कक्षा 6 विज्ञान - अध्याय 1: "विज्ञान का अनूठा संसार"
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (कक्षा 6)
प्र. 1. विज्ञान क्या है?
उत्तर: विज्ञान देखने, सोचने, समझने और कार्य करने का एक सशक्त माध्यम है जो विश्व के रहस्यों की परतें खोलता है।
प्र. 2. नए-नए खोजों और जानने की इच्छा के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ क्या है?
उत्तर: जानने और समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ 'जिज्ञासा' है। इसी जिज्ञासा के कारण मनुष्य अपने आस-पास के परिवेश के बारे में प्रश्न पूछता है और नई खोजें करता है।
प्र. 3. इस पाठ में प्राकृतिक घटनाओं के कौन-से उदाहरण दिए गए हैं जिन्हें विज्ञान द्वारा समझा जाता है?
उत्तर:
रात के आकाश में तारों का चमकना।
किसी फूल का खिलना।
प्र. 4. हम बचपन से ही अपने आस-पास के परिवेश को जानने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर: हम बचपन से ही अपने आस-पास के क्षेत्र के बारे में खोजने लगते हैं और नई-नई बातें जानने के लिए प्रश्न पूछने लगते हैं।
प्र. 5 विज्ञान को किस तरह की पहेली जैसा बताया गया है?
उत्तर: विज्ञान को एक व्यापक और अंतहीन जिग्सॉ पहेली (Jigsaw Puzzle) जैसा बताया गया है, जिसमें हर नई खोज पहेली का एक नया टुकड़ा जोड़ देती है।
प्र. 6. क्या विज्ञान की खोजों की कोई सीमा होती है? क्यों?
उत्तर: नहीं, विज्ञान की खोजों की कोई सीमा नहीं होती, क्योंकि ज्ञान का हर नया भाग हमें हमेशा नए प्रश्नों और नई खोजों की ओर ले जाता है।
प्र. 7. वैज्ञानिक खोजों में गलतियाँ सुधारने का क्या महत्व है?
उत्तर: कभी-कभी पहेली का एक टुकड़ा गलत स्थान पर जुड़ जाता है। जब नई खोजें होती हैं, तो उस टुकड़े को सही स्थान पर ले जाया जाता है, जिससे विश्व के बारे में हमारी समझ और अधिक स्पष्ट और बेहतर होती है।
प्र. 8. अभूतपूर्व खोजें किन-किन स्थानों से संबंधित हो सकती हैं?
उत्तर: अभूतपूर्व खोजें मरुस्थल, समुद्र-तट, समुद्र के भीतर, रसोईघर, खेल के मैदान से लेकर अंतरिक्ष (मंदाकिनी/आकाशगंगा) तक फैली हो सकती हैं।
1. पृथ्वी और उसकी अद्भुत विविधता
जीवन का एकमात्र ग्रह: हमारी पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन संभव है।
पर्यावरण की सुरक्षा: पृथ्वी के पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जीव-जंतुओं और पौधों का विकास:
पृथ्वी पर पौधों और जंतुओं की एक अद्भुत विविधता पाई जाती है।
उदाहरण के लिए, एक छोटा सा बीज बढ़कर एक पौधा बनता है, और एक इल्ली (कैटरपिलर) बढ़कर एक सुंदर तितली बन जाती है।
2. भोजन और शरीर की वृद्धि
भोजन की आवश्यकता: हमारे शरीर के विकास (वृद्धि) और स्वस्थ रहने के लिए भोजन बहुत ज़रूरी है।
भारत में भोजन की विविधता: भारत जैसे विशाल देश में अलग-अलग प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन (पकवान) और उन्हें बनाने की विविध विधियाँ पाई जाती हैं।
मुख्य प्रश्न जिस पर विचार करना है:
"ये सभी व्यंजन (भोजन) किससे बनते हैं और हम इनके बारे में कैसे पता करेंगे?"
