1. समय की शुरुआत से (From the Beginning of the Time)
Q.1. मानव की उत्पत्ति के विषय में प्रचलित दो सिद्धांतों के विषय में लिखें।
Or, आधुनिक मानव का उदय कहाँ हुआ ? V.V.I.
उत्तर ):आधुनिक मानव की शुरुआत कहाँ और कैसे हुई, इस पर विद्वानों के बीच दो मुख्य और अलग-अलग विचार (सिद्धांत) हैं:
विशेष नोट: आधुनिक मानव के सबसे पुराने जीवाश्म (Fossils) इथियोपिया के 'ओमो किविश' नामक स्थान पर मिले हैं, जो प्रतिस्थापन मॉडल को ज्यादा मजबूत बनाता है।
क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (Regional Continuity Model): इस विचार के अनुसार, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले आदिमानव धीरे-धीरे अलग-अलग गति से आधुनिक मानव के रूप में विकसित हुए। इसलिए आज अलग-अलग जगहों के इंसानों का रूप-रंग थोड़ा अलग दिखता है।
प्रतिस्थापन मॉडल (Replacement Model): इस विचार के अनुसार, सभी आधुनिक मनुष्यों की उत्पत्ति सबसे पहले केवल एक ही स्थान यानी अफ्रीका में हुई थी। वहाँ से वे धीरे-धीरे दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैल गए और उन्होंने पहले से रह रहे आदिमानवों की जगह ले ली।
Q.2. प्रारम्भिक मानवों को औजार निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी ? V.V.I.
उत्तर ):शुरुआती दौर में इंसानों के पास आज की तरह कोई सुख-सुविधाएं नहीं थीं। उन्हें जिंदा रहने और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए औजारों की सख्त जरूरत पड़ी, जैसे:
पेट भरने के लिए: जंगली जानवरों का शिकार करने, जमीन खोदकर कंदमूल (जड़ें) निकालने और पेड़ों से फल तोड़ने के लिए।
खुद को बचाने के लिए: जंगली और खतरनाक जानवरों के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए।
दैनिक कार्यों के लिए: शिकार किए गए जानवरों का मांस काटने, उनकी खाल उतारने (कपड़े बनाने के लिए) और पत्थरों को आपस में रगड़कर आग पैदा करने के लिए।
समय के साथ उन्होंने पत्थरों के बिना तराशे (अनगढ़) हथियारों से पशु-पक्षियों का शिकार करना और कच्चा मांस खाकर अपनी भूख मिटाना सीख लिया था।
Q.3. कार्बन डेटिंग क्या है ? V.V.I.
उत्तर):कार्बन डेटिंग (या कार्बन-14 विधि) विज्ञान का एक ऐसा तरीका है जिससे यह पता लगाया जाता है कि कोई पुरानी वस्तु (जैसे कोई प्राचीन लकड़ी, हड्डी या जीवाश्म) कितनी साल पुरानी है।
जब तक कोई जीव या पौधा जीवित रहता है, तब तक उसके शरीर में कार्बन-12 और कार्बन-14 बराबर मात्रा में बने रहते हैं।
लेकिन मृत्यु के बाद, शरीर में मौजूद कार्बन-12 तो उतना ही रहता है, पर कार्बन-14 धीरे-धीरे घटने (कम होने) लगता है।
कार्बन-14 की आधी उम्र (Half-life) 5568 + 30 वर्ष होती है, यानी इतने सालों में इसकी मात्रा घटकर आधी रह जाती है।
वैज्ञानिक इसी घटती हुई मात्रा को नापकर यह हिसाब लगा लेते हैं कि वह वस्तु कितनी पुरानी है। जिस चीज में कार्बन-14 जितना कम मिलता है, वह उतनी ही ज्यादा पुरानी (प्राचीन) मानी जाती है।
Q.4. प्राइमेट्स की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ? V.V.I.
उत्तर ):'प्राइमेट' स्तनधारी (दूध पिलाने वाले) जीवों के एक बहुत बड़े समूह के अंदर आने वाला एक छोटा उपसमूह (Subgroup) है, जिसमें बंदर, लंगूर और इंसान शामिल हैं। इनकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) इनके पूरे शरीर पर बाल होते हैं।
(ii) माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रंथियां (Mammary Glands) होती हैं।
(iii) इनके मुँह में अलग-अलग काम करने के लिए अलग-अलग प्रकार के दाँत होते हैं।
(iv) बच्चे के पैदा होने से पहले, वह काफी लंबे समय तक माता के गर्भ में पलता और विकसित होता है।
Q.5. मानव पृथ्वी पर कब और कैसे प्रकट हुआ ?
उत्तर ):
वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारी पृथ्वी लगभग 4000 मिलियन (4 अरब) वर्ष पुरानी है, लेकिन इस धरती पर इंसानों का आगमन बहुत बाद में हुआ।
मानव सबसे पहले प्लाइस्टोसीन (Pleistocene) यानी 'अतिनूतन काल' की शुरुआत में पृथ्वी पर आया।
अगर हम आधुनिक मानव—जिन्हें होमो सेपियंस (Homo Sapiens) या 'बुद्धिमान मानव' कहा जाता है—की बात करें, तो वे इस पृथ्वी पर लगभग 0.19 से 0.16 मिलियन वर्ष (यानी करीब 1 लाख 90 हजार से 1 लाख 60 हजार साल) पहले प्रकट हुए थे।
Q.6. मानव के द्वारा शिकार करना कब शुरू किया गया ?
उत्तर ):इंसानों द्वारा अपनी भूख मिटाने और जीवित रहने के लिए नियमित रूप से जानवरों का शिकार करना लगभग 50 लाख वर्ष पहले शुरू किया गया था।
2. लेखनकला और शहरी जीवन (Art of Writing and City Life)
Q.7. लेखनकला के क्षेत्र में मेसोपोटामिया की उपलब्धियों का वर्णन करें। V.V.I.
