्वर की पूजा करने की शिक्षा दी थी।

  • ईश्वर का नाम 'यहवे' या 'जेहोवा': वे ईश्वर को 'यहवे' या 'जेहोवा' कहकर पुकारते हैं और उनका मानना है कि ईश्वर अपनी प्रजा (इंसानों) से बेहद प्रेम करता है।

  • सदाचार का उपदेश: इस धर्म में आपस में प्रेम, दया, ईमानदारी और नेक रास्ते पर चलने की सीख दी गई है।

Q.36. क्लियोपेट्रा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

  • उत्तर:

  • परिचय: क्लियोपेट्रा मिस्र (Egypt) के 'टॉल्मी वंश' की एक बेहद प्रसिद्ध राजकुमारी और शासक थी।

  • सुंदरता और प्रभाव: वह दिखने में बहुत ही सुंदर और बुद्धिमान थी। जब रोम के महान सेनापति 'जूलियस सीजर' अलेक्जेंड्रिया पहुँचे, तो क्लियोपेट्रा से मुलाकात के बाद वे उसकी सुंदरता और बातचीत के तरीके से बेहद प्रभावित हुए और उससे प्रेम करने लगे। इतिहास में वह अपनी राजनीतिक सूझबूझ के लिए भी जानी जाती है।

Q.37. रोमन समाज पर टिप्पणी लिखें।

  • उत्तर:रोमन साम्राज्य के लोगों के सामाजिक जीवन और रहन-सहन को ध्यान से देखें तो उसमें कई आधुनिक लक्षण दिखाई देते थे। इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • 1. दो मुख्य वर्ग (अमीर और गरीब): रोमन समाज मुख्य रूप से दो बड़े हिस्सों में बंटा हुआ था—अमीर वर्ग और गरीब वर्ग। अमीर लोग आलीशान और सुंदर भवनों में रहते थे, जिन्हें पेट्रीशियन (Patrician) कहा जाता था। वहीं दूसरी तरफ गरीब और आम जनता थी, जिसमें कारीगर और मजदूर शामिल थे, इन्हें प्लीबियन (Plebians) कहा जाता था।

  • 2. महिलाओं की स्थिति और विवाह: गणतंत्र काल (प्रथम शताब्दी ई.पू.) तक समाज में महिलाओं की स्थिति काफी अनोखी थी। शादी के बाद महिला अपनी संपत्ति अपने पति को नहीं सौंपती थी, बल्कि उस पर महिला के अपने पिता के परिवार (पैतृक परिवार) का ही पूरा अधिकार रहता था। महिला को अपने पिता की संपत्ति में पूरा हक मिलता था। शादी के समय जो दहेज दिया जाता था, वह शादी के दौरान पति के काम आता था।

Q.38. रोमन साम्राज्य के पतन में सेना की क्या भूमिका थी?

  • उत्तर:रोमन साम्राज्य के बिखरने और खत्म होने के पीछे वहाँ की सेना की एक बड़ी भूमिका थी:

  • भाड़े के सैनिक: रोमन साम्राज्य बहुत से देशों में फैला हुआ था और इस पर कब्जा बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ी सेना की जरूरत थी। शुरुआत में तो सेना में रोम के अपने नागरिक होते थे, लेकिन बाद में सेना का आकार बढ़ाने के लिए बाहर के देशों (विदेशी) सैनिकों को भर्ती किया जाने लगा।

  • वफादारी की कमी: ये सैनिक रोम देश के प्रति वफादार होने के बजाय ऐश-आराम, धन-दौलत और अपने सेनापतियों के फायदे के बारे में ज्यादा सोचते थे।

  • साम्राज्य का पतन: जब बाहरी आक्रमणकारियों ने रोम पर हमला किया, तो इस कमजोर और अनुशासनहीन सेना ने घुटने टेक दिए। वे मिलकर आक्रमणकारियों का सामना नहीं कर पाए, जिससे इतने बड़े रोमन साम्राज्य का पूरी तरह सर्वनाश हो गया।

Q.39. सीनेट किसे कहते हैं?

  • उत्तर:

  • अर्थ: रोम साम्राज्य में धनी, प्रभावशाली और कुलीन (ऊंचे वंश के) लोगों का एक छोटा सा समूह होता था जो सरकार चलाने और फैसले लेने में राजा की मदद करता था, इसी समूह को 'सीनेट' (Senate) कहा जाता था।

  • योग्यता: सीनेट की सदस्यता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती थी कि व्यक्ति कितना अमीर है और उसका जन्म किस ऊंचे परिवार में हुआ है। इस व्यवस्था में आम जनता की योग्यता या गुणों की बजाय केवल ऊंचे जन्म, धन-दौलत और समाज में प्रतिष्ठा (रुतबे) को ही सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था।

Q.40. रोम में गणतंत्र कब तक चला? इसे किस सम्राट द्वारा समाप्त किया गया?

  • उत्तर:

  • गणतंत्र का समय: रोम में गणतंत्र (Republic शासन) 509 ईसा पूर्व (BC) से लेकर 27 ईसा पूर्व (BC) तक चला था।

  • किसने समाप्त किया: 27 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर के दत्तक पुत्र 'ऑक्टेवियन' (जस्टिस सीजर का पोता/पुत्र) ने इस गणतंत्र व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया। सत्ता अपने हाथ में लेकर वह 'अगस्तस' के नाम से रोम का पहला सम्राट (राजा) बना।



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Q.42. रोम में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति का वर्णन करें।

  • उत्तर:रोम के समाज में महिलाओं या स्त्रियों की स्थिति काफी मजबूत और स्वतंत्र थी, जिसे इन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • संपत्ति का अधिकार: शादी के बाद महिला की संपत्ति उसके पति को ट्रांसफर (हस्तांतरित) नहीं होती थी। महिला का अपनी पैतृक (पिता की) संपत्ति पर पूरा कानूनी हक बना रहता था। पिता की मृत्यु के बाद वह उस संपत्ति की स्वतंत्र मालिक बन जाती थी, जिससे उसे अच्छी आर्थिक आजादी मिलती थी।

  • आसान तलाक: उस समय कानूनन तलाक लेना बहुत आसान था। पति या पत्नी में से कोई भी एक, सिर्फ अलग रहने या संबंध तोड़ने के इरादे की सूचना देकर आसानी से तलाक ले सकता था।

  • शादी और परिवार: आमतौर पर शादियां माता-पिता द्वारा तय (नियोजित) की जाती थीं। लड़के-लड़कियों की शादी की उम्र में काफी अंतर होता था (लड़के बड़े और लड़कियां छोटी उम्र की होती थीं)। हालांकि, घर-परिवार के मामलों में फिर भी पति का ही दबदबा (वर्चस्व) ज्यादा रहता था।

Q.43. प्राचीन रोम की प्रशासन व्यवस्था की विवेचना करों। V.V.I.