(यही प्रश्न हमें आगे के पाठों में भोजन के घटकों और स्रोतों को समझने के लिए प्रेरित करता है।)
अध्याय 2: सजीव जगत में विविधता
क्रियाकलाप 2.1 — आइए, खोजें और अंकित करें
प्रश्न 1: क्या आपने कभी अपने आस-पास विद्यमान विभिन्न प्रकार के पौधों और जंतुओं का अवलोकन किया है? अपने अवलोकनों को अपने मित्रों और शिक्षक के साथ साझा कीजिए और उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
हाँ, हमने अपने घर, विद्यालय के प्रांगण और आस-पास के पार्कों में विभिन्न प्रकार के पौधों और जीव-जंतुओं को देखा है।
पौधे: हमने छोटे-छोटे घास के पौधे, फूल वाले पौधे (जैसे गुलाब, गेंदा), झाड़ियाँ और बड़े वृक्ष (जैसे आम, नीम, बरगद) देखे हैं।
जंतु: हमने विभिन्न प्रकार के कीट (जैसे तितली, चींटी), पक्षी (जैसे गौरैया, कबूतर, कौआ) और पशु (जैसे कुत्ता, गाय, गिलहरी) देखे हैं।
चर्चा: इन सभी जीवों का आकार, रंग, रहने का स्थान और भोजन का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग होता है।
प्रश्न 2: प्रकृति की सैर (नेचर वॉक) के दौरान आप किन-किन मुख्य बातों का ध्यान रखेंगे?
उत्तर:
प्रकृति की सैर के दौरान हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
सुरक्षा एवं सम्मान: किसी भी पेड़-पौधे, पत्ती या फूल को अकारण न तोड़ें तथा किसी जीव-जंतु को नुकसान न पहुँचाएँ।
सावधानीपूर्वक अवलोकन: केवल ध्यान से देखें, सुनें और समझें। अज्ञात कीटों या पौधों को सीधा न छूएँ।
सामग्री साथ रखें: अपनी नोटबुक, पेन/पेंसिल और पानी की बोतल साथ रखें।
नोट करना: जो भी नए पौधे, पक्षी या जंतु दिखें, उनके नाम, रंग, आकार और गतिविधियों को अपनी नोटबुक में लिखें।
प्रश्न 3: सुभाषित श्लोक का अर्थ लिखिए:
"छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे ।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव ॥"
उत्तर:
अर्थ: जिस प्रकार बड़े वृक्ष स्वयं कड़ी धूप में खड़े रहकर दूसरों को छाया प्रदान करते हैं और उनके फल भी दूसरों के लिए होते हैं (स्वयं के लिए नहीं), ठीक उसी प्रकार श्रेष्ठ एवं अच्छे मनुष्य भी स्वयं कठिनाइयाँ सहकर दूसरों का कल्याण और भलाई करते हैं।
तालिका 2.1 — हमारे पास-पास उपस्थित विभिन्न पौधों का अवलोकन
क्रम सं. | स्थानीय नाम | तना | पत्तियाँ (पत्तियों की आकृति या अभिविन्यास) | फूल | कोई अन्य अवलोकन एवं विशेषताएँ |
1. | सामान्य घास | कोमल और पतला | तने के भिन्न बिंदुओं से एकांतरी रूप से एक पत्ता निकलता है। | हरा/छोटा | हरी पत्तियाँ |
2. | तुलसी | कठोर और पतला | पत्तियाँ जोड़ी में एक-दूसरे के सम्मुख व्यवस्थित होती हैं। | गुलाबी-बैंगनी | तीव्र सुगंध, औषधीय पौधा |
3. | गुड़हल | कठोर | अंडाकार और किनारे दंतुरित (कटे हुए) | लाल / बड़ा | पंखुड़ियाँ बड़ी और चमकदार |
4. | नीम | कठोर और मोटा | संयुक्त पत्तियाँ, किनारे आरी जैसे | सफेद / छोटा | पत्तियाँ स्वाद में कड़वी, औषधीय गुण |
5. | अन्य (जैसे: आम) | बहुत कठोर और मोटा | लंबी, भालाकार और चिकनी सतह वाली | हल्का पीला / छोटा | फल मीठा और रसीला होता है |
तालिका 2.2 — हमारे पास-पास विद्यमान जंतुओं की विभिन्न विशेषताओं का अवलोकन
जंतुओं के नाम (स्थानीय नाम) | उनके रहने का स्थान | भोजन | गति के प्रकार | अन्य कोई अवलोकन एवं विशेषताएँ |
कौआ | वृक्ष | कीट, फल, बचा-खुचा भोजन | उड़ना और चलना | चोंच में टहनी लिए हुए |
चींटी | मिट्टी एवं बिलों में रहती हैं | पत्तियाँ, बीज और कीट | चलना | छह पाद (पैर) होते हैं |
गाय | गौशाला / स्थल (भूमि) | घास, पत्तियाँ, भूसा | चलना और दौड़ना | चार पैर और एक लंबी पूंछ होती है |
अन्य (जैसे: मछली) | जल (पानी) | जलीय पौधे और छोटे जीव | तैरना | श्वसन के लिए गलफड़े (Gills) होते हैं |
अध्याय के मुख्य प्रश्न उत्तर (तालिका के नीचे दिए गए प्रश्नों के आधार पर):
प्रश्न 1: आपने जिन पौधों का अवलोकन किया है, उनमें क्या समानताएँ और क्या भिन्नताएँ पाईं?