Or, मेसोपोटामिया में लेखनकला के विकास का विवरण दें।
उत्तर :मेसोपोटामिया के लोगों ने दुनिया को सबसे पहले लिखना सिखाया। उनकी लेखनकला का विकास इस प्रकार हुआ:
शुरुआत: शुरू में यहाँ के लोग चित्रों के जरिए अपनी बात लिखते थे (चित्र-लिपि), लेकिन चित्र बनाना कठिन था। इसलिए लगभग 4,000 ईसा पूर्व (BC) के आसपास उन्होंने टेढ़ी-मेढ़ी और खड़ी-पड़ी लाइनों वाले चिह्नों का इस्तेमाल शुरू किया।
क्यूनीफॉर्म लिपि (Cuneiform): इस नई लिखाई की शैली को 'क्यूनीफॉर्म' (या कीलाकार) लिपि कहा गया। इसमें 350 से भी ज्यादा संकेत या चिह्न होते थे।
लिखने का तरीका (मिट्टी की पट्टियाँ): वे लोग सरकंडे या बाँस की नुकीली कलम से गीली मिट्टी की पट्टियों (तख्तियों) पर लिखते थे। लिखने के बाद इन पट्टियों को धूप में सुखाया जाता था। कई बार इन्हें आग में भी पका लिया जाता था ताकि लिखावट पक्की हो जाए और हमेशा सुरक्षित रहे।
महत्व: खुदाई में मेसोपोटामिया से ऐसी लाखों मिट्टी की पट्टियाँ मिली हैं, जिनसे हमें वहाँ की पुरानी सभ्यता, राजाओं और व्यापार के बारे में बहुत जरूरी जानकारियां मिलती हैं।
Q.8. मेसोपोटामिया में साहित्य की उन्नति पर प्रकाश डालें।
Or, गिल्गामेश के महाकाव्य की विषय-वस्तु का वर्णन करें। V.V.I.
उत्तर):मेसोपोटामिया में केवल लिखना ही नहीं शुरू हुआ, बल्कि वहाँ बहुत ऊंचे दर्जे का साहित्य (किताबें और कविताएँ) भी लिखा गया:
विशाल पुस्तकालय: मेसोपोटामिया के प्रमुख शहरों जैसे तैल्लो (Tello), बेबीलोन और निनवेह की खुदाई में बड़े-बड़े पुस्तकालय (Libraries) मिले हैं। इनमें हजारों की संख्या में मिट्टी की किताबें मिली हैं, जिससे पता चलता है कि वहाँ के लोगों को पढ़ने-लिखने का बहुत शौक था।
साहित्य का खजाना: इन किताबों में प्राचीन कहानियाँ, महाकाव्य, गीत और धार्मिक कविताएँ भरी पड़ी हैं।
गिल्गामेश का महाकाव्य (Epic of Gilgamesh): यह मेसोपोटामिया का सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसने दुनिया भर में प्रसिद्धि पाई। इसकी तुलना अंग्रेजी के महान कवि मिल्टन के प्रसिद्ध महाकाव्य 'पैराडाइज लॉस्ट' (Paradise Lost) से की जाती है। इसमें राजा गिल्गामेश के साहस और उनकी जीवन की खोज की कहानी है।
Q.9. मेसोपोटामिया की सभ्यता में दो नदियों का महत्व बतायें। V.V.I.
Or, आरम्भिक सभ्यता के आविर्भाव में नदियों के महत्व को समझाइए।
उत्तर ):मेसोपोटामिया आज के समय के इराक देश का पुराना नाम है। 'मेसोपोटामिया' शब्द का असली मतलब ही होता है—"दो नदियों के बीच की भूमि"। यहाँ की सभ्यता दो प्रमुख नदियों—दजला (Tigris) और फरात (Euphrates)—के भरोसे ही फली-फूली। इन नदियों का महत्व निम्नलिखित है:
पानी की प्रचुरता और उपजाऊ जमीन: ये दोनों नदियाँ आर्मेनिया के पठार (पहाड़ों) से निकलकर दक्षिण-पूर्व की तरफ बहती हुई फारस की खाड़ी में गिरती हैं। पहाड़ों से बहकर आने के कारण ये अपने साथ बहुत उपजाऊ मिट्टी लेकर आती थीं, जिससे यहाँ की जमीन खेती के लिए बहुत अच्छी हो गई। इतिहासकारों ने इसे 'उपजाऊ अर्धचन्द्राकार प्रदेश' (Fertile Crescent) कहा है।
खेती और पशुपालन: नदियों के पानी और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहाँ गेहूँ, जौ और मटर जैसी फसलें बहुत ज्यादा पैदा होती थीं। साथ ही, यहाँ हरी घास की वजह से भेड़-बकरियों और अन्य मवेशियों के लिए बेहतरीन चारा मिल जाता था, जिससे पशुपालन को बढ़ावा मिला।
सभ्यता का जन्म: दजला और फरात नदियों के पानी से सिंचित इसी उपजाऊ हिस्से में दुनिया की सबसे पहली और सबसे पुरानी सभ्यता का जन्म हुआ, जिसे हम मेसोपोटामिया की सभ्यता कहते हैं। आज इस क्षेत्र को इराक देश कहा जाता है।
Q.10. नवपाषाणिक क्रांति क्या है? V.V.I.