Or, रोम के प्रशासन में सीनेट का महत्व बतावें।

  • उत्तर:प्राचीन रोम की शासन व्यवस्था मुख्य रूप से तीन अंगों के इर्द-गिर्द घूमती थी:

  • 1.राजा व सभा (Assembly): रोम की प्राचीन सभ्यता की शुरुआत 1000 ईसा पूर्व (BC) के आस-पास से मानी जाती है। शुरुआत में यहाँ एक राजा होता था और एक 'सभा' (Assembly) होती थी, जिसमें सभी बालिग पुरुष नागरिक शामिल होते थे।

  • 2. सीनेट (Senate): यह रोम के सबसे धनी और ऊंचे कुलीन परिवारों के सदस्यों का एक शक्तिशाली समूह था। सीनेट के पास राजा के प्रस्तावों को खारिज (अस्वीकार) करने का पूरा अधिकार था, इसलिए राजा पर सीनेट का बहुत बड़ा नियंत्रण रहता था। आगे चलकर (छठी सदी ईसा पूर्व) इसी सीनेट ने राजा का पद पूरी तरह समाप्त कर दिया और रोम में गणतंत्र की स्थापना की।

  • 3. कौंसल (Consul): गणतंत्र की शुरुआत के बाद पूरे रोम का शासन चलाने के लिए दो मुख्य अधिकारी चुने जाते थे, जिन्हें 'कौंसल' कहा जाता था। दो कौंसल मिलकर शासन संभालते थे ताकि कोई एक व्यक्ति तानाशाह न बन सके। सौ सालों के बाद राजा का पद हटने पर वहाँ यह गणतंत्र व्यवस्था काफी मजबूत रही।


Q.44. जूलियस सीजर का परिचय दें। / रोमन सम्राट जूलियस सीजर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालें।

  • जूलियस सीजर कौन था? रोमन साम्राज्य में उसके योगदान और सफलताओं का मूल्यांकन कीजिए।

  • : रोमन शासक जूलियस सीजर के जीवन और उसकी प्रमुख जीतों (उपलब्धियों) के बारे में विस्तार से समझाइए।

Q.45. आक्टेवियन ऑगस्टस का परिचय दें।

  • आक्टेवियन ऑगस्टस के बारे में आप क्या जानते हैं? संक्षिप्त विवरण दीजिए।

  • : रोमन इतिहास में आक्टेवियन ऑगस्टस के महत्व और उसकी पहचान को स्पष्ट कीजिए।

Q.46. हिजरी संवत् पर नोट लिखें। / इस्लामी कैलेण्डर के बारे में आप क्या जानते हैं? / इस्लाम धर्म में हिजरत का क्या अर्थ है?

  • हिजरी संवत् (इस्लामी कैलेंडर) की शुरुआत कैसे हुई? इसमें 'हिजरत' शब्द का क्या महत्व है, स्पष्ट करें।

  • : इस्लाम धर्म के संदर्भ में 'हिजरत' की परिभाषा दीजिए और इस्लामी कालक्रम (कैलेंडर) पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।



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Q.47. जिहाद (धर्म-युद्ध) पर नोट लिखें।

  • : इस्लाम धर्म के अनुसार 'जिहाद' की अवधारणा और इसके वास्तविक अर्थ को स्पष्ट कीजिए।

  • जिहाद (धर्म-युद्ध) से क्या तात्पर्य है? इसके धार्मिक और व्यावहारिक महत्व पर टिप्पणी कीजिए।

Q.48. कुरान (Quoran) पर टिप्पणी लिखें।

  • : इस्लाम धर्म में पवित्र ग्रंथ 'कुरान' के महत्व, शिक्षाओं और स्थान का वर्णन कीजिए।

  • : कुरान पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिए और बताइए कि यह मुसलमानों के लिए क्यों मार्गदर्शक है।

Q.49. अरब में इस्लाम के उदय का वर्णन करें।

  • अरब क्षेत्र में इस्लाम धर्म की स्थापना और उसके शुरुआती प्रसार की कहानी (इतिहास) को रेखांकित कीजिए।

  • पैगम्बर मोहम्मद के समय अरब की सामाजिक स्थिति कैसी थी और वहाँ इस्लाम का उदय कैसे हुआ? समझाइए।

Q.50. कबीलों तथा गैर-अरब (मवाली) के विषय में आप क्या जानते हैं?

  • अरब समाज में 'कबीले' और 'मवाली' (गैर-अरब) की सामाजिक स्थिति और उनके अर्थ को स्पष्ट कीजिए।

  • कबीलों का गठन कैसे होता था और इस्लाम स्वीकार करने के बाद भी गैर-अरब लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता था? व्याख्या करें।

Q.51. उमर खय्याम के बारे में अपनी जानकारी दें।

  • : एक खगोल-वैज्ञानिक, गणितज्ञ और कवि के रूप में उमर खय्याम के योगदान पर प्रकाश डालिए।

  • : उमर खय्याम कौन थे? उनकी 'रूबाईयों' की विशेषताएं और उनके द्वारा बनाए गए पंचांग (कैलेंडर) के महत्व को समझाइए।

Q.52. फिरदौसी के शाहनामा (राजाओं का जीवन चरित) के बारे में बताएं।

  • : महाकाव्य 'शाहनामा' क्या है? इसके रचयिता फिरदौसी और इस ऐतिहासिक ग्रंथ की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

  • : इस्लामी साहित्य की श्रेष्ठ कृति 'शाहनामा' में किसका चित्रण किया गया है और इसका क्या महत्व है? स्पष्ट करें।