समानताएँ: सभी पौधों में तना, पत्तियाँ और जड़ें होती हैं तथा वे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं।
भिन्नताएँ:
कुछ पौधों के तने कोमल होते हैं (जैसे घास), जबकि कुछ के बहुत कठोर और मोटे (जैसे नीम, आम)।
पत्तियों के आकार, किनारे और तने पर जुड़ने का तरीका अलग-अलग होता है।
फूलों के रंग, आकार और सुगंध में अंतर होता है।
प्रश्न 2: तालिका 2.2 में आपने जिन जंतुओं का अवलोकन करके अंकित किया है, उनमें क्या समानताएँ और क्या भिन्नताएँ हैं?
समानताएँ: सभी जंतु सजीव हैं, भोजन करते हैं, गति (चलना, उड़ना, तैरना) करते हैं और वृद्धि करते हैं।
भिन्नताएँ:
आवास: कुछ भूमि पर रहते हैं (गाय), कुछ पेड़ों पर (पक्षी), कुछ मिट्टी/बिलों में (चींटी) और कुछ जल में (मछली)।
भोजन: कुछ केवल पेड़-पौधे खाते हैं (शाकाहारी), कुछ अन्य जीवों को खाते हैं (मांसाहारी) और कुछ दोनों खाते हैं (सर्वाहारी)।
गतिविधि: पक्षी उड़ते हैं, थलचर चलते/दौड़ते हैं और जलचर तैरते हैं।
1. क्रियाकलाप 2.2 — आइए, महत्व समझें
प्रश्न 1: चित्र में बनाए गए विभिन्न पौधों और जंतुओं के बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर: चित्र में दर्शाए गए विभिन्न पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से पता चलता है कि हमारे आस-पास प्रकृति में अत्यधिक विविधता (Variety) पाई जाती है। प्रत्येक पौधा और जंतु एक-दूसरे से रूप, आकार और स्वभाव में भिन्न होता है।
प्रश्न 2: कक्षा के सभी विद्यार्थियों द्वारा श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) पर भिन्न-भिन्न प्रकार के पौधों और जंतुओं के कितने चित्र बनाए गए हैं?
उत्तर: कक्षा के सभी विद्यार्थियों द्वारा श्यामपट्ट पर लगभग 10 से 15 भिन्न-भिन्न प्रकार के पेड़-पौधों (जैसे वृक्ष, झाड़ी, फूल) और जंतुओं (जैसे पक्षी, कीट, चौपाया जानवर) के चित्र बनाए गए हैं।
प्रश्न 3: क्या आप सोचते हैं कि श्यामपट्ट पर चित्रित किए गए पौधों और जंतुओं के अतिरिक्त भी विभिन्न प्रकार के अनेक पौधे और जंतु हो सकते हैं?
उत्तर: हाँ, बिलकुल। श्यामपट्ट पर बनाए गए चित्रों के अलावा भी हमारी धरती पर लाखों प्रकार के पौधे और जंतु मौजूद हैं। किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी पौधों और जंतुओं की विविधता ही उस क्षेत्र की जैव विविधता (Biodiversity) कहलाती है।
2. 2.2 पौधों और जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?