उत्तर :इतिहास में 'नवपाषाण काल' को मानव सभ्यता के विकास का एक बहुत महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इस काल में इंसानों के जीवन में इतने बड़े बदलाव आए कि इसे "नवपाषाणिक क्रांति" कहा गया। ये मुख्य बदलाव निम्नलिखित थे:
कृषि की शुरुआत: इस काल का सबसे बड़ा और चमत्कारी आविष्कार खेती (कृषि) की शुरुआत थी। खेती के कारण इंसान अब एक जगह बस्तियां बनाकर रहने लगा और यहीं से सामाजिक जीवन शुरू हुआ।
बेहतर औजार और कुल्हाड़ी: अब पत्थरों के औजार पहले से ज्यादा सुंदर, सुडौल और धारदार बनाए जाने लगे। कुल्हाड़ी के आविष्कार से जंगलों को साफ करके खेती लायक जमीन बनाना आसान हो गया।
पहिए का आविष्कार: इसी समय बर्तन बनाने और सामान ढोने के लिए 'पहिए' का आविष्कार हुआ।
रहन-सहन में बदलाव: इंसान अब सन (जूट) और पटुआ के कपड़े पहनने लगा और लकड़ी काटकर पक्के घर बनाकर रहने लगा। इन क्रांतिकारी बदलावों के कारण ही इसे नवपाषाणिक क्रांति कहते हैं।
Q.11. मेसोपोटामिया के लोगों के आर्थिक जीवन का वर्णन कीजिए। V.V.I.
उत्तर :मेसोपोटामिया के लोगों की कमाई और आजीविका (आर्थिक जीवन) के मुख्य साधन निम्नलिखित तीन थे:
1. कृषि एवं पशुपालन: यहाँ के ज्यादातर लोग खेती करते थे क्योंकि यहाँ की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी। फसलों की सिंचाई के लिए वे नहरें और तालाब बनाते थे। खेती के साथ-साथ वे भेड़ और बकरियाँ भी पालते थे।
2. उद्योग-धंधे (काम-धंधे): यहाँ के लोग सूत कातना, कपड़े बुनना और उन्हें रंगना जानते थे। वे भेड़ के बालों और सन से कपड़े तैयार करते थे। इसके अलावा मिट्टी की मूर्तियाँ बनाना और सोने, चाँदी तथा लकड़ी के सुंदर सामान बनाना भी उनकी जीविका का साधन था।
3. विदेशी व्यापार: मेसोपोटामिया के लोग बहुत बड़े पैमाने पर दूसरे देशों से व्यापार करते थे। उनके पास बहुमूल्य पत्थर, लकड़ी, सोना और चाँदी जैसी धातुओं की कमी थी, जिसे वे विदेशों से मँगाते थे और बदले में अपने यहाँ पैदा होने वाला अनाज और कृषि सामग्री बाहर भेजते थे।
Q.12. मेसोपोटामिया में शहरों के उदय के क्या कारण थे? V.V.I.
(What was the reason behind the origin of Urban cities in Mesopotamia?)
उत्तर ):दुनिया में सबसे पहले शहरी जीवन की शुरुआत मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) से ही मानी जाती है। शहरों के बसने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
नदियों का उपजाऊ डेल्टा: दजला और फरात नदियों के बीच का दक्षिणी हिस्सा 'सुमेर' कहलाता था, जो बेहद उपजाऊ था।
लोगों का आकर बसना: इस उपजाऊ जमीन के लालच में आस-पास के बंजर और रेगिस्तानी इलाकों से अलग-अलग जातियों के लोग यहाँ आकर बसने लगे।
सभ्यता और नगरों का विकास: अधिक आबादी और बेहतरीन खेती के कारण यहाँ एक उच्च दर्जे की शहरी सभ्यता का जन्म हुआ। 'सुमेर' और 'अक्कद' यहाँ के दो सबसे बड़े शहर बने। इनके अलावा उर, निपुर, लगास, लारसा, किश और सूसा जैसे कई अन्य छोटे-छोटे शहर भी विकसित हुए।
Q.13. शहरीकरण के दो कारकों का वर्णन करें। V.V.I.
उत्तर :शहर उस जगह को कहते हैं जहाँ लोग सिर्फ भोजन उगाने (खेती) के अलावा अन्य व्यापारिक और प्रशासनिक काम भी करते हैं। प्राचीन काल में (जैसे मेसोपोटामिया और हड़प्पा में) शहरों के विकास के दो मुख्य कारण (कारक) थे:
(a) व्यापार और वाणिज्य का विकास: जब खेतों में जरूरत से ज्यादा अनाज (कृषि अधिशेष) पैदा होने लगा, तो लोग उस अनाज को दूसरे देशों में बेचकर व्यापार करने लगे। इस व्यापार और काम की तलाश में गाँवों के लोग आकर एक जगह जुटने लगे, जिससे धीरे-धीरे छोटे कस्बे बड़े शहरों में बदल गए।
(b) धार्मिक एवं शाही केन्द्रों का विकास: कई बार जहाँ बड़े और प्रसिद्ध मंदिर होते थे या जहाँ राजा का महल और सरकारी कामकाज (प्रशासन) होता था, उस जगह की सुरक्षा और महत्ता के कारण लोग चारों तरफ बस जाते थे, जिससे वे स्थान धीरे-धीरे शहर बन जाते थे।
Q.14. सुमेर सभ्यता के आरम्भिक नगरों पर प्रकाश डालें। V.V.I.