Q.53. इब्नसिना की प्रसिद्धि का कारण बताएं।

  • चिकित्सा और दर्शन के क्षेत्र में इब्नसिना (Avicenna) की प्रमुख उपलब्धियों तथा उनकी प्रसिद्धि के कारणों को रेखांकित कीजिए।

  • : इब्नसिना द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक 'चिकित्सा के सिद्धांत' की मुख्य बातों और उसके ऐतिहासिक महत्व पर टिप्पणी लिखिए।

Q.54. शिया तथा सुन्नी पर टिप्पणी लिखें।

इस्लाम धर्म के दो प्रमुख संप्रदायों—'शिया' और 'सुन्नी' के उदय के ऐतिहासिक कारणों और उनके मतभेदों को स्पष्ट कीजिए।

  • पैगम्बर मोहम्मद के बाद खलीफा पद को लेकर शुरू हुए विवाद ने शिया और सुन्नी संप्रदायों को कैसे जन्म दिया? विस्तार से समझाइए।

Q.55. यूरोप तथा एशिया पर धर्मयुद्धों का क्या प्रभाव पड़ा? (What were the effects of the Crusades on Europe and Asia?)

  • धर्मयुद्धों (Crusades) ने यूरोप और एशिया के राजनैतिक, सामाजिक और व्यापारिक संबंधों को किस प्रकार प्रभावित किया? विवेचना कीजिए।

  • : ईसाई और मुस्लिम जगत के बीच हुए धर्मयुद्धों के दूरगामी परिणाम दोनों महाद्वीपों (यूरोप और एशिया) पर क्या हुए? स्पष्ट करें।


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Q.56. मुहम्मद साहब की शिक्षाओं पर टिप्पणी लिखें।

  • 1: हजरत मुहम्मद साहब द्वारा समाज को दिए गए मुख्य उपदेशों और उनकी नैतिक शिक्षाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

  • 2: इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगम्बर मुहम्मद की प्रमुख धार्मिक और व्यावहारिक शिक्षाएं क्या थीं? उनके मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालिए।

Q.57. खिलाफत के दो प्रमुख उद्देश्य क्या थे?

  • पैगम्बर साहब की मृत्यु के बाद स्थापित हुई 'खिलाफत' व्यवस्था के किन्हीं दो मुख्य लक्ष्यों या उद्देश्यों को रेखांकित कीजिए।

  • : उमय्यद और अब्बासी खलीफाओं के काल में खिलाफत प्रणाली के संचालन के पीछे कौन से दो बड़े उद्देश्य थे? स्पष्ट कीजिए।


Q.58. मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्वपूर्ण था?

  • स्टेपी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कीजिए कि मंगोलों को चीनवासियों के साथ व्यापार करने की आवश्यकता क्यों पड़ती थी?

  • यायावर (घुमंतू) मंगोल कबीलों के जीवन में वस्तुओं के विनिमय और व्यापारिक संबंधों के महत्व की समीक्षा कीजिए।


Q.59. चंगेज खान को किन कारणों से सफलता प्राप्त हुई?

  • चंगेज खान की महान सैन्य सफलताओं और उसकी युद्ध-रणनीति के मुख्य स्तंभों का विश्लेषण कीजिए।

  • स्टेपी युद्ध-व्यवस्था, घुड़सवारी और नए तकनीकी यंत्रों ने चंगेज खान को एक सफल विजेता बनाने में क्या भूमिका निभाई? स्पष्ट करें।


Q.60. मंगोलों के यास (yasa) के बारे में आप क्या जानते हैं?

  • चंगेज खान द्वारा तैयार की गई विधि-संहिता 'यास' (Yasa) के ऐतिहासिक महत्व और इसके मुख्य प्रशासनिक अंगों पर प्रकाश डालिए।

  • 'यसाक' या 'यास' शब्द से क्या तात्पर्य है? मंगोल साम्राज्य को संगठित रखने में इस नियम संहिता की भूमिका को समझाइए।


Q.61. चंगेज खाँ ने किस प्रकार एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की?

  • तेरहवीं सदी के पूर्वार्ध में चंगेज खान द्वारा एक विस्तृत मंगोल साम्राज्य खड़े करने की प्रक्रिया और उसकी राजनैतिक दूरदर्शिता का वर्णन कीजिए।

  • चंगेज खान ने अपनी किस विशेष युद्ध शैली, तीरंदाजी और घेराबंदी की तकनीकों के बल पर एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया? व्याख्या कीजिए।

Q.62. चंगेज खान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: चंगेज खान की प्रमुख उपलब्धि एक विशाल और संगठित मंगोल साम्राज्य की स्थापना करना था। उसने अपनी असाधारण कार्यकुशलता, युद्ध-कौशल और स्टेपी युद्ध-व्यवस्था का उपयोग करके बिखरे हुए मंगोल कबीलों को एकजुट किया। उसने घुड़सवार तीरंदाजी को बढ़ावा दिया, जिससे उसकी सेना अत्यधिक गतिशील और मारक बन गई। इसके अलावा, घेराबंदी के लिए 'सीज-इंजन' (Siege-engine) और नेफ्था बमबारी जैसी आधुनिक सैन्य तकनीकों का प्रयोग करके उसने बड़े-बड़े अभेद्य किलों और नगरों पर विजय प्राप्त की।




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Q.63. सामंतवादी व्यवस्था को परिभाषित करें।

उत्तर: सामंतवाद मूलतः मध्यकाल में यूरोप की एक कृषि-संबंधी सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था थी। इस व्यवस्था में देश की समस्त भूमि का वास्तविक मालिक राजा होता था। राजा इस भूमि को बड़े सामंतों (लॉर्ड्स) में बांटता था, और वे इसे आगे छोटे सामंतों तथा साधारण किसानों में विभाजित करते थे। यह समाज एक पिरामिड की तरह संगठित था, जिसमें सबसे ऊपर राजा और सबसे नीचे दयनीय स्थिति में जी रहे किसान थे। ९वीं-१०वीं शताब्दी में यूरोप की राजनैतिक अराजकता को संभालने के लिए इस व्यवस्था का क्रमिक विकास हुआ।