प्रश्न 1: आप अपनी नोटबुक और पुस्तकों को समूहों में कैसे व्यवस्थित करेंगे? क्या उन्हें समूहों में व्यवस्थित करने से आपको अपने बस्ते को अच्छे ढंग से व्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी?
उत्तर:
हम अपनी किताबों और कॉपियों को विषय के अनुसार (जैसे: विज्ञान, गणित, हिंदी) या आकार/प्रकार के अनुसार अलग-अलग समूहों में व्यवस्थित करेंगे।
लाभ: हाँ, ऐसा करने से बस्ता व्यवस्थित रहता है और आवश्यकता पड़ने पर सही पुस्तक या नोटबुक तुरंत बिना समय गंवाए मिल जाती है।
3. क्रियाकलाप 2.3 — आइए, समूह बनाएँ
प्रश्न 1: विभिन्न समूहों द्वारा उपयोग किए गए आधार भिन्न होने के पीछे के कारण क्या हैं?
उत्तर: प्रत्येक विद्यार्थी या समूह की देखने और सोचने की दृष्टि अलग होती है।
कुछ विद्यार्थी पौधों की ऊँचाई (छोटे, मध्यम, लंबे) को आधार बनाते हैं।
कुछ विद्यार्थी फूलों की उपस्थिति/अनुपस्थिति या तने की कठोरता (कोमल या कठोर) के आधार पर समूह बनाते हैं।
प्रश्न 2: समूह बनाने का क्या महत्व है?
उत्तर:
पौधों और जंतुओं को समूहों में बाँटने से उनका अध्ययन करना सरल और सुव्यवस्थित हो जाता है।
इससे जीवों के बीच पाई जाने वाली समानताओं और विभिन्नताओं को आसानी से समझा जा सकता है।
4. क्रियाकलाप 2.4 — आइए, समूह बनाएँ (अवलोकन प्रश्न)
पौधों की ऊँचाई: हमारे आस-पास कुछ पौधे हमसे बहुत छोटे (जैसे घास, धनिया), कुछ हमारी ऊँचाई के बराबर (जैसे गुलाब, गुड़हल) और कुछ बहुत ऊँचे (जैसे आम, नीम) होते हैं।
तने का रंग और कठोरता: छोटे पौधों के तने हरे और कोमल (आसानी से मुड़ने वाले) होते हैं, जबकि बड़े पेड़ों के तने भूरे, मोटे और कठोर (न मुड़ने वाले) होते हैं।
शाखाओं का निकलना: कुछ पौधों में शाखाएँ भूमि के पास तने के आधार से निकलती हैं (झाड़ियाँ), जबकि बड़े वृक्षों में शाखाएँ तने के ऊपरी भाग से निकलती हैं।
1. शाक, झाड़ी और वृक्ष में मुख्य अंतर
शाक (Herb): ये छोटे आकार के पौधे होते हैं। इनका तना हरा और कोमल होता है। (उदाहरण: टमाटर, धान, गेहूँ)
झाड़ी (Shrub): ये मध्यम आकार के पौधे होते हैं। इनका तना कठोर होता है लेकिन वृक्ष जितना मोटा नहीं होता, और शाखाएँ भूमि के पास से ही निकलती हैं। (उदाहरण: गुलाब, नींबू)
वृक्ष (Tree): ये बहुत ऊँचे और विशाल पौधे होते हैं। इनका तना मोटा, भूरा, कठोर और काष्ठीय (लकड़ी जैसा) होता है। शाखाएँ तने के ऊपरी हिस्से से निकलती हैं। (उदाहरण: आम, बरगद, नीम)
2. आरोही और विसर्पी लता
विसर्पी लता (Creeper): कमज़ोर तने वाले पौधे जो सीधे खड़े नहीं हो सकते और ज़मीन पर फैलकर बढ़ते हैं। (उदाहरण: कद्दू, तरबूज)
आरोही लता (Climber): कमज़ोर तने वाले पौधे जो किसी ढाँचे या पेड़ का सहारा लेकर ऊपर चढ़ते हैं। (उदाहरण: मनी प्लांट, मटर)
3. क्रियाकलाप 2.5 — पत्तियों की संरचना और शिरा-विन्यास (Venation)
प्रश्न: पत्तियों की आकृति और संरचना में क्या भिन्नताएँ होती हैं?