Or, मारी नगर के ऐश्वर्य का वर्णन करें।
उत्तर ):मेसोपोटामिया की सुमेर सभ्यता में 'मारी' (Mari) नाम का नगर अपनी भव्यता, धन-दौलत और ऐश्वर्य के लिए दुनिया भर में मशहूर था। इसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
भौगोलिक स्थिति: मारी नगर मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग में फरात नदी की ऊपर की धारा (उत्तर दिशा) पर स्थित था। यह लगभग 2000 ईसा पूर्व (BC) के बाद एक भव्य शाही राजधानी के रूप में सामने आया।
व्यापारिक महत्व (ऐश्वर्य का कारण): यह शहर एक ऐसे रास्ते पर स्थित था जहाँ से दक्षिण के मैदानी इलाकों और उत्तर के पहाड़ी इलाकों (तुर्की, सीरिया, लेबनान) के बीच भारी व्यापार होता था। लकड़ी, ताँबा, राँगा, तेल और मदिरा ले जाने वाले जहाज फरात नदी के रास्ते यहीं से गुजरते थे। मारी के अधिकारी इन जहाजों से टैक्स (कर) वसूलते थे, जिससे यह नगर बहुत अमीर और वैभवशाली बन गया।
Q.15. मारी स्थित जिमरीलिम के राजमहल का वर्णन कीजिए।
उत्तर:मारी नगर में वहाँ के राजा 'जिमरीलिम' का महल अपनी विशालता और सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर था। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
शाही निवास और कामकाज: यह विशाल राजमहल राजा और उनके परिवार का निवास स्थान था। साथ ही, यहीं से पूरे राज्य का शासन चलाया जाता था और यहाँ कीमती धातुओं के आभूषण भी बनाए जाते थे।
पर्यटन का केंद्र: यह महल इतना खूबसूरत था कि इसे देखने के लिए दूसरे देशों के राजा और लोग दूर-दूर से आते थे।
शाही भोजन: महल में राजा और उनके खास मेहमानों के लिए रोज़ तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन परोसे जाते थे।
बनावट और कमरे: यह पूरा महल सुंदर पत्थरों से जड़ा हुआ था। इसमें अंदर आने के लिए केवल एक मुख्य दरवाजा (प्रवेशद्वार) था जो उत्तर दिशा में था। यह महल 2.4 हेक्टेयर में फैला हुआ था और इसमें कुल 260 कमरे थे।
Q.16. शहरी जीवन का प्रारम्भ कहाँ हुआ? इस स्थान की भौगोलिक स्थिति बताइए।
उत्तर :
शुरुआत: दुनिया में सबसे पहले शहरी जीवन (City Life) की शुरुआत मेसोपोटामिया (Mesopotamia) में हुई थी।
भौगोलिक स्थिति: मेसोपोटामिया आज के इराक देश में स्थित है। यह क्षेत्र दो प्रसिद्ध नदियों—फरात (Euphrates) और दजला (Tigris) के बीच की उपजाऊ भूमि पर बसा हुआ था।
Q.17. मेसोपोटामिया सभ्यता की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए। V.V.I.
उत्तर ):
ज्ञान और समृद्धि: मेसोपोटामिया की सभ्यता अपनी धन-दौलत, बेहतरीन साहित्यों, गणित (Mathematics) और खगोलशास्त्र (Astronomy/अंतरिक्ष विज्ञान) की खोजों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है।
भाषा और क्षेत्र: इस सभ्यता की सबसे पहली पहचानी गई भाषा सुमेरी (Sumerian) थी। इसके शहरी और विकसित दक्षिणी हिस्से को 'सुमेर' तथा 'अक्कद' कहा जाता था।
Q.18. यूरोपवासियों के लिए मेसोपोटामिया क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर ):
धार्मिक जुड़ाव: ईसाइयों की पवित्र किताब बाइबिल के पहले भाग 'ओल्ड टेस्टामेंट' में मेसोपोटामिया का कई बार जिक्र आया है। इसलिए यूरोप के यात्री और विद्वान इस जगह को अपने पूर्वजों की भूमि (Purvajo ki bhumi) मानते हैं।
सुमेर का प्रमाण: ओल्ड टेस्टामेंट की 'बुक ऑफ जेनेसिस' में 'शिमर' शब्द का इस्तेमाल हुआ है, जिसका मतलब 'सुमेर' (ईंटों से बने शहरों की भूमि) से है। इसी वजह से यूरोप के लोगों की इसमें गहरी रुचि थी।
Q.19. मेसोपोटामिया के शहरी जीवन की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए। V.V.I.
उत्तर ):
अमीर और गरीब में अंतर (असमानता): मेसोपोटामिया के शहरों में एक अमीर/संभ्रांत वर्ग का उदय हो चुका था। समाज की ज्यादातर धन-दौलत और कीमती चीजें इसी छोटे से अमीर वर्ग के पास थीं। इसका सबूत 'उर' शहर के राजा-रानियों की कब्रों से मिलता है, जहाँ उनके साथ सोने-चाँदी और कीमती रत्न दफनाए गए थे। आम जनता की स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती।
एकल परिवार को महत्व: कानूनी कागजातों से पता चलता है कि वहाँ के समाज में 'मूल परिवार' (Nuclear Family यानी माता-पिता और उनके बच्चे) को ही आदर्श माना जाता था। शादी के बाद बेटा अपने माता-पिता के साथ ही रहता था।
Q.20. कृषि में दजला-फरात नदियों का क्या महत्व है? V.V.I.
उत्तर ):मेसोपोटामिया में खेती पूरी तरह इन दोनों नदियों पर निर्भर थी:
ये नदियाँ उत्तरी पहाड़ों से बहकर आते समय अपने साथ बारीक और बहुत उपजाऊ मिट्टी बहाकर लाती थीं।
जब भी इन नदियों में बाढ़ आती थी या जब इनके पानी को नहरों के जरिए खेतों तक ले जाया जाता था, तब वह उपजाऊ मिट्टी खेतों में जमा हो जाती थी, जिससे फसलें बहुत अच्छी और भारी मात्रा में पैदा होती थीं।
Q.21. वार्का शीर्ष क्या है?