Q.64. फ्रांस के प्रारंभिक सामंती समाज के दो लक्षणों (विशेषताओं) का वर्णन कीजिए।

उत्तर: फ्रांस के प्रारंभिक सामंती समाज के दो मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. तीन वर्गों में विभाजन: फ्रांस का समाज स्पष्ट रूप से तीन श्रेणियों में बंटा था—प्रथम वर्ग पादरी (चर्च से जुड़े), द्वितीय वर्ग अभिजात (धनी सामंत), और तृतीय वर्ग कृषक (किसान) था। पादरी और अभिजात वर्ग को समाज में विशेष अधिकार प्राप्त थे।

  2. श्रम सेवा और सैनिक सुरक्षा: इस व्यवस्था में कृषक अपने खेतों के साथ-साथ सामंतों (लॉर्ड) के खेतों पर भी बिना मजदूरी के काम करते थे। इस अनिवार्य श्रम सेवा के बदले में सामंत उन किसानों को बाहरी आक्रमणों से सैनिक सुरक्षा प्रदान करते थे।

Q.65. रोमन कैथोलिक चर्च पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: मध्यकालीन पश्चिमी यूरोप में रोमन कैथोलिक चर्च एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली धार्मिक व राजनैतिक संस्था थी। इस चर्च में सबसे सर्वोच्च स्थान 'पोप' का होता था, जिन्हें पृथ्वी पर ईसा मसीह का साक्षात प्रतिनिधि माना जाता था। राजाओं और सामंतों द्वारा ईसाई धर्म स्वीकार करने के बाद पोप पूरे पश्चिमी यूरोप के सर्वमान्य धार्मिक नेता बन गए। चर्च के पास अपनी विशाल भूमि और संपत्ति होती थी। राजा भी चर्च के नियमों को मानने के लिए बाध्य थे, जिसके कारण पोप की शक्ति कई बार राजाओं से भी अधिक हो जाती थी।

Q.66. फ्रांस के सर्फ और रोम के दास के जीवन की दशा की तुलना कीजिए।

उत्तर: रोम के दास समाज के सबसे निचले वर्ग में आते थे, जिन्हें किसी भी प्रकार की सामाजिक, आर्थिक या राजनैतिक स्वतंत्रता नहीं थी। उनके साथ पशुओं जैसा क्रूर व्यवहार किया जाता था और उन्हें मूलभूत अधिकार भी नहीं थे। दूसरी ओर, फ्रांस के 'सर्फ' (दास कृषक) भी सबसे निम्न श्रेणी में थे। उन्हें अपनी उपज का एक बड़ा हिस्सा अपने स्वामी सामंत को देना पड़ता था और उनके खेतों पर बिना मजदूरी के काम (बेगार) करना पड़ता था। दोनों का ही जीवन शोषित और दयनीय था।

Q.67. सर्फ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर: मध्यकालीन यूरोपीय सामंतवादी व्यवस्था में 'सर्फ' वास्तव में भू-दास या दास कृषक थे, जिनकी जनसंख्या किसानों में सबसे अधिक थी। हालाँकि कुछ सर्फ के पास अपनी भूमि होती थी जिस पर वे खेती करते थे, लेकिन वे पूरी तरह स्वतंत्र नहीं थे। उन्हें अपने अधिपतियों (लॉर्ड्स) के खेतों पर भी बेगार करनी पड़ती थी। उनके जीवन पर सामंतों के कड़े प्रतिबंध और नियम लागू थे, जिसके कारण उनका पूरा जीवन अत्यधिक कष्टमय, शोषित और पराधीनता में बीतता था।

Q.68. होमेज की प्रथा का वर्णन करें।

उत्तर: सामन्ती व्यवस्था में 'होमेज' एक महत्वपूर्ण प्रथा थी, जिसके तहत भूमि प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने अधिपति (राजा या बड़े सामंत) के प्रति निष्ठा की शपथ लेता था। इस रस्म में जमीन पाने वाला व्यक्ति खुले सिर और झुककर अपने स्वामी के हाथों को चूमता था तथा ईमानदारी व स्वामिभक्ति की प्रतिज्ञा करता था। बदले में अधिपति उसका मुँह चूमकर उसे अपना अधीनस्थ स्वीकार करता था। यह पूरी प्रक्रिया बाइबिल पर हाथ रखकर पूरी की जाती थी, जिससे कानूनी अधिकार तय होते थे।



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Q.69. मेनर किसे कहा जाता था?

उत्तर: सामन्ती काल में मेनर उस विशाल क्षेत्र या जागीर को कहते थे, जिसमें जमींदार की समस्त कृषि-योग्य भूमि, मकान (गढ़ी), कृषि-फार्म, चारागाह और जंगल शामिल होते थे। बड़े सामंतों के पास ऐसे कई मेनर होते थे। मेनर के भीतर ही सर्फ (दास किसानों) की झोपड़ियाँ और गिरजाघर बने होते थे। यहाँ रहने वाले किसान सामंतों के खेतों पर बेगार करते थे। मेनर की स्थिति ऐसी थी कि यदि मेनर को बेचा जाता, तो उसके साथ वहाँ काम करने वाले सर्फ भी स्वतः बिक जाते थे।

Q.70. सामन्तवाद के पतन के मुख्य कारणों का परीक्षण करें।

उत्तर: सामंतवाद के पतन के कई प्रमुख कारण थे। पहला, इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देशों में शक्तिशाली राजतंत्र के उदय से राजाओं ने अपनी स्थायी सेना रखनी शुरू कर दी, जिससे सामंतों का महत्व कम हो गया। दूसरा, सामंतों के बीच आपसी युद्धों के कारण उनकी शक्ति और संख्या दिन-प्रतिदिन घटती चली गई। तीसरा, बारूद और बंदूक जैसे नवीन आविष्कारों ने पुरानी युद्धकला को बदलकर रख दिया। इसके अतिरिक्त, लोगों में राष्ट्रीयता की भावना के विकास ने भी सामंतवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी।

Q.71. यदि आप नाइट होते ?