उत्तर: पत्तियों की आकृति, आकार, रंग और उनके ऊपर बनी रेखाओं (शिराओं) के पैटर्न में अंतर होता है।
शिरा-विन्यास के प्रकार:
जालिकारूपी शिरा-विन्यास (Reticulate Venation): जब शिराएँ मुख्य मध्य शिरा के दोनों ओर एक जाल (Net) जैसा पैटर्न बनाती हैं।
उदाहरण: गुड़हल, सरसों, आम की पत्तियाँ।
समांतर शिरा-विन्यास (Parallel Venation): जब शिराएँ एक-दूसरे के समांतर (Parallel) चलती हैं।
उदाहरण: केला, घास, मक्का, बास की पत्तियाँ।
4. क्रियाकलाप 2.6 — जड़ों के प्रकार (Types of Roots)
प्रश्न: सरसों और घास की जड़ों में क्या अंतर दिखाई देता है?
गुण | मूसला जड़ तंत्र (Tap Root System) | झकड़ा / रेशेदार जड़ तंत्र (Fibrous Root System) |
संरचना | इसमें एक मुख्य (बड़ी) जड़ होती है, जिससे छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं। | इसमें कोई मुख्य जड़ नहीं होती, बल्कि तने के आधार से पतली जड़ों का गुच्छा निकलता है। |
उदाहरण | सरसों, गुड़हल, आम, चना। | घास, मक्का, धान, बांस। |
💡 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु:
जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है, प्रायः उनमें मूसला जड़ पाई जाती है। वहीं जिन पौधों में समांतर शिरा-विन्यास होता है, उनमें झकड़ा (रेशेदार) जड़ पाई जाती है।
1. सारिणी 2.4 — पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ों के प्रकार
क्रम सं. | पौधे का नाम | पत्तियों के शिरा-विन्यास का प्रकार (जालिकारूपी या समानांतर) | जड़ के प्रकार (झकड़ा या मूसला) |
1. | लेमन घास | समानांतर | झकड़ा (रेषेदार) |
2. | गेंदा | जालिकारूपी | मूसला |
3. | सदाबहार (पेरीविंकल) | जालिकारूपी | मूसला |
4. | गेहूँ / मक्का | समानांतर | झकड़ा (रेषेदार) |
5. | चना / आम | जालिकारूपी | मूसला |
💡 पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ के प्रकार में संबंध:
जिन पौधों की पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है, उनमें मूसला जड़ें पाई जाती हैं।
जिन पौधों की पत्तियों में समानांतर शिरा-विन्यास होता है, उनमें झकड़ा (रेशेदार) जड़ें पाई जाती हैं।
2. क्रियाकलाप 2.8 — द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री बीज
प्रश्न 1: द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री बीज में क्या अंतर है?