उत्तर:
यह सफेद संगमरमर (Marble) को तराशकर बनाया गया एक स्त्री का सिर (मूर्ति) है, जो लगभग 3000 ईसा पूर्व (BC) में मेसोपोटामिया के 'उरुक' नगर में बनाया गया था।
कलाकारी के मामले में यह बहुत प्रसिद्ध है। इसकी आँखों और भौहों को सजाने के लिए नीले लाज़वर्द पत्थर, सफेद सीपी और काले डामर (बिटुमेन) की जड़ाई की गई थी।
Q.22. नैबोनिडस (Nabonidus) के बारे में जानकारी दें।
उत्तर:
नैबोनिडस स्वतंत्र बेबीलोन का आखिरी शासक (राजा) था।
उसके बारे में एक कहानी प्रसिद्ध है कि उर नगर के देवता ने उसे सपने में आकर आदेश दिया कि वह पुराने नगर की देखभाल का जिम्मा किसी महिला पुरोहित को सौंप दे। इसके बाद राजा ने अपनी बेटी को बिल्कुल उसी वेशभूषा से सजाकर महिला पुरोहित के पद पर बैठाया।
Q.23. बेबीलोन की बौद्धिक प्रगति का उल्लेख करें। V.V.I.
उत्तर:बेबीलोन शहर व्यापार के साथ-साथ ज्ञान, साहित्य और विज्ञान के मामले में बहुत आगे था:
लिपि: यहाँ के लोग कीलाकार लिपि का प्रयोग करते थे, जिसमें करीब 300 संकेत या चिह्न थे। इसी लिपि में यहाँ प्रसिद्ध 'गिल्गामेश महाकाव्य' लिखा गया।
गणित और गणना: यहाँ के लोग जोड़, घटाव, गुणा और भाग से अच्छी तरह परिचित थे। गिनती के लिए वे $1, 10, 100$ जैसी इकाइयों का प्रयोग करते थे।
कैलेंडर और खगोल: उनके एक साल में 360 दिन होते थे। वे चंद्रमा के आधार पर साल का हिसाब लगाते थे। इसके अलावा उन्होंने ज्योतिष, चिकित्सा (दवाइयाँ), धूपघड़ी और जलघड़ी का भी विकास कर लिया था।
Q.24. मेसोपोटामिया में ज्योतिष-शास्त्र व खगोल-विद्या की देनों का वर्णन कीजिए। V.V.I.
उत्तर:मेसोपोटामिया के लोगों ने अंतरिक्ष और समय को समझने में बहुत तरक्की की थी:
दिन-रात का बंटवारा: उन्होंने ही पूरे एक दिन को 24 घंटों में बांटने का नियम बनाया।
आकाश का विभाजन: उन्होंने पूरे आसमान को 12 भागों (राशियों) में बांटा और हर हिस्से को अलग नाम दिया।
तारों और ग्रहों का ज्ञान: वे सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की गति को गहराई से देखते थे। तारों को उनके दिए गए नाम आज भी उपयोग में लाए जाते हैं। उन्हें चंद्रमा के बढ़ते और घटते दिनों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) की भी पूरी जानकारी थी।
Q.25. मेसोपोटामिया के कैलण्डर (अथवा पंचांग) उनकी महत्वपूर्ण देन हैं, वर्णन करें। V.V.I.
उत्तर:
मेसोपोटामिया के लोगों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उनका पंचांग (कैलेंडर) था, जो पूरी तरह चंद्रमा की चाल (गति) पर आधारित था।
यद्यपि चंद्रमा पर आधारित होने के कारण उनका साल असली सौर वर्ष से 11 दिन छोटा होता था, लेकिन वे समय के बहुत पक्के थे। उन्होंने 1 दिन को 24 घंटों में, 1 घंटे को 60 मिनटों में और 1 मिनट को 60 सेकेंडों में विभाजित किया था।
अपने कैलेंडर की इस 11 दिन की कमी (अशुद्धि) को ठीक करने के लिए वे हर कुछ सालों के बाद कैलेंडर में एक एक्स्ट्रा (अतिरिक्त) महीना जोड़ देते थे, ताकि ऋतुओं का तालमेल सही बना रहे।
Q.26. मेसोपोटामिया की कीलाकार लिपि का वर्णन करें।
उत्तर:
मेसोपोटामिया की पुरानी लिखाई को 'कीलाकार लिपि' (Cuneiform) कहा जाता है, जिसे सबसे पहले सुमेर के लोगों ने बनाया था।
लिखने का तरीका: वे लोग कील या छैनी जैसे तेज औजार से गीली मिट्टी की पट्टियों पर दबाकर लिखते थे। लिखने के बाद इन पट्टियों को आग में पकाकर पक्का कर लिया जाता था। अपनी बात कहने के लिए वे चित्रों, चिह्नों और संकेतों का प्रयोग करते थे।
सफलता: 'हेनरी रॉलिन्सन' नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने 12 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस कठिन लिपि को पढ़ने में सफलता पाई, जिससे पूरी दुनिया मेसोपोटामिया के इतिहास को समझ सकी।
Q.27. असुरबनिपाल की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें। V.V.I.
उत्तर:
असुरबनिपाल (668-627 ईसा पूर्व) असीरियाई राजवंश का आखिरी और बहुत शक्तिशाली राजा था, जिसने अपने पिता से भी बड़ी सफलताएं हासिल कीं।
सैन्य सफलता: वह एक पराक्रमी योद्धा था जिसने संपूर्ण पश्चिमी एशिया में अपना दबदबा बनाया। उसने लीडिया और थिब्स को जीतकर वहाँ से भारी मात्रा में सोना-चाँदी लूटा और उत्तरी मिस्र पर भी विजय पाई।
साहित्य प्रेमी: एक क्रूर विजेता होने के साथ-साथ वह विद्वानों का बहुत आदर करता था। उसने अपनी राजधानी 'निनवे' में एक बहुत बड़ा पुस्तकालय (Library) बनवाया था, जहाँ उसने इतिहास, विज्ञान और धर्म से जुड़ी हजारों मिट्टी की ज्ञानवर्धक पट्टियों को इकट्ठा करके सुरक्षित रखवाया था।
Q.28. रोमन सरकार ने चाँदी में मुद्रा को ढालना क्यों बंद किया? V.V.I.