उत्तर: यदि मैं एक नाइट होता, तो अपने जीवन को ऐश्वर्यपूर्ण ढंग से बिताने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और न्याय को सर्वोपरि रखता। मैं अपनी एक सुसंगठित सेना और अच्छी नस्ल के घोड़ों के साथ अपने भू-भाग की रक्षा करता। मेरे दिल में सर्फों (भू-दासों) और सामान्य कृषकों के लिए गहरी सहानुभूति होती, और मैं उन्हें बंधनों से मुक्त करने का प्रयास करता। मेरा सदैव यही प्रयास रहता कि मैं समाज में अपने न्यायपूर्ण फैसलों और वीरता से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महान मिसाल छोड़ जाऊँ।

Q.72. लैसकॉक्स की गुफा-चित्र पर प्रकाश डालें।

उत्तर: फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स (Lascaux) की गुफाएँ प्रागैतिहासिक कला का एक बेजोड़ उदाहरण हैं। इन गुफाओं में जानवरों की सैकड़ों सुंदर चित्रकारियाँ पाई गई हैं, जो अनुमानतः 30,000 से 12,000 साल पहले के बीच बनाई गई थीं। इन भित्तिचित्रों में गायों, घोड़ों, साकिन, हिरणों, विशालकाय जंगली जानवरों, गैंडों, शेरों, भालुओं, तेंदुओं, लकड़बग्घों और उल्लुओं को बेहद सजीव रूप में दर्शाया गया है। यह प्राचीन मानव के कलात्मक विकास और उनके पर्यावरण को समझने का एक मुख्य स्रोत है।

Q.73. मध्यकालीन मठों का क्या कार्य था?

उत्तर: मध्यकाल में मठ (Monastery) धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र थे। ये इंसानी आबादी से दूर एकांत में बनाए जाते थे, जहाँ भिक्षु (मोंक) और भिक्षुणियाँ (नन) सादा व संयमित जीवन व्यतीत करते थे। उनका मुख्य कार्य ईश्वर की प्रार्थना करना, अध्ययन करना और कृषि जैसा शारीरिक श्रम करना था। इन मठों की अपनी भूमि और विशाल इमारतें होती थीं, जहाँ वे विद्यालय और अस्पताल भी चलाते थे, जिससे स्थानीय लोगों को शिक्षा और चिकित्सा की सुविधा मिलती थी।

Q.74. प्रोटेस्टेंट सुधार आन्दोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे?

उत्तर: मार्टिन लूथर द्वारा 1517 ई० में शुरू किए गए प्रोटेस्टेंट सुधार आंदोलन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे:

भ्रष्टाचार का अंत: कैथोलिक चर्च और मठों में व्याप्त धार्मिक व आर्थिक भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करना।

नैतिक सुधार: पोप और पादरियों के अन्यायपूर्ण रवैये, अत्याचार और विलासितापूर्ण जीवनशैली में सुधार लाना।

पारदर्शिता: चर्च के पवित्र पदों पर रिश्वत लेकर पादरियों की नियुक्ति करने की गलत प्रथा को रोकना।

मुक्ति-पत्रों पर रोक: पाप-मुक्ति के नाम पर पोप द्वारा बेचे जाने वाले 'मुक्ति-पत्रों' (Indulgences) को बंद करना।

Q.75. पुनर्जागरण सबसे पहले इटली में क्यों आरम्भ हुआ?

उत्तर: पुनर्जागरण का प्रारंभ सबसे पहले इटली में होने के कई ठोस कारण थे। पहला, इटली के रोम, फ्लोरेंस और वेनिस जैसे शहर सामंती नियंत्रण से पूरी तरह स्वतंत्र थे, जिससे वहाँ विचारों की स्वतंत्रता को बढ़ावा मिला। दूसरा, ये शहर व्यापार और वाणिज्य के समृद्ध केंद्र थे, जिससे यहाँ एक नए मध्यम वर्ग का उदय हुआ। तीसरा, इटली के शासकों ने यूनानी विद्वानों, कला और साहित्य को उदारतापूर्वक संरक्षण दिया, जिसने बौद्धिक चेतना और कलात्मक क्रांति को तेजी से आगे बढ़ाया।

Q.76. इस काल की इटली की वास्तुकला और इस्लामी वास्तुकला की विशिष्टताओं की तुलना कीजिए।

उत्तर: 15वीं सदी में इटली की वास्तुकला को 'क्लासिकी' शैली कहा गया, जिसमें भव्य गोलाकार गुंबद, भवनों की आंतरिक सजावट और गोल मेहराबदार दरवाजे प्रमुख थे। दूसरी ओर, इस्लामी (अरब) वास्तुकला में विशाल भवनों पर बल्ब के आकार जैसे गुंबद, छोटी मीनारें, घोड़े के खुरों के आकार के मेहराब और मरोड़दार स्तंभ बनाए जाते थे। तुलनात्मक रूप से दोनों शैलियाँ कला, भव्यता और ज्यामितीय सुंदरता के मामले में एक-दूसरे के समान और बेहद प्रभावशाली प्रतीत होती थीं।

Q.77. इटली के नगरों ने क्यों पहली बार मानवतावादी विचारों का अनुभव किया?

उत्तर: इटली के नगरों में पूरे मध्यकाल के दौरान लोग यूनानी और रोमन विद्वानों के काम से परिचित थे। 14वीं सदी में यहाँ के लोगों ने प्लेटो और अरस्तू के ग्रंथों के अरबी अनुवादों को पढ़ना शुरू किया। इसके प्रभाव से प्राकृतिक विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान और औषधि विज्ञान जैसे व्यावहारिक विषय सामने आए। विश्वविद्यालयों में मानवतावादी विषय पढ़ाए जाने लगे, जिससे लोगों की सोच में धार्मिक अंधविश्वासों के स्थान पर मानव जीवन और तार्किकता को प्राथमिकता मिली।

Q.78. पुनर्जागरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: पुनर्जागरण अंग्रेजी शब्द 'Renaissance' का हिंदी रूपांतरण है, जिसका अर्थ विचारों की शांतिपूर्ण और अहिंसक क्रांति से है। 1400 ईस्वी से पहले का यूरोप अंधविश्वासों में डूबा हुआ था। पुनर्जागरण के कारण मध्यम वर्ग के बुद्धिजीवियों ने स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू किया, जिससे व्यापार, कला, विज्ञान और संस्कृति में अभूतपूर्व प्रगति हुई। इसी दौर में नए वैज्ञानिक अन्वेषण हुए तथा आधुनिक औषधियों, बिजली और नई मशीनों के अविष्कारों ने आधुनिक युग की मजबूत नींव रखी।



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Q.79. पुनर्जागरण की मुख्य विशेषताएँ बताएँ। / पुनर्जागरण में मानवतावाद का क्या अर्थ है?