द्विबीजपत्री (Dicot): जिन बीजों के बाहरी आवरण को हटाने पर वे आसानी से दो भागों (बीजपत्रों) में बँट जाते हैं, उन्हें द्विबीजपत्री कहते हैं।
उदाहरण: चना, मटर, राजमा, आम।
विशेषता: इनकी पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास और जड़ों में मूसला जड़ तंत्र होता है।
एकबीजपत्री (Monocot): जिन बीजों में केवल एक ही बीजपत्र होता है और वे दो भागों में नहीं बँटते, उन्हें एकबीजपत्री कहते हैं।
उदाहरण: मक्का, गेहूँ, धान, बास।
विशेषता: इनकी पत्तियों में समानांतर शिरा-विन्यास और जड़ों में झकड़ा (रेशेदार) जड़ तंत्र होता है।
3. क्रियाकलाप 2.9 — जंतुओं में गति और उनके अंग (चित्र 2.7 आधारित)
चित्र में दिए गए विभिन्न जंतुओं की गति और उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले अंगों की सूची:
जंतु का नाम | गति का प्रकार | गति के लिए उपयोग किए जाने वाले अंग |
गाय / खरगोश | चलना, दौड़ना, कूदना | चार पाद (पैर) |
पक्षी (जैसे चील, कौआ) | उड़ना और चलना | पंख और पैर |
मछली | तैरना | फिन (पंख/Dorsal fins) और पूँछ |
साँप | रेंगना (सरकना) | पूरा शरीर / शल्क (Scales) |
मेढक | तैरना और कूदना | झिल्लीदार पश्च पाद (पीछे के पैर) |
तितली / कीट | उड़ना और रेंगना | पंख और छह पाद (पैर) |
1. तालिका 2.5 — जंतुओं की गति और गति के लिए प्रयुक्त शरीर के अंग
क्रम सं. | जंतु का नाम | गति का प्रकार | गति के लिए प्रयुक्त शरीर के अंग |
1. | चींटी | चलना / रेंगना | टाँगें (छह पैर) |
2. | बकरी | चलना और कूदना | टाँगें |
3. | कबूतर | उड़ना और चलना | पंख और पैर |
4. | मक्खी | चलना और उड़ना | पैर और पंख |
5. | मछली | तैरना | पख (फिन) और पूँछ |
6. | साँप | रेंगना (सरकना) | पूरा शरीर / शल्क |
7. | मेढक | तैरना और कूदना | झिल्लीदार पश्च पाद (पीछे के पैर) |
8. | मनुष्य | चलना और दौड़ना | टाँगें |
2. वैज्ञानिक से परिचय — जानकी अम्मल (1897–1984)
कौन थीं: जानकी अम्मल एक प्रसिद्ध भारतीय वनस्पतिशास्त्री (Botanist) थीं।
योगदान:
इन्होंने भारत के पौधों की समृद्ध जैव विविधता का प्रलेखन (Documentation) और संरक्षण किया।
इन्होंने ‘साइलेंट वैली बचाओ’ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) की प्रमुख के रूप में पौध-विविधता के सर्वेक्षण कार्यक्रम शुरू किए।
3. तालिका 2.6 — विभिन्न परिवेशों में पाए जाने वाले जंतु और पौधे
क्रम सं. | मरुस्थल में | पर्वतीय क्षेत्र में | महासागर/जल में | जंगल में | अन्य (हमारे आस-पास) |
1. | ऊँट, नागफनी | देवदार का वृक्ष, याक | मछली, व्हेल | शेर, बरगद | गाय, नीम |
2. | बबूल, सांप | चीड़ (पाइन), पहाड़ी बकरी | झींगा, जलीय पौधे | बाघ, हाथी | कुत्ता, गुलाब |
3. | बिच्छू, कटीली झाड़ियाँ | हिम तेंदुआ, बुरांश | केकड़ा, समुद्री घास | भालू, साल का वृक्ष | गेंदा, चींटी |
4. पौधों और जंतुओं का उनके परिवेश में अनुकूलन (Adaptation)
(क) नागफनी (कैक्टस) — मरुस्थल में अनुकूलन:
मांशल तना: इसका तना मोटा और मांशल होता है जो जल को संचित (Store) करके रखता है।
काँटेदार पत्तियाँ: पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं ताकि वाष्पोत्सर्जन (पानी का उड़ना) कम से कम हो।
(ख) देवदार का वृक्ष — पर्वतीय क्षेत्र में अनुकूलन:
शंक्वाकार आकृति: ये वृक्ष शंकु (Cone) के आकार के होते हैं और इनकी शाखाएँ तिरछी/झुकी हुई होती हैं।
लाभ: इससे सर्दियों में बर्फ इनके ऊपर टिकती नहीं है और आसानी से फिसलकर नीचे गिर जाती है।