उत्तर:
चाँदी की कमी: रोमन सरकार ने चाँदी के सिक्के बनाना इसलिए बंद कर दिया क्योंकि स्पेन में मौजूद चाँदी की खदानें खत्म हो चुकी थीं और सरकार के पास चाँदी का स्टॉक खाली हो गया था। चाँदी बहुत कीमती और दुर्लभ हो गई थी।
तकनीक का विकास: आधुनिक समय में नई तकनीक और धातु विज्ञान (Metallurgy) के विकास के कारण अब एल्युमिनियम, ताँबे और अन्य मिश्रित धातुओं (Alloys) के सिक्के बनाए जाने लगे हैं।
Q.29. 'रोम साम्राज्य में सांस्कृतिक विभिन्नता का अनुपम मिश्रण था।' स्पष्ट कीजिए। V.V.I.
उत्तर:रोम साम्राज्य बहुत बड़ा था और वहाँ अलग-अलग संस्कृति के लोग मिल-जुलकर रहते थे, जिसे हम निम्नलिखित बातों से समझ सकते हैं:
विविधता: इस साम्राज्य में धार्मिक संप्रदायों, स्थानीय देवी-देवताओं, पहनावे, खान-पान, सामाजिक संगठनों और बस्तियों के कई अलग-अलग रूप दिखाई देते थे। वहाँ बोलने के लिए भी कई तरह की भाषाएँ इस्तेमाल होती थीं।
अलग-अलग भाषा क्षेत्र: इसके आस-पास के क्षेत्रों में अलग-अलग भाषा-समूह थे; जैसे निकटवर्ती पूर्व-क्षेत्र में 'अरामाइक', मिस्र में 'कॉप्टिक', उत्तरी अफ्रीका में 'प्यूनिक' और 'बेरबेर', तथा स्पेन और उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में 'केल्टिक' भाषा बोली जाती थी।
मौखिक भाषाएँ: इनमें से बहुत सी भाषाएँ केवल बोली जाती थीं, उनकी कोई लिखाई (लिपि) नहीं थी। वे तब तक सिर्फ मौखिक रहीं जब तक उनके लिए अक्षरों की खोज नहीं हुई। उदाहरण के लिए, अर्मीनियाई भाषा को पाँचवीं शताब्दी में जाकर लिखना शुरू किया गया।
लैटिन का प्रभाव: तीसरी सदी के मध्य तक बाइबिल का अनुवाद 'कॉप्टिक' भाषा में हो चुका था। कई जगहों पर 'लैटिन' भाषा के फैलने से स्थानीय भाषाएँ कम होने लगीं, जैसे केल्टिक भाषा का लिखना प्रथम सदी के बाद बंद हो गया।
Q.30. रोमन साम्राज्य को तीन महाद्वीपों का साम्राज्य क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
विशाल फैलाव: रोमन साम्राज्य का आकार बहुत बड़ा था। इसकी सीमाएं दुनिया के तीन बड़े महाद्वीपों—यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया तक फैली हुई थीं।
प्राकृतिक सीमाएं: इसके उत्तर में साम्राज्य की सीमा का निर्धारण 'राइन' और 'डेन्यूब' नाम की दो बड़ी नदियाँ करती थीं। इसके दक्षिण में 'सहारा' नाम का बहुत बड़ा रेगिस्तान था। इसके भूमध्यसागर और उसके आस-पास के सभी इलाकों पर रोम का पूरी तरह अधिकार था। तीन महाद्वीपों में फैले होने के कारण ही इसे यह नाम मिला।
Q.31. जस्टीनियन (Justinian) के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
परिचय: जस्टीनियन पूर्वी रोमन साम्राज्य (बायजेंटाइन) का एक बहुत प्रसिद्ध और महान सम्राट था, जिसकी राजधानी कॉन्सटेंटिनोपल थी।
खूबियाँ: वह एक बेहतरीन मैनेजर (प्रबंधकर्ता), महान विजेता और एक विशाल भवन-निर्माता था।
कानून निर्माता (Law Giver): वह इतिहास में अपने कानूनों के संग्रह के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। उसने रोमन कानूनों को इकट्ठा करवाकर 'कॉर्पस जुरिस सिविलिस' (Corpus Juris Civilis) नाम का एक संग्रह तैयार करवाया।
महत्व: इसके चार भाग हैं जिनमें रोमन कानून की हर छोटी-बड़ी बात को साफ-साफ लिखा गया है। जस्टीनियन के ये कानून आज भी बहुत लोकप्रिय हैं और दुनिया के कई देशों के कानूनों की आधारशिला (नींव) माने जाते हैं।
Q.32. कॉन्सटेंटाइन के प्रमुख सुधारों का वर्णन करें।
उत्तर:
सम्राट कॉन्सटेंटाइन के मुख्य सुधारों को इस प्रकार समझा जा सकता है—
मौद्रिक सुधार (पैसों से जुड़ा सुधार): कॉन्सटेंटाइन का सबसे प्रमुख सुधार पैसों के क्षेत्र में था। उसने चाँदी के सिक्कों की जगह 'सॉलिडस' (Solidus) नाम का एक नया सिक्का चलाया। यह सिक्का शुद्ध सोने का बना होता था, जो व्यापार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत सफल साबित हुआ।
Q.33. रोम में दासों की दशा का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर:रोम साम्राज्य में दासों (गुलामों) की संख्या बहुत ज्यादा थी और उनका जीवन बेहद कष्टदायक था:
गिनी जाती थी बड़ी संख्या: प्राचीन यूनान और रोम में दासों को समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा माना जाता था। रोम साम्राज्य के बढ़ने के साथ-साथ गुलामों की संख्या इतनी बढ़ गई कि समाज में उनकी स्थिति बहुत कमजोर हो गई।