उत्तर: पुनर्जागरण की मुख्य विशेषता अंधविश्वास के स्थान पर तर्क की प्रधानता स्थापित करना और राष्ट्रवाद का विकास करना था। इसमें 'मानवतावाद' का अर्थ पारलौकिक (परलोक) सुख के बजाय इहलौकिक (इसी जन्म के) सुख और मानव जीवन के महत्व को स्वीकार करना था। इसके कारण धार्मिक विचारों और विश्वासों को तर्क की कसौटी पर कसा जाने लगा, जिससे धर्म-सुधार आंदोलन शुरू हुए, व्यक्तिवाद को बढ़ावा मिला और आधुनिक विज्ञान के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

Q.80. यूरोप में पुनर्जागरण के कारणों का विवेचन कीजिए।

उत्तर: यूरोप में पुनर्जागरण की शुरुआत का सबसे बड़ा कारण 1453 ईस्वी में तुर्कों द्वारा पूर्वी रोम की राजधानी कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लेना था। इसके परिणामस्वरूप वहाँ रहने वाले ग्रीक (यूनानी) बुद्धिजीवी, विद्वान और कलाकार अपनी जान बचाकर अपनी मूल्यवान कृतियों के साथ इटली और रोम आ गए। उनके आने से यूरोप में यूनानी साहित्य, प्राचीन दर्शन, कला और जीवन मूल्यों का तेजी से प्रसार हुआ, जिसने लोगों की चेतना को जगाकर पुनर्जागरण को जन्म दिया।


Q.81. प्रति धर्म-सुधार आन्दोलन का क्या तात्पर्य है?

उत्तर: प्रति धर्म-सुधार आंदोलन (Counter-Reformation) का तात्पर्य उस आंदोलन से है जो प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार आंदोलन की प्रतिक्रिया में कैथोलिक चर्च द्वारा स्वयं को सुधारने के लिए शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य चर्च में व्याप्त बुराइयों और कुप्रथाओं को समाप्त कर उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पाना था। इसके परिणामस्वरूप पाप-मुक्ति पत्रों की बिक्री पूरी तरह बंद हो गई, पादरियों की नियुक्ति का आधार उनकी योग्यता को बनाया गया और इस आंदोलन ने प्रोटेस्टेंट धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


Q.82. धर्म-सुधार आन्दोलन में मार्टिन लूथर की भूमिका का परीक्षण करें।

उत्तर: जर्मन निवासी मार्टिन लूथर को धर्म-सुधार आंदोलन का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। उन्होंने कैथोलिक चर्च में फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध ऐतिहासिक क्रांति की और चर्च को राज्य के अधीन बताया, जिसके कारण पोप ने उन्हें धर्मच्युत कर दिया था। लूथर ने पोप के आज्ञा-पत्र को खुले बाजार में जलाकर विरोध किया और 'बाइबिल' का जर्मन भाषा में अनुवाद किया ताकि आम लोग उसे समझ सकें। उनके इस साहसिक कदम ने यूरोप में ईसाई धर्म को स्थायी रूप से दो संप्रदायों—कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में विभाजित कर दिया।


Q.83. पुनर्जागरणकालीन चित्रकारों के नाम एवं उनकी कृतियों का वर्णन करें।

उत्तर: पुनर्जागरण काल के सबसे प्रसिद्ध और महान चित्रकार लियोनार्डो दा विन्सी थे। उन्होंने दुनिया की सबसे चर्चित पेंटिंग्स 'मोनालिसा' (Monalisa) और 'द लास्ट सपर' (The Last Supper) जैसी कालजयी कृतियों की रचना की, जो आज भी कला जगत की अनमोल धरोहर हैं। उनके समकालीन एक और महान और अद्वितीय कलाकार माइकल एंजिलो थे, जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट चित्रकारी और शिल्पकला का परिचय देते हुए 'दि पाइटा' (The Pieta) नामक विश्व प्रसिद्ध और अद्भुत चित्र की रचना की थी।


Q.84. धर्म सुधार आन्दोलन के कारणों का वर्णन करें।

उत्तर: धर्म-सुधार आंदोलन के उदय के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण जिम्मेदार थे। पहला कारण पोप और उच्च पादरियों का अत्यधिक विलासितापूर्ण, ऐश्वर्यशाली और नैतिक रूप से गिरा हुआ जीवन था, जो आम जनता के बेहद कष्टपूर्ण जीवन से बिल्कुल विपरीत था। दूसरा बड़ा कारण चर्च के पवित्र पदों को धन लेकर बेचना, पादरियों द्वारा खुलेआम घूस लेना और लोगों को ठगने के लिए पाप-मुक्ति पत्रों (क्षमा पत्रों) की बिक्री जैसी भ्रष्ट गतिविधियां थीं, जिनकी सच्चाई अब जनसाधारण के सामने पूरी तरह उजागर हो चुकी थी।

Q.85. अफ्रीका की प्राचीन सभ्यताओं और संस्कृतियों का संक्षिप्त वर्णन करें।

उत्तर: प्राचीन अफ्रीका में कई समृद्ध सभ्यताओं का विकास हुआ। इनमें 'कुश साम्राज्य' प्रमुख था, जिसकी संस्कृति मिस्र से प्रभावित थी और बाद में यहाँ नूबिया तथा अक्सुम राज्यों का उदय हुआ। इसके अतिरिक्त, घाना, माली और बोर्नू जैसे क्षेत्रों में 'सूडानी सभ्यताएँ' फलीं-फूलीं, जहाँ केंद्रीय शासन मजबूत था और कारीगरों का स्थान उच्च था। साथ ही, कांगो और लुण्डा में 'बांटू सभ्यताएँ' विकसित हुईं, जहाँ कृषि, धातु विज्ञान, मछली पकड़ना और पशुपालन आजीविका के मुख्य साधन थे।