(ग) राजस्थान (गर्म मरुस्थल) का ऊँट बनाम लद्दाख (ठंडे मरुस्थल) का ऊँट:
लक्षण | राजस्थान का ऊँट (गर्म मरुस्थल) | लद्दाख का ऊँट (ठंडा मरुस्थल) |
पैर | लंबे पैर और चौड़े गद्देदार खुर, जो रेत में नहीं धँसते। | छोटे और मजबूत पैर, जो पहाड़ी इलाकों में आसानी से चलते हैं। |
कूबड़ (Hump) | एक कूबड़ होता है। | दो कूबड़ होते हैं। |
शरीर के बाल | बाल छोटे होते हैं। | सिर से लेकर गर्दन और शरीर पर लंबे घने बाल होते हैं जो अत्यधिक ठंड से बचाते हैं। |
1. अनुकूलन और आवास (Adaptation and Habitat)
अनुकूलन (Adaptation): वे विशिष्ट विशेषताएँ या संरचनाएँ जो पौधों और जंतुओं को उनके परिवेश (विशेष क्षेत्र) में जीवित रहने और फलने-फूलने में सक्षम बनाती हैं, अनुकूलन कहलाती हैं।
आवास (Habitat): वह स्थान जहाँ पौधे और जंतु स्वाभाविक रूप से रहते हैं और अपनी आवश्यकताओं (भोजन, जल, वायु, आश्रय) की पूर्ति करते हैं, उसे उनका आवास कहते हैं।
आवास के प्रकार:
थलीय आवास (Terrestrial Habitat): थल (भूमि) पर रहने वाले जीवों का आवास। (उदाहरण: वन, घास के मैदान, मरुस्थल, पर्वतीय क्षेत्र)
जलीय आवास (Aquatic Habitat): जल में रहने वाले जीवों का आवास। (उदाहरण: तालाब, झील, नदियाँ, महासागर)
उभयचर (Amphibians): ऐसे जीव जो जल और थल दोनों स्थानों पर रह सकते हैं। (उदाहरण: मेढक)
2. वैज्ञानिक से परिचय — सालीम अली (1896–1987)
उपनाम: इन्हें 'भारत का पक्षी पुरुष' (Birdman of India) कहा जाता है।
योगदान:
इन्होंने भारत भर में पक्षियों की विविधता का अवलोकन किया और उनकी सूची तैयार की।
इन्होंने पक्षियों पर 10 खंडों (Volumes) की एक ऐतिहासिक पुस्तक श्रृंखला लिखी।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) और रंगनाथिट्टू पक्षी अभ्यारण्य के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्मान: इनके अतुलनीय योगदान के लिए इन्हें 1976 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
3. वन्यजीव संरक्षण परियोजनाएँ (Wildlife Conservation)
बाघ परियोजना (Project Tiger): भारत में घटती बाघों की संख्या को बचाने और संरक्षित करने के लिए वर्ष 1973 में प्रारंभ की गई।
चीता पुनर्वास परियोजना (Cheetah Reintroduction Project): चीता की संख्या को भारत में पुनः स्थापित करने के लिए वर्ष 2022 में शुरू की गई।
गोडावण (Great Indian Bustard): इसके संरक्षण के लिए गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों में आवासों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।
पवित्र उपवन (Sacred Groves): स्थानीय समुदायों द्वारा परंपरागत रूप से संरक्षित वनों के वे क्षेत्र जहाँ किसी भी पेड़-पौधे को काटने या जीव को हानि पहुँचाने की अनुमति नहीं होती। (उदाहरण: पश्चिमी घाट के पवित्र उपवन)
4. प्रमुख शब्द (Key Terms) — त्वरित परिभाषाएँ
एकबीजपत्री (Monocot): जिन बीजों में एक ही बीजपत्र होता है। (उदा: मक्का, गेहूँ)
द्विबीजपत्री (Dicot): जिन बीजों में दो बीजपत्र होते हैं। (उदा: चना, मटर)
जालिकारूपी शिरा-विन्यास: पत्ती पर शिराओं का जाल जैसा पैटर्न।
समानांतर शिरा-विन्यास: पत्ती पर शिराओं का एक-दूसरे के समानांतर होना।
मूसला जड़ (Tap Root): एक मुख्य भारी जड़ जिससे छोटी जड़ें निकलती हैं।
झकड़ा / रेशेदार जड़ (Fibrous Root): तने के आधार से निकलने वाला जड़ों का गुच्छा।
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