दास कैसे बनते थे: युद्ध में बंदी बनाए गए लोगों या जो लोग अपना कर्ज नहीं चुका पाते थे, उन्हें जबरन दास बना लिया जाता था। उनसे दिन-रात बिना थके काम लिया जाता था।
कठिन काम और अत्याचार: दासों से हर तरह के छोटे-बड़े काम लिए जाते थे, जैसे—खेती करना, खदानों में खुदाई करना, सड़कें बनाना और जहाजों पर भारी काम करना। उन्हें समाज में कोई अधिकार नहीं थे। मनोरंजन के लिए कई बार उन्हें खूंखार जंगली जानवरों के सामने मरने के लिए छोड़ दिया जाता था।
पतन का कारण: दासों पर होने वाले इस जुल्म के कारण ग्रीस और रोम के अमीर लोग पूरी तरह भोग-विलास (ऐश-आराम) में डूब गए, जिससे आगे चलकर सेना कमजोर हुई और साम्राज्य का नैतिक पतन हो गया।
Q.34. यूनानी रोमन संस्कृति के कौन-कौन तत्व 14वीं एवं 15वीं शताब्दी में पुनः स्थापित हुए।
उत्तर:
इतिहासकार बर्कहार्ट के अनुसार, 14वीं और 15वीं शताब्दी में यूरोप में जो नए बदलाव आए, उन्हें 'पुनर्जागरण' (Renaissance) कहा जाता है। इस काल में पुरानी यूनानी और रोमन संस्कृति की कई अच्छी बातें फिर से लौट आईं।
मानसिक आजादी और विचार: मध्यकाल के समाज में जो धार्मिक कट्टरता और पाबंदियां थीं, लोग उनके विरोधी होने लगे। पेरिस और ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई जहाँ यूनान के पुराने ग्रंथों, दर्शन (Philosophy) और नैतिकता की नए सिरे से खोज की गई।
तर्क और स्वतंत्रता: लोगों में स्वतंत्र रूप से सोचने, चिंतन करने और मनन करने की आदत दोबारा शुरू हुई। सम्राट फ्रेडरिक-II जैसे शासकों ने भी इस बौद्धिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का समर्थन किया, जो पुनर्जागरण काल की मुख्य पहचान बनी।
Q.35. यहूदी धर्म का उदय कब हुआ? इसके मुख्य सिद्धांत क्या थे?
उत्तर:
उदय: यहूदी धर्म (Judaism) दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है। इस धर्म की शुरुआत ईसा पूर्व (BC) की 13वीं शताब्दी में फिलिस्तीन में हुई थी, जब ईश्वर ने हजरत मूसा के माध्यम से इस धर्म की महत्वपूर्ण शिक्षाएं लोगों को दी थीं।
यहूदी धर्म के मुख्य सिद्धांत (नियम):
एक ईश्वर में विश्वास: यहूदी लोग केवल एक ही ईश्वर (भगवान) को मानते हैं। हजरत मूसा ने एक ही ईश्वर की पूजा करने की शिक्षा दी थी।
ईश्वर का नाम 'यहवे' या 'जेहोवा': वे ईश्वर को 'यहवे' या 'जेहोवा' कहकर पुकारते हैं और उनका मानना है कि ईश्वर अपनी प्रजा (इंसानों) से बेहद प्रेम करता है।
सदाचार का उपदेश: इस धर्म में आपस में प्रेम, दया, ईमानदारी और नेक रास्ते पर चलने की सीख दी गई है।
Q.36. क्लियोपेट्रा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
परिचय: क्लियोपेट्रा मिस्र (Egypt) के 'टॉल्मी वंश' की एक बेहद प्रसिद्ध राजकुमारी और शासक थी।
सुंदरता और प्रभाव: वह दिखने में बहुत ही सुंदर और बुद्धिमान थी। जब रोम के महान सेनापति 'जूलियस सीजर' अलेक्जेंड्रिया पहुँचे, तो क्लियोपेट्रा से मुलाकात के बाद वे उसकी सुंदरता और बातचीत के तरीके से बेहद प्रभावित हुए और उससे प्रेम करने लगे। इतिहास में वह अपनी राजनीतिक सूझबूझ के लिए भी जानी जाती है।
Q.37. रोमन समाज पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:रोमन साम्राज्य के लोगों के सामाजिक जीवन और रहन-सहन को ध्यान से देखें तो उसमें कई आधुनिक लक्षण दिखाई देते थे। इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. दो मुख्य वर्ग (अमीर और गरीब): रोमन समाज मुख्य रूप से दो बड़े हिस्सों में बंटा हुआ था—अमीर वर्ग और गरीब वर्ग। अमीर लोग आलीशान और सुंदर भवनों में रहते थे, जिन्हें पेट्रीशियन (Patrician) कहा जाता था। वहीं दूसरी तरफ गरीब और आम जनता थी, जिसमें कारीगर और मजदूर शामिल थे, इन्हें प्लीबियन (Plebians) कहा जाता था।
2. महिलाओं की स्थिति और विवाह: गणतंत्र काल (प्रथम शताब्दी ई.पू.) तक समाज में महिलाओं की स्थिति काफी अनोखी थी। शादी के बाद महिला अपनी संपत्ति अपने पति को नहीं सौंपती थी, बल्कि उस पर महिला के अपने पिता के परिवार (पैतृक परिवार) का ही पूरा अधिकार रहता था। महिला को अपने पिता की संपत्ति में पूरा हक मिलता था। शादी के समय जो दहेज दिया जाता था, वह शादी के दौरान पति के काम आता था।
Q.38. रोमन साम्राज्य के पतन में सेना की क्या भूमिका थी?