Q.86. 'गोल्ड रश' से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: 'गोल्ड रश' उस आपाधापी और हलचल भरे दौर को कहते हैं, जब 1840 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया राज्य में सोने के भंडार मिलने की पुष्टि हुई थी। इस खबर के बाद अपनी किस्मत रातों-रात बदलने की उम्मीद में यूरोप से हजारों की संख्या में लोग अमेरिका पहुँचने लगे। इस भारी प्रवासन और आर्थिक गतिविधि के कारण पूरे महाद्वीप में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ, जिसके चलते अमेरिका में 1870 और कनाडा में 1885 तक रेलवे लाइनों का निर्माण कार्य पूरा हुआ।

Q.87. एजटेक सभ्यता की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: एजटेक सभ्यता का विकास 12वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान मेक्सिको में हुआ था, जिन्हें 'टेनोका' भी कहा जाता था। इनकी पहली बड़ी उपलब्धि कृत्रिम तैरते हुए बागानों का निर्माण करना था, जिन्हें 'चिनाँपा' कहा जाता था। दूसरी बड़ी उपलब्धि एक अत्यंत विशाल और शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना थी, जो लगभग 38 प्रांतों में बंटा हुआ था। इसका शासन गवर्नरों और अधिकारियों द्वारा सुचारू रूप से चलाया जाता था तथा इस साम्राज्य की टेनोक्टिटलान और टेलाटेलोको नामक दो भव्य राजधानियाँ थीं।



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Q.88. संयुक्त राज्य अमेरिका में यूरोपीय लोग मूल निवासियों की भूमि को हड़पने के लिए क्या तर्क देते थे?

उत्तर: यूरोपीय लोग अमेरिका के मूल निवासियों की जमीन पर कब्जा करने के लिए कई अताार्किक तर्क देते थे. उनका पहला तर्क था कि मूल निवासी भूमि का पूरा उपयोग करना नहीं जानते, इसलिए जमीन पर उनका अधिकार नहीं होना चाहिए. दूसरा, वे मूल निवासियों को आलसी बताते थे. तीसरा, उनका कहना था कि ये लोग न तो बाजार के लिए उत्पादन करते हैं, न शिल्प कौशल का उपयोग करते हैं और न ही अंग्रेजी सीखते हैं.

Q.89. एजटेक लोगों के सामाजिक जीवन के विषय में आप क्या जानते हैं?

उत्तर: १२वीं शताब्दी में मेक्सिको की घाटी में बसे एजटेक लोगों का समाज योद्धाओं, व्यापारियों, कारीगरों, किसानों और दासों में विभाजित था. समाज में योद्धा, पुरोहित और अभिजात वर्ग को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त था. चिकित्सकों, अध्यापकों और कुशल शिल्पियों को भी आदरणीय माना जाता था. व्यापारियों को विशेष अधिकार प्राप्त थे और वे राजदूत व गुप्तचर के रूप में कार्य करते थे. इस व्यवस्था में राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था.

Q.90. इंका सभ्यता की तीन विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर: १४वीं-१५वीं शताब्दी में दक्षिणी अमेरिका में विकसित हुई इंका सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

राजनैतिक जीवन: इनका साम्राज्य बहुत बड़ा था, जो चार भागों में बंटा हुआ था और पूरी भूमि पर राजा का अधिकार होता था.

सामाजिक जीवन: समाज में राजा सर्वोच्च था, जिसके बाद कुलीन और पुरोहित आते थे, जबकि किसान और दस्तकार सबसे निचले पायदान पर थे.

आर्थिक जीवन व बुनियादी ढांचा: इनका मुख्य व्यवसाय मक्का, आलू और शकरकंदी की कृषि था. साथ ही, यहाँ बड़े शहरों और उन्हें जोड़ने वाली सड़कों का एक विकसित जाल बिछा हुआ था.

Q.91. एज़टेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।

एज़टेक सभ्यता मेक्सिको में विकसित हुई थी, जहाँ समाज योद्धाओं, व्यापारियों और कारीगरों में विभाजित था। उनकी उपलब्धियों में 'चिनाँपा' (झूलते बाग), चित्रलिपि, और 260 दिनों का धार्मिक पंचांग प्रमुख थे। इसके विपरीत, मेसोपोटामिया ने दुनिया को कुम्हार का चाक, शीशे के बर्तन, प्रथम लिखित कानून संहिता, और कीलाकार लिपि दी। मेसोपोटामियाई पंचांग चंद्रमा पर आधारित थे, और उन्होंने वास्तुकला में सबसे पहले मेहराब, गुंबद और स्तंभों का उपयोग किया था।

Q.92. माया लोगों की अति महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थीं?

माया सभ्यता की उपलब्धियाँ खगोल, गणित और वास्तुकला में उत्कृष्ट थीं। उन्होंने सौर गणना पर आधारित 365 दिनों का सटीक पंचांग बनाया, जिसमें 18 माह (प्रत्येक 20 दिन के) होते थे, जबकि शेष 5 दिनों को दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता था। गणित में वे 'शून्य' के उपयोग से परिचित थे। उनकी लिपि 'हेरोग्लिफिक्स' (चित्रलिपि) थी, जिसे वे भोजपत्रों पर लिखते थे। वे पिरामिड, वेधशालाएँ और भव्य मंदिर बनाने में भी बेहद निपुण थे।

Q.93. औद्योगिक क्रांति की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इंग्लैंड से शुरू हुई औद्योगिक क्रांति की मुख्य विशेषता यह थी कि इसके अंतर्गत वस्तुओं का निर्माण घरों के बजाय बड़े-बड़े कारखानों में मशीनों द्वारा भारी मात्रा में होने लगा। इसने कृषि, यातायात, संचार और व्यापार के क्षेत्रों में अभूतपूर्व परिवर्तन किए। इससे दुनिया की बढ़ती जनसंख्या की ज़रूरतें पूरी हुईं और इंसानी श्रम आसान हो गया, जिससे साधारण व्यक्ति का जीवन सुखमय बना। हालाँकि, इसने समाज में कई नई उलझनें भी पैदा कीं।

Q.94. औद्योगिक क्रांति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: औद्योगिक क्रांति का तात्पर्य 18वीं और 19वीं शताब्दी में हुए उन तकनीकी और आर्थिक बदलावों से है, जिन्होंने उत्पादन के पुराने ढंग को पूरी तरह बदल दिया। इसके तहत घरेलू कुटीर उद्योगों के स्थान पर आधुनिक कारखानों का जन्म हुआ और हाथ के काम की जगह वाष्प-इंजनों व मशीनों का उपयोग होने लगा। इस क्रांति ने मुख्य रूप से तीन चीज़ों को जन्म दिया—कारखाने, विशाल औद्योगिक नगर और एक नया पूँजीपति वर्ग, जिसने मानव इतिहास को व्यापक रूप से प्रभावित किया।


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Q.95. इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति का भारत पर बहुत बुरा और विनाशकारी प्रभाव पड़ा। इससे भारत के पारंपरिक सूती, ऊनी और रेशमी कपड़ों के निर्यात को भारी धक्का लगा। ब्रिटिश मिलों में बने सस्ते माल ने भारतीय बाजारों को पाट दिया, जिससे यहाँ के स्थानीय लघु उद्योग और दस्तकारियाँ पूरी तरह ठप हो गईं। बुनकर और कारीगर बेरोजगार होकर खेती पर निर्भर हो गए। इस प्रकार, पहले कपड़ों का निर्यात करने वाला आत्मनिर्भर भारत अब ब्रिटेन के लिए सिर्फ एक आयातक देश बनकर रह गया।

Q.96. औद्योगिक क्रांति के किन्हीं पाँच सामाजिक प्रभावों का उल्लेख करें।

उत्तर: औद्योगिक क्रांति के पाँच मुख्य सामाजिक प्रभाव इस प्रकार हैं: पहला, लंबे समय तक कारखानों में काम करने और काम की तलाश में बाहर जाने के कारण संयुक्त परिवार प्रथा टूटने लगी। दूसरा, रोजगार के अवसरों के चलते भौगोलिक और व्यावसायिक स्तर पर जनसंख्या का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण (पलायन) शुरू हुआ। तीसरा, औद्योगिक नगरों में गंदी बस्तियों की उत्पत्ति हुई जिससे जन-स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। चौथा, सामाजिक तनाव में वृद्धि और नैतिकता के स्तर में गिरावट आई। पाँचवाँ, कुछ वर्गों के जीवन-स्तर और मनोरंजन के साधनों का विकास हुआ।

Q.97. औद्योगिक क्रांति के आर्थिक प्रभावों का वर्णन करें।

उत्तर: औद्योगिक क्रांति के कारण आर्थिक क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए। कारखानों में मशीनों से भारी मात्रा में वस्तुओं के निर्माण के कारण उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और वस्तुओं की लागत में कमी आई। हालांकि, फैक्ट्रियों में बनी अपेक्षाकृत सस्ती और सुंदर वस्तुओं के बाजार में आने से पुराने घरेलू कुटीर उद्योगों का विनाश हो गया, जिससे बेरोजगारी की समस्या अत्यंत उग्र हो गई। इसके अलावा, राष्ट्रीय बाजारों को नया संरक्षण मिला, संयुक्त स्कन्ध कंपनियों का तेजी से विकास हुआ और ग्रामीण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन बढ़ा।

Q.98. यूरोप में औद्योगिक क्रांति के पाँच कारण लिखिए।

उत्तर: यूरोप में औद्योगिक क्रांति के उदय के पाँच प्रमुख कारण निम्नलिखित थे: पहला, पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हुआ जिससे नई खोजों और आविष्कारों को प्रोत्साहन मिला। दूसरा, व्यापार के अत्यधिक विस्तार के कारण बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाना अनिवार्य हो गया। तीसरा, ऊर्जा के स्रोत के रूप में पत्थर के कोयले की प्रचुर उपलब्धता थी। चौथा, वाणिज्यवाद के माध्यम से संचित किया गया अपार धन था। पाँचवाँ, भौतिकवाद से प्रभावित होकर मनुष्य द्वारा अपने जीवन को अधिक उन्नत और सुखमय बनाने का निरंतर प्रयास था।

Q.99. औद्योगिक क्रांति के इंग्लैंड में आरंभ होने के प्रमुख कारण बताएँ।

उत्तर: औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में शुरू होने के कई ठोस भौगोलिक और आर्थिक कारण थे। इंग्लैंड के पास ऊर्जा-उत्पादन के पर्याप्त प्राकृतिक साधन जैसे जल और कोयला प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे। साथ ही, इंग्लैंड के पास अपने विस्तृत उपनिवेशों के कारण उद्योगों के संचालन के लिए कच्चे माल की कोई कमी नहीं थी। यहाँ के व्यापारियों और पूँजीपतियों के पास उद्योगों में लगाने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध था, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि इंग्लैंड के कुशल वैज्ञानिकों ने समय-समय पर अनेक प्रकार के नए आविष्कार करके देश को आधुनिक मशीनें प्रदान की थीं।

Q.100. नहर और रेलवे परिवहन के सापेक्षिक लाभ क्या-क्या हैं?

उत्तर: परिवहन के क्षेत्र में नहरों और रेलवे के अपने विशेष लाभ थे। प्रारंभ में भारी और अधिक परिमाण वाले कोयले को खानों से शहरों तक ले जाने के लिए नहरों का निर्माण किया गया। सड़क मार्ग की तुलना में नहरों के रास्ते कोयला ले जाने में समय और आर्थिक खर्च दोनों ही बहुत कम लगते थे। उदाहरण के लिए, 1761 में इंग्लैंड में बनी पहली 'वर्सले कैनाल' के कारण कोयले की परिवहन लागत इतनी घट गई कि शहरों में कोयले की कीमत घटकर ठीक आधी रह गई थी। इसके बाद रेलवे ने इस परिवहन को और अधिक तीव्र तथा सुलभ बना दिया।

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