उत्तर:रोमन साम्राज्य के बिखरने और खत्म होने के पीछे वहाँ की सेना की एक बड़ी भूमिका थी:
भाड़े के सैनिक: रोमन साम्राज्य बहुत से देशों में फैला हुआ था और इस पर कब्जा बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ी सेना की जरूरत थी। शुरुआत में तो सेना में रोम के अपने नागरिक होते थे, लेकिन बाद में सेना का आकार बढ़ाने के लिए बाहर के देशों (विदेशी) सैनिकों को भर्ती किया जाने लगा।
वफादारी की कमी: ये सैनिक रोम देश के प्रति वफादार होने के बजाय ऐश-आराम, धन-दौलत और अपने सेनापतियों के फायदे के बारे में ज्यादा सोचते थे।
साम्राज्य का पतन: जब बाहरी आक्रमणकारियों ने रोम पर हमला किया, तो इस कमजोर और अनुशासनहीन सेना ने घुटने टेक दिए। वे मिलकर आक्रमणकारियों का सामना नहीं कर पाए, जिससे इतने बड़े रोमन साम्राज्य का पूरी तरह सर्वनाश हो गया।
Q.39. सीनेट किसे कहते हैं?
उत्तर:
अर्थ: रोम साम्राज्य में धनी, प्रभावशाली और कुलीन (ऊंचे वंश के) लोगों का एक छोटा सा समूह होता था जो सरकार चलाने और फैसले लेने में राजा की मदद करता था, इसी समूह को 'सीनेट' (Senate) कहा जाता था।
योग्यता: सीनेट की सदस्यता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती थी कि व्यक्ति कितना अमीर है और उसका जन्म किस ऊंचे परिवार में हुआ है। इस व्यवस्था में आम जनता की योग्यता या गुणों की बजाय केवल ऊंचे जन्म, धन-दौलत और समाज में प्रतिष्ठा (रुतबे) को ही सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था।
Q.40. रोम में गणतंत्र कब तक चला? इसे किस सम्राट द्वारा समाप्त किया गया?
उत्तर:
गणतंत्र का समय: रोम में गणतंत्र (Republic शासन) 509 ईसा पूर्व (BC) से लेकर 27 ईसा पूर्व (BC) तक चला था।
किसने समाप्त किया: 27 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर के दत्तक पुत्र 'ऑक्टेवियन' (जस्टिस सीजर का पोता/पुत्र) ने इस गणतंत्र व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया। सत्ता अपने हाथ में लेकर वह 'अगस्तस' के नाम से रोम का पहला सम्राट (राजा) बना।
Q.42. रोम में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर:रोम के समाज में महिलाओं या स्त्रियों की स्थिति काफी मजबूत और स्वतंत्र थी, जिसे इन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
संपत्ति का अधिकार: शादी के बाद महिला की संपत्ति उसके पति को ट्रांसफर (हस्तांतरित) नहीं होती थी। महिला का अपनी पैतृक (पिता की) संपत्ति पर पूरा कानूनी हक बना रहता था। पिता की मृत्यु के बाद वह उस संपत्ति की स्वतंत्र मालिक बन जाती थी, जिससे उसे अच्छी आर्थिक आजादी मिलती थी।
आसान तलाक: उस समय कानूनन तलाक लेना बहुत आसान था। पति या पत्नी में से कोई भी एक, सिर्फ अलग रहने या संबंध तोड़ने के इरादे की सूचना देकर आसानी से तलाक ले सकता था।
शादी और परिवार: आमतौर पर शादियां माता-पिता द्वारा तय (नियोजित) की जाती थीं। लड़के-लड़कियों की शादी की उम्र में काफी अंतर होता था (लड़के बड़े और लड़कियां छोटी उम्र की होती थीं)। हालांकि, घर-परिवार के मामलों में फिर भी पति का ही दबदबा (वर्चस्व) ज्यादा रहता था।
Q.43. प्राचीन रोम की प्रशासन व्यवस्था की विवेचना करों। V.V.I.
Or, रोम के प्रशासन में सीनेट का महत्व बतावें।
उत्तर:प्राचीन रोम की शासन व्यवस्था मुख्य रूप से तीन अंगों के इर्द-गिर्द घूमती थी:
1.राजा व सभा (Assembly): रोम की प्राचीन सभ्यता की शुरुआत 1000 ईसा पूर्व (BC) के आस-पास से मानी जाती है। शुरुआत में यहाँ एक राजा होता था और एक 'सभा' (Assembly) होती थी, जिसमें सभी बालिग पुरुष नागरिक शामिल होते थे।
2. सीनेट (Senate): यह रोम के सबसे धनी और ऊंचे कुलीन परिवारों के सदस्यों का एक शक्तिशाली समूह था। सीनेट के पास राजा के प्रस्तावों को खारिज (अस्वीकार) करने का पूरा अधिकार था, इसलिए राजा पर सीनेट का बहुत बड़ा नियंत्रण रहता था। आगे चलकर (छठी सदी ईसा पूर्व) इसी सीनेट ने राजा का पद पूरी तरह समाप्त कर दिया और रोम में गणतंत्र की स्थापना की।
3. कौंसल (Consul): गणतंत्र की शुरुआत के बाद पूरे रोम का शासन चलाने के लिए दो मुख्य अधिकारी चुने जाते थे, जिन्हें 'कौंसल' कहा जाता था। दो कौंसल मिलकर शासन संभालते थे ताकि कोई एक व्यक्ति तानाशाह न बन सके। सौ सालों के बाद राजा का पद हटने पर वहाँ यह गणतंत्र व्यवस्था काफी मजबूत रही।